शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan: सशस्त्र सीमा बल (SSB) 26 वाहिनी ‘जी- समवाय’ के जवानों ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर खरसावां में बाइक रैली निकाली और वंदे मातरम् के नारे लगाए. कमांडेंट राजीव भट्ट के निर्देश पर खरसावां के रायजामा कैंप से यह बाइक रैली निकाली गई. बाइक पर सवार एसएसबी के जवानों के साथ साथ स्थानीय लोग भी रैली में शामिल हुए. इस दौरान जवानों के हाथों में तिरंगा था और जुबां पर वंदे मातरम का नारा. जागरुकता रैली रायजामा कैंप से जेनालोंग बाडेडीह कैंप तक निकाली गयी. तिरंगे झंडों से सजी बाइकों पर सवार SSB के जवानों ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ पूरे इलाके को देशभक्ति के रंग में रंग दिया. यह बाइक रैली खरसावां के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी. रैली के दौरान जवानों के हाथों में लहराता तिरंगा और राष्ट्रभक्ति के नारों ने आम लोगों को भी भावुक कर दिया. सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने तालियों और नारों के साथ SSB जवानों का उत्साहवर्धन किया.
राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक महत्व को किया गया याद
इस अवसर पर SSB अधिकारियों ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा है. वर्ष 1876 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस राष्ट्रगीत ने आजादी की लड़ाई में करोड़ों देशवासियों को एकजुट किया था. इसके 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह रैली देश के प्रति समर्पण और एकता का प्रतीक है.
युवाओं में राष्ट्रप्रेम जगाने का संदेश
SSB अधिकारियों ने बताया कि बाइक रैली का मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ते हैं.
बड़ी संख्या में बच्चे और ग्रामीण भी हुए शामिल
मध्य विद्यालय रायजामा परिसर में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया. बच्चों को राष्ट्र गीत के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी. इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्र भक्ति, एकता और अखंडता की भावना से अवगत कराना और युवाओं को वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक महत्व के बारे में बताना था. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से उप निरीक्षक रामदयाल लोहरा, बेडाडीह के ग्राम प्रधान शंभू सिंह मुंडा, रिडींग की मुखिया नागेश्वरी हेंब्रम के अलावा कांडेरकुट्टी, रायजामा और जेनालोंग-बाडेडीह के ग्रामीण और बच्चे शामिल हुए.
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