युवाओं की रचनाओं से मिलता है भविष्य का संकेत

Updated at : 07 Sep 2019 5:21 AM (IST)
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युवाओं की रचनाओं से मिलता है भविष्य का संकेत

राष्ट्रीय साहित्य अकादमी कोलकाता एवं प्रभात खबर के तत्वावधान में काव्य महाकुंभ कार्यक्रम का आयोजन कोलकाता : युवा कवियों को सुनना बहुत आवश्यक है, क्योंकि उनकी कविताओं के जरिये अभिव्यक्त हो रही उनकी भावनाएं भविष्य का संकेत करती हैं. पता चलता है कि आज का युवा आनेवाले कल के बारे में क्या सोचता रहा है, […]

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राष्ट्रीय साहित्य अकादमी कोलकाता एवं प्रभात खबर के तत्वावधान में काव्य महाकुंभ कार्यक्रम का आयोजन

कोलकाता : युवा कवियों को सुनना बहुत आवश्यक है, क्योंकि उनकी कविताओं के जरिये अभिव्यक्त हो रही उनकी भावनाएं भविष्य का संकेत करती हैं. पता चलता है कि आज का युवा आनेवाले कल के बारे में क्या सोचता रहा है, कैसे सोच रहा है और वह क्या चाह रहा है. इससे यह भी आभास मिलता है कि भविष्य में राष्ट्र और राज-समाज की दिशा-देश कैसी होगी, क्योंकि आज का युवा ही आनेवाले कल का हमारा नेतृत्वकर्ता होगा. राष्ट्रीय साहित्य अकादमी कोलकाता एवं प्रभात खबर के तत्वावधान में भारतीय भाषा परिषद के सेमिनार हॉल में शुक्रवार को आयोजित काव्य महाकुंभ कार्यक्रम में उक्त बातें शिमला से पधारी कंचन शर्मा ने कहीं.

काव्य महाकुंभ के पहले सत्र को बातौर अपने अध्यक्षीय संबोधन में योगेंद्र शुक्ल (सुमन) ने कवियों और कविताओं की वर्तमान दशा पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आज कवि और कविता ठेकेदारों के हाथ में जा चुकी है. यह साहित्य और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है. तथापि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ने की सलाह दी और कवि-साहित्यकारों से इस स्थिति को बदलने के लिए लगातार प्रयासरत रहने की सलाह दी.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ सत्या उपाध्याय ने कहा कि लेखन के द्वारा भी समाज में बदलाव लाया जा सकता है. कार्यक्रम में आज जितने भी युवा कवियों व कवयित्रियों ने कविता का पाठ किया उन सभी में समाज, प्रकृति और मानवता के प्रति हो रहे अत्याचार से मुक्ति पाने की छटपटाहट दिखती है. कविता को सोच कर नहीं लिखी जाती यह तो मानव मन में उमड़-घुमड़ कर अचानक बरस पड़ती है.

इस दौरान अपने संबोधन में डॉ सत्या उपाध्याय ने कहा कि कविता प्रत्येक मनुष्य के हृदय के उन उद्गारों को व्यक्त करती है, जो अपने समाज में अपने चारों तरफ देखते हैं. उन्होंने कहा कि कविता चाहे क्रांति की हो, आक्रोश की हो या या फिर प्रेम की, कविता का मूल उद्गम तो प्रेम ही होता है. जब तक हमारे मन में अपने देश, समाज और प्रियतम के प्रति भाव नहीं उमड़ता, तब तक कविता की रचना नहीं हो पाती है इसलिए मैं मानती हूं कि जिसका स्रोत ही प्रेम हो, वह संसार में प्रेम का ही प्रसार करेगा. आज संसार में जहां भाग-दौड़ और छीना-झपटी है, वहां कविता मानवीय प्रेम का प्रसार करती है.

इस दौरान राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के संयोजक रणविजय श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे अकादमी का मुख्य उद्देश्य है कलकत्ता को उन अनजान कवियों को मंच प्रदान करना जिनकी कविता कागज के पन्नो में ही रह जाती है. उपेक्षित और दरकिनार कवियों का ही यह मंच है. श्री श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को 75 से ज्यादा कवियों ने कविता पाठ किया. शनिवार को सभी कवियों को सम्मानित किया जायेगा. शनिवार को भारतीय भाषा परिषद सभागार में पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि बैरकपुर के सांसद अर्जुन सिंह उपस्थित रहेंगे.

राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रामनाथ यादव ‘बेखबर’ ने अपने संबोधन में संस्था के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि कलकत्ता के कवियों के लेकर दो दिवसीय काव्य महाकुंभ का आयोजन हो रहा है. काव्य महाकुंभ में शनिवार को राष्ट्रीय साहित्य अकादमी की पत्रिका मंजरी का लोकार्पण होगा. हमारी संस्था नये कवियों को मंच प्रदान करना चाहती है.

मंचासीन अतिथियों में गजलकार सेराज खान बातिश, शिमला से कंचन शर्मा, खुदीराम कॉलेज की प्रोफेसर डॉ शुभ्रा दूबे और चंद्रिका प्रसाद अनुरागी मुख्यरूप से उपस्थित रहे. मंच का संचालन विश्वजीत शर्मा ने किया. कार्यक्रम में रीमा पांडेय, रंजीत प्रसाद, अनिल उपाध्याय, सत्यप्रकाश भारती, अमित अंवष्ठ, शुचिता पांडेय, बाबूलाल गुप्ता, कामना, जीवन सिंह, जूही जाह्वनवी, आरती सिंह, उर्मिला चक्रवर्ती, श्रद्धा, अनुराधा सिंह, शिवप्रकाश दास, सुनिता रंजन दास, शंभु प्रसाद निराला, मनोज राजेंद्र मिश्रा, पूनम सोनछात्रा, नीतू सिंह, प्रीति भारती के साथ विभिन्न स्कूल-कॉलेज व अन्य संस्थाओं से पधारे कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया.

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