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By Prabhat Khabar Digital Desk
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वार्ड 22 में सफाई व अवैध पार्किंग की है समस्या

कचरे से पटा है गंगा घाट

सड़कों पर भी साफ-सफाई का अभाव

कोलकाता : हुगली नदी के किनारे स्थित बड़ाबाजार, जो देश का ओल्ड बिजनेस हब है, इसलिए यहां हर रोज लाखों की संख्या में लोग आते हैं. गौरतलब है कि यहीं कोलकाता नगर निगम का 22 नंबर वार्ड है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार वार्ड की कुल जनसंख्या 15,730 है. अब इस घनी आबादी वाले वार्ड में मतदाताओं की संख्या लगभग साढ़े 12 हजार है.

यहां हिंदी भाषियों की संख्या अधिक है जहां निम्न, मध्यम व उच्च वर्ग के लोग निवास करते हैं. यहां के लोग साफ-सफाई ,अवैध पार्किंग सहित विभिन्न समस्याओं से परेशान हैं. ज्ञात हो कि इसी वार्ड के पोस्ता इलाके में 31 मार्च 2016 को विवेकानंद फ्लाइओवर का एक हिस्सा ढहने 27 लोगों की मौत हो गयी थी. वार्ड की समस्याओं पर एक नजर :

जहां-तहां होती है अवैध पार्किंग

उत्तर कोलकाता स्थित इस वार्ड में अवैध पार्किंग सबसे बड़ी समस्या है. दिन में पूरा वार्ड ही पार्किंग तब्दील हो जाता है. पुराना व्यावसायिक केंद्र होने के कारण यहां रोज हजारों छोटे-बड़े वाहन आते रहते हैं. राजा कटरा, कालीकृष्ण टैगोर स्ट्रीट, दर्प नारायण टैगोर स्ट्रीट, धूपकाठी गली, कालाकर स्ट्रीट जैसे मुख्य स्थानों पर अवैध तरीके से पार्किंग की जाती है.

इसके बाद भी गाड़ियों की संख्या इतनी होती है कि पार्किंग के लिए जगह कम पड़ जाती है. पार्किंग की सबसे अधिक समस्या राजा कटरा इलाके में हैं. निगम के पार्किंग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में हम अवैध पार्किंग पर नकले नहीं कस पा रहे हैं.

अधिकारी ने बताया कि वार्ड में 120 पार्किंग स्थल हैं. महर्षि देवेंद्र रोड में 65, अहिरीटोला स्टैंड रोड में 20, अहिरी टोला-शोभाबाजार घाट में 15 एवं बीसी लेन में कुल 20 पार्किंग जोन हैं. पुलिस की लापरवाही के कारण भी यहां अवैध पार्किंग का धंधा फल-फूल रहा है. शहर में अवैध पार्किंग पर नकेल कसने के लिए 913 मोबाइल ऐप निगम ने दिये थे, लेकिन इनमें से 477 खराब हो चुके हैं.

नहीं होती नियमित साफ-सफाई

स्थानीय लोगों की कहना है कि निगम कर्मी दिन में तीन बार वार्ड की सफाई करते हैं. हर रोज सुबह कचरा उठाते भी हैं. लेकिन बाहर से आने वाले लोग सड़क पर ही कूड़ा कचरा फेंक देते हैं. वार्ड के राजा कटरा इलाके में निगम का एक ओपेन वैट है. यहां खुले में ही कचरा फेंका जाता है. हालांकि निगम की गाड़ी व जेसीबी से हर रोज कचरा उठाया जाता हैं.

इसके बाद यहां इतनी गंदगी फैली हुई रहती है कि नाक को बगैर ढके यहां से गुजर नहीं सकते. निगम के अनुसार वार्ड की सफाई के लिए स्थायी व अस्थायी करीब 65 मजदूर हैं. पार्किंग की व्यवस्था होने के बावजूद सड़क किनारे जहां- तहां गाड़ी लगाने के कारण रास्तों की ठीक तरह से सफाई नहीं हो पाती है.

क्षतिग्रस्त फ्लाइओवर पर गंदगी का अंबार ः विवेकानंद फ्लाइओवर का एक हिस्सा ढहने के बाद से यहां निर्माण का कार्य बंद है. घटना के लगभग चार साल हो चुके हैं. ज्ञात हो कि यह ब्रिज जन बहुल इलाके में स्थित है. पोस्ता इलाके में ब्रिज के दोनों किनारों पर आवासीय मकान हैं और लोग अपने घर की गंदगी इसी पर फेंक देते हैं. इससे पुल पर गंदगी अंबार लगता जा रहा है. कई जगहों पर झाड़ भी उग आये हैं. गंदगी के कारण पुल पर पानी जमाने से डेंगू व मलेरिया फैलने का भय है.

गंगा में समा गया बालू घाट

बोरो चार स्थित वार्ड 22 में जगन्नाथ घाट व बालू गंगा घाट हैं, जिनकी हालत बेहद खराब है. यहां रहने वाले भोला व संतोष ने बताया कि इस घाट की सफाई वर्ष में एक बार छठ पूजा के समय होती है. लोग यहीं शौच कर देते हैं. यह गंगा घाट नहीं बल्कि कूड़ादान है. घाट का अधिकांश हिस्सा गंगा में समा गया है. सीढ़ियां टूट चुकी हैं. घाट पर बिजली भी नहीं रहती है.

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