जहरीली गैस की चपेट में आने से खदान में बेहोश
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Oct 2019 2:37 AM
उनका सहयोगी किसी तरह खदान से निकलने में रहा सफल, दी जानकारी प्रशासन की पहल पर इसीएल की रेस्क्यू टीम ने शुरू किया अपना अभियान सुरंगे संकरी होने, गैस की अधिकता के कारण घटनास्थल तक नहीं पहुंची टीम तीन ब्लोअर फैन लगा जहरीली गैस को बाहर निकालने का अभियान आरंभ आसनसोल : कुल्टी थाना अंतर्गत […]
उनका सहयोगी किसी तरह खदान से निकलने में रहा सफल, दी जानकारी
प्रशासन की पहल पर इसीएल की रेस्क्यू टीम ने शुरू किया अपना अभियान
सुरंगे संकरी होने, गैस की अधिकता के कारण घटनास्थल तक नहीं पहुंची टीम
तीन ब्लोअर फैन लगा जहरीली गैस को बाहर निकालने का अभियान आरंभ
आसनसोल : कुल्टी थाना अंतर्गत वार्ड संख्या 73 के अकवनबागान इलाके के पास कोयला के अवैध पिट खदान में खनन के दौरान स्थानीय दुर्गा माझी, विनय माझी, संतोष माझी फंस गये. इनका एक साथी किसी तरह निकलने में सफल रहा. उसने इसकी सूचना स्थानीय लोगों को दी. जिसके उपरांत सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचने के बाद रविवार की रात से ही इसीएल की माइन्स रेस्क्यू टीम तीनों को निकालने के प्रयास में जुटी है.
सोमवार की रात तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली. पिट खदान का मुहाना इतना छोटा है कि बचाव दल के लोग अंदर नहीं पहुंच पा रहे है. अंदर से गैस का रिसाव भी हो रहा है. खदान से गैस को बाहर निकलने के लिए दो ब्लोअर फैन लगाये गये है. घटनास्थल पर सहायक पुलिस आयुक्त (वेस्ट) शांतब्रत चंद, स्थानीय पार्षद नेपाल चौधरी, पूर्व पार्षद बच्चू राय, इसीएल माइन्स रेस्क्यू के अधिकारी, सदस्य व सैकड़ो लोग उपस्थित है. सूत्रों के अनुसार स्थानीय लोगों को ही रेस्क्यू के कार्य में लगाकर अंदर फंसे तीनों लोगों को बाहर निकालने की प्रक्रिया पर विचार विमर्श किया जा रहा है.
सनद रहे कि नियामतपुर से आसनसोल जाने के क्रम में लच्छीपुर गेट बस स्टैंड से दाहिने ओर 500 मीटर की दूरी पर अकवन बागान इलाका स्थित है. इसके आसपास आलडीह, टहराम, धेमोमेन, मिठानी आलडीह, बैजडीह आदि इलाका है. यह पूरा इलाका कोयले से भरा हुआ है. इस इलाके के कोयला ब्लॉक की नीलामी भी हो चुकी थी.
बाद में यह रद्द हो गयी. इस इलाके में सैकड़ो की संख्या पिट खदान बनाकर कोयले की चोरी होती है. जमीन से 15 से 20 फ़ीट नीचे जाने पर ही कोयला का स्तर आरम्भ हो जाता है. सैकड़ों की संख्या में लोग यहां कोयला चोरी के कार्य में लगे हुए हैं. रस्सी से लटक कर नीचे जाते हैं. अंदर सुरंग बनाकर कोयला काटते है. जिसे टोकरी में भरकर बाहर निकाल लिया जाता है.
रविवार की दोपहर को दुर्गा माझी, विनय माझी, संतोष माझी और उनका एक सहयोगी पिट खदान के अंदर गये. सूत्रों के अनुसार दुर्गा सुरंग में सबसे आगे चल रहा था. अचानक वह सुरंग में गिर गया. सुरंग में भारी मात्रा में गैस का रिसाव हो रहा था. दुर्गा को निकालने गए विनय और संतोष भी गिर पड़े.
यह देख उनका अन्य साथी जल्दी से बाहर निकलकर इसकी जानकारी लोगों को दी. सूचना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचने के बाद घटनास्थल पर रात को बचाव दल के कर्मी पहुंचे. खदान का मुंह काफी संकरा है कि बचाव दल के कर्मी अपनी साज-सामान के साथ अंदर दाखिल नहीं हो पाये. बचाव दल के कर्मी 15 फीट तक ही नीचे उतर सके. अंदर से गैस का भारी रिसाव होने और अंदर दर्जनों सुरंग होने के कारण वे वापस लौट आये.
रविवार की सुबह ऑक्सीजन गैस के साथ बचाव कर्मी अंदर दाखिल हुए. लेकिन अंदर सुरंग और भी संकरी होने के कारण वे किसी भी सुरंग में प्रवेश नहीं कर पाए और वापस लौट आये. पिट खदान और खदान के बाहर दो ब्लोअर फैन लगाये गये. अंदर से गैस बाहर निकालने का कार्य किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार गैस को कम करके स्थानीय कुछ लोगों को ही बचाव कार्य में लगाने की प्रक्रिया पर चर्चा चल रही है. स्थानीय लोग इस कार्य में माहिर हैं उन्हें सभी सुरंगों का पता है. इसलिए अंदर गैस को कम करने के लिए ब्लोवर से बाहर निकाला जा रहा है.
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