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लॉकडाउन से प्रकृति को मिली संजीवनी, पर्यावरण में आया सुधार, तो दिखने लगे दुर्लभ पक्षी

कोविड-19 संकट के बीच दो महीने से भी लंबे लॉकडाउन का पॉजिटिव असर शहर से लेकर गांव-कस्बों के पर्यावरण पर दिख रहा है. प्रदूषण का स्तर सुधरा है. आसमान साफ हुआ है, तो हवाएं स्वच्छ हुई हैं. इसके साथ ही सरायकेला, चांडिल, खरसावां, कुचाई के जंगलों में कई दुर्लभ पक्षियों के कलरव सुनाई देने लगे हैं. शचीन्द्र कुमार दाश की रिपोर्ट...

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
कॉपर स्मिथ बारबेट लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है.
कॉपर स्मिथ बारबेट लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है.
Dr Tirupam Reddy

सरायकेला : कोविड-19 संकट के बीच दो महीने से भी लंबे लॉकडाउन का पॉजिटिव असर शहर से लेकर गांव-कस्बों के पर्यावरण पर दिख रहा है. प्रदूषण का स्तर सुधरा है. आसमान साफ हुआ है, तो हवाएं स्वच्छ हुई हैं. इसके साथ ही सरायकेला, चांडिल, खरसावां, कुचाई के जंगलों में कई दुर्लभ पक्षियों के कलरव सुनाई देने लगे हैं. शचीन्द्र कुमार दाश की रिपोर्ट...

सरायकेला-खरसावां जिला में इन दिनों सुबह से लेकर शाम तक खरसावां-कुचाई के गांव कस्बों में पक्षियों का कलरव सुनाई देता है. इन रंग-बिरंगे खूबसूरत पक्षियों को निहारने के लिए भी लोग पहुंच रहे हैं. जानकार बताते हैं कि इन दिनों खरसावां-कुचाई के जंगलों में पक्षियों की करीब 50 प्रजातियां दिख रही हैं. यहां विचरण कर रही हैं. कई पक्षियों ने पेड़ की डालियों के बीच मनमोहक घोषले बनाये हैं, जो लोगों को आकर्षित कर रहे हैं.

बताया जाता है कि देश में करीब 1200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाये जाते हैं. बड़े-बुजुर्गों की मानें, तो पहले खरसावां-कुचाई के रायसिंदरी की पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर अलग-अलग किस्म के पक्षी पाये जाते थे. हाल के कुछ वर्षों में इनमें से कई प्रजातियों के पक्षी को किसी ने देखा तक नहीं. हाल के दिनों में फिर से लीफ वर्ड, फ्लाई कैचर, फायरी, ब्राह्मिणी स्टारलिंग, कॉर स्मिथ बारबेट, ओरिएंट ह्वाइट आई वर्ड आदि प्रजाति की पक्षियां पाहाड़ियों के साथ-साथ खरसावां-कुचाई के गांव कस्बों में भी दिखने लगी हैं.

पर्यावरण विशेषज्ञ कह रहे हैं क हाल के दिनों में जिस तरह से बड़े पैमाने पर दुर्लभ पक्षियों का आगमन हो रहा है, ऐसे में इन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो जिस तरह से लंबे अरसे से क्षेत्र में गिद्ध नहीं दिख रहे, ये पक्षियां भी कालांतर में विलुप्त हो जायेंगी और आने वाली पीढ़ियों को इनके बारे में कोई जानकारी मुश्किल से ही मिल पायेगी. खरसावां-कुचाई के जंगलों में इन दिनों इन पक्षियों को देखा जा रहा है.

ओरिएंट ह्वाइट आई वर्ड

खरसावां-कुचाई के जंगलों में दिखे खूबसूरत पक्षी.
खरसावां-कुचाई के जंगलों में दिखे खूबसूरत पक्षी.
Dr Tirupam Reddy

भारतीय सफेद आंख, पूर्व में ओरिएंटल सफेद आंख, सफेद आंख वाले परिवार में एक छोटा-सा पाषाण पक्षी है. यह भारतीय उपमहाद्वीप में खुले जंगलों में मिलते हैं. छोटे समूहों में छोटे कीड़ों का भोजन करते हैं. अंगूठी के समान सफेद आंखों वाले इन पक्षियों का ऊपरी हिस्सा बिल्कुल पीला होता है.

रूफस ट्रीपी

भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के आसपास के हिस्सों में पाये जाते हैं.
भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के आसपास के हिस्सों में पाये जाते हैं.
Dr Tirupam Reddy

रूफस ट्रीपी एक ट्री-पीस है, जो भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के आसपास के हिस्सों में पाये जाते हैं. यह कौवा परिवार का एक सदस्य है. यह लंबे समय से टिक गया है. इनकी आवाज में संगीत की सरिता है, जो इन्हें बहुत ही विशिष्ट बनाती है. यह आमतौर पर खुले झाड़, कृषि क्षेत्रों, जंगलों और शहरी उद्यानों में पाये जाते हैं.

देश में अब तक नहीं हुआ पक्षियों का सर्वे

इस पक्षी का नाम ब्राह्मिणी स्टार्लिंग है.
इस पक्षी का नाम ब्राह्मिणी स्टार्लिंग है.
Dr Tirupam Reddy

जानकार बताते हैं कि देश में आजादी के बाद से अब तक इस क्षेत्र की पक्षियों का कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ. जानकारों का कहना है कि अंग्रेजी शासन के दौरान पक्षियों का सर्वे हुआ था. अलग झारखंड राज्य बनने के बाद वन विभाग की ओर से कई बार हाथी समेत अन्य पशुओं की गणना की गयी, लेकिन पक्षियों का कोई डाटाबेस सरकार ने नहीं बनाया.

एक्सपर्ट व्यू

डॉ तिरुपम रेड्डी, विशेषज्ञ सह प्रभारी बीएसएमटीसी, खरसावां
डॉ तिरुपम रेड्डी, विशेषज्ञ सह प्रभारी बीएसएमटीसी, खरसावां
Prabhat Khabar
पक्षी वैज्ञानिकों को प्रेरित करते हैं. पक्षी कीटों को नियंत्रित करते हैं. बीज फैलाने के साथ-साथ पोधों का परागण करते हैं. पक्षी पूरे परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखते हैं. प्रकृति व मानव जीवन में पक्षियों का महत्वपूर्ण स्थान है. इन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है. हर तरह से यह हमारे लिए लाभदायक हैं. लॉकडाउन में कई नयी प्रजातियों की पक्षियों का दिखना यह संदेश देता है कि हमें अब भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति सचेत हो जाना चाहिए.
डॉ तिरुपम रेड्डी, बीएसएमटीसी, खरसावां

ठठेरा पक्षी की गतिविधियां बढ़ी

इस पक्षी को हनी बजार्ड के नाम से जाना जाता है.
इस पक्षी को हनी बजार्ड के नाम से जाना जाता है.
Dr Tirupam Reddy

खरसावां-कुचाई के ग्रामीण से इलाकों से लेकर बाजार तक में इन दिनों ठठेरा पक्षी की चहचहाहट सुनाई देने लगी है. यह पक्षी क्षेत्र में कई जगहों पर दिखाई भी दे रही है. ठठेरा पक्षी की सुंदरता लोगों को आकर्षित कर रही है. पक्षी विशेषज्ञ डॉ तिरुपम रेड्डी ने बताया कि इस पक्षी की आवाज टुक-टुक-सी आती है. जैसे हथौड़े से तांबे के पात्र पर चोट किया जा रहा हो. अंग्रेजी में इसे कॉपरस्मिथ बारवेट के नाम से जाना जाता है.

कक्कू को भी इन दिनों खरसावां में देखा जा सकता है.
कक्कू को भी इन दिनों खरसावां में देखा जा सकता है.
Dr Tirupam Reddy

डॉ टी रेड्डी ने बताया कि बसंता पक्षी की 72 प्रजातियां विश्व में पायी जाती हैं. इनमें से 16 प्रजातियां भारत में पायी जाती है. खरसावां-कुचाई के ग्रामीण क्षेत्रों में भी तीन-चार प्रजाति के बसंता पक्षी देखे जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण में हुए सुधार के बाद इन पक्षियों की गतिविधियां बढ़ी हैं.

Posted By : Mithilesh Jha

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Published Date

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