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Madhya Pradesh: दिल्ली से बैरंग लौटे शिवराज सिंह चौहान, मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला टला!

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान.
File Photo

नयी दिल्ली : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर वापस भोपाल लौट गये हैं. माना जा रहा है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व से मंत्रीमंडल विस्तार पर कोई बात नहीं हुई. ऐसे में मंत्रीमंडल विस्तार का मामला अभी लटक सकता है. प्रधानमंत्री से मुलाकात में शिवराज ने राज्य में कोरोनावायरस की स्थिति और वायरस के खिलाफ लड़ाई के बारे में जानकारी दी.

सूत्रों का कहना है कि मुलाकात के दौरान मंत्रीमंडल विस्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई है. चौहान जल्द ही अपना मंत्रिमंडल विस्तार करने वाले हैं लेकिन इस बहुप्रतीक्षित विस्तार की तारीख को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है. चौहान इस सिलसिले में केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के लिए रविवार को दिल्ली पहुंचे थे. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और प्रदेश में भाजपा के संगठन महासचिव सुहास भगत भी उनके साथ दिल्ली पहुंचे.

चौहान ने अब तक भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात की. प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद चौहान ने एक बार फिर नड्डा से पार्टी मुख्यालय में मुलाकात की. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संभावित मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए दोनों नेताओं ने चर्चा की.

नड्डा से मुलाकात के बाद चौहान पत्रकारों से बात किये बगैर मध्य प्रदेश भवन चले गये. मंगलवार सुबह उनके भोपाल के लिए रवाना होने की संभावना है. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, जिन्हें मध्यप्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, वह भी मंगलवार को भोपाल पहुंच सकती है. सोमवार को ही आनंदीबेन का भोपाल आने का कार्यक्रम था लेकिन वह स्थगित हो गया.

इनको मिल सकती है मंत्रीमंडल में जगह

मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का लखनऊ में एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है. भाजपा सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल में 20 से 25 लोगों को शामिल किया जा सकता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मार्च माह में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए नौ पूर्व विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच मुख्यमंत्री चौहान एक माह तक अकेले ही सरकार चलाते रहे.

बाद में अप्रैल माह में उन्होंने पांच मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया था. मार्च में कांग्रेस के 22 विधायकों के राज्य विधानसभा से त्यागपत्र देने से कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार गिर गयी थी और चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी थी. वे रिकार्ड चौथी बार प्रदेश के मुखिया बने हैं. कांग्रेस के अधिकांश बागी विधायक, जिन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था, सिंधिया के समर्थक माने जाते हैं.

प्रधानमंत्री से प्रवासी मजदूरों और लॉकडाउन पर हुई चर्चा

राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान चौहान ने प्रवासी मजदूरों के रोजगार और लॉकडाउन में राज्य की अर्थव्यस्था को मजबूती देने जैसे विषयों पर चर्चा की. मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के खिलाफ जंग जीतने में राज्य सरकार की ओर से किये जा रहे प्रयासों से भी प्रधानमंत्री को अवगत कराया.

बयान में कहा गया, ‘मार्च 2020 में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से यह पहली मुलाकात थी.' लगभग आधे घंटे चली इस मुलाकात के दौरान चौहान ने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की ओर से प्रकाशित पुस्तकें ‘उम्मीद' तथा ‘मध्य प्रदेश: विकास के लिए प्रतिबद्ध प्रयास' भेंट की. पुस्तक ‘उम्मीद' में प्रवासी मजदूरों के लिए उठाये गये कदमों की विस्तृत जानकारी है वहीं दूसरी पुस्तक में चौहान के पहले सौ दिन के कार्यकाल में उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों का विवरण है.

Posted By: Amlesh Nandan Sinha.

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