शचिंद्र कुमार दाश
Saraikela: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर सरायकेला-खरसावां जिले में सरकारी स्तर पर कुपोषण को खत्म करने की पहल की शुरुआत कर दी गई है. इसके लिए सरकार ने अति गंभीर कुपोषित जिन्हें सैम और मैम (SAM- Severe Acute Malnutrition and MAM- Moderate Acute Malnutrition) कैटेगरी में रखा गया है, वैसे बच्चों के लिए ‘शिशु शक्ति’ खाने का पैकेट देने की व्यवस्था की है. सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई से शनिवार (24 जनवरी 2026) को ‘शिशु शक्ति’ टेक होम राशन की शुरुआत हुई. जिले के डीसी नीतीश कुमार सिंह ने प्रखंड सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इसकी शुरुआत की. पहले दिन कुचाई के छह बच्चों में ‘शिशु शक्ति’ खाने का पैकेट बांटा गया. जिले के सभी नौ प्रखंडों के अति कुपोषित बच्चों में ‘शिशु शक्ति’ खाने का पैकेट बांटा जाएगा.
‘शिशु शक्ति’ सैम-मैम बच्चों को लाभ पहुंचेगा : डीसी
डीसी नीतीश कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी शिशु शक्ति संवर्धित टीएचआर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुपोषण को दूर करना है. जिले में संचालित नियमित टेक होम राशन (टीएचआर) व्यवस्था के अलावा अब ऑगमेंटेड टेक होम राशन (एटीएचआर) कार्यक्रम का संचालन शुरू किया गया है, जिससे सैम एवं मैम कैटेगरी के बच्चों को अतिरिक्त एवं संतुलित पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा सके. सरकार के इस कार्यक्रम से अति कुपोषित (सैम-मैम) बच्चों को काफी लाभ पहुंचेगा. उन्होंने पूरी पारदर्शिता के साथ इस योजना को क्रियांवित करने पर जोर दिया. डीसी ने विश्वास जताया कि इस उन्नत एवं पोषण कार्यक्रम के माध्यम से जिले में कुपोषण की समस्या में काफी कमी आएगी और सैम-मैम श्रेणी के बच्चों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार किया जा सकेगा.
ऊर्जा, प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है ‘शिशु शक्ति’
‘शिशु शक्ति’ नामक खाने के पैकेट में सरकार द्वारा वर्तमान में उपलब्ध कराए जा रहे राशन की तुलना में ऊर्जा, प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है. टीएचआर का उपयोग सिर्फ अति गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए ही किया जाएगा. 18 जनवरी 2025 को पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत की गई है. सफलता मिलने पर सरायकेला-खरसावां जिले में भी इसकी शुरुआत की गयी. फिलहाल राज्य में सिर्फ दो ही जिलों में इसे शुरू किया गया है.
क्या है ‘शिशु शक्ति’ योजना
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 6 माह से 6 वर्ष तक के अति गंभीर कुपोषित बच्चों के पोषण के लिए शिशु शक्ति कार्यक्रम शुरू किया गया है. इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को टेक होम राशन के तहत अधिक कैलोरी तथा प्रोटीनयुक्त आहार उपलब्ध कराया जाता है. एएनएम सहिया और आंगनबाड़ी सेविका को प्रशिक्षित किया गया है. इसमें यूनिसेफ और रिम्स रांची के द्वारा तकनीकी सहयोग दिया जाएगा.
कैसे बनता है ‘शिशु शक्ति’ आहार
शिशु शक्ति आहार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज, दालों, मेवों और बाजरे से बनाया जाता है. इसे 6 महीने से 6 साल के बीच के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को उम्र के हिसाब से उचित मात्रा में दिए जाने पर बेहतर परिणाम देने के लिए तैयार किया गया है.
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में एसडीओ अभिनव प्रकाश, सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (सैम) रांची की डॉ आशा किरण व शमिता मंडल, यूनिसेफ के पोषण पदाधिकारी डॉ दिगंवर शर्मा, झारखंड राज्य पोषण मिशन के डॉ अजय कुमार वर्मा, जिला परिषद सदस्य जींगी हेंब्रम, प्रमुख गुड्डी देवी, बीडीओ साधु चरण देवगम, सीओ सह सीडीपीओ सुषमा सोरेन, प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुरुची प्रसाद, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुजीत कुमार मुर्मू, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, महिला पर्यवेक्षिका, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि, आंगनवाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, माताएं एवं लाभार्थी उपस्थित रहे.
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