गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करें
कोलकाता: केंद्र सरकार के साथ-साथ अब राज्य सरकार से भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की गयी है. नेताजी के रिश्तेदारों व नेताजी के अंतध्र्यान रहस्य पर किताब लिखने वाले अनुज धर ने यह मांग की है. संवाददाता सम्मेलन में श्री धर ने कहा कि पश्चिम बंगाल […]
कोलकाता: केंद्र सरकार के साथ-साथ अब राज्य सरकार से भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की गयी है. नेताजी के रिश्तेदारों व नेताजी के अंतध्र्यान रहस्य पर किताब लिखने वाले अनुज धर ने यह मांग की है.
संवाददाता सम्मेलन में श्री धर ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार के पास नेताजी से संबंधित कम से कम 64 गुप्त फाइलें हैं. उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए. उन्हें सार्वजनिक न करने का कोई कारण भी नहीं है. नेताजी के रिश्तेदार चंद्र कुमार बोस ने कहा कि उनकी आरटीआइ याचिका पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जवाब मिला कि उनके पास 33 क्लासिफाइड फाइलें हैं, जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.
सार्वजनिक करने से भारत के दोस्ताना संबंध वाले पड़ोसी देश से रिश्ते खराब होने का खतरा है. एक और आरटीआइ में गृह मंत्रलय ने माना था कि उसके पास नेताजी से संबंधित 70 हजार पेज हैं. इनमें से कई पेजों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. नेताजी के रिश्तेदारों का कहना था इन फाइलों को सार्वजनिक करके रहस्य से परदा उठाया जाना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि 21 अक्तूबर 1943 को नेताजी ने आजाद हिंद की प्रोविजनल सरकार का गठन किया था. लेकिन इसका उल्लेख इतिहास की पुस्तकों में नहीं मिलता है. उन्हें भी पाठय़ पुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए. इस संबंध में उन्होंने मुक्त मंच बनाया है, जिसके जरिये सरकार पर दबाव बनाया जायेगा कि वह नेताजी से संबंधित गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करके उनसे जुड़े रहस्यों का परदाफाश करे. मुक्त मंच हस्ताक्षर अभियान चलाने के साथ लोगों के वोटर आइडी कार्ड की फोटो कॉपी भी लेगा, ताकि उनकी मांग की सच्चई सरकार के सामने आ सके.
नेताजी के रिश्तेदारों का यह भी कहना है कि अमेरिका के नेशनल आर्काइव में भी नेताजी की बाबत कई गुप्त फाइलें हैं. उन्हें अमेरिकी कानून के तहत सार्वजनिक करने के उपाय किये जायेंगे. वह चाहते हैं कि जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी नेताजी की तथाकथित अस्थियों की डीएनए जांच करायी जाये, लेकिन यह जांच भारत में नहीं होनी चाहिए. नेताजी के कुछ रिश्तेदार व अन्य लोग सोमवार को रेड रोड से आइएनए मोनूमेंट व नेताजी की मूर्ति के समक्ष गये और माल्यार्पण किया.
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