RIMS में एक MRI मशीन के भरोसे हजारों मरीज, जांच के लिए 10 दिन तक करना पड़ रहा इंतजार

रांची के रिम्स अस्पताल में MRI जांच के लिए मरीजों को 7 से 10 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है. एक ही मशीन के भरोसे चल रही यह सुविधा कब सुधरेगी, जानिए पूरी रिपोर्ट.

RIMS MRI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एमआरआई जांच की सुविधा फिलहाल एक ही मशीन के भरोसे चल रही है. मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण एमआरआई जांच के लिए सात से 10 दिन तक की वेटिंग मिल रही है. वहीं, जांच के बाद रिपोर्ट के लिए भी दो से तीन दिन इंतजार करना पड़ रहा है. गंभीर मरीजों को कई बार मजबूरी में निजी रेडियोलॉजी सेंटरों में एमआरआई जांच करानी पड़ रही है.

रिम्स में दूसरी एमआरआई मशीन लगाने की योजना पर जनवरी से काम चल रहा है. मशीन की खरीद का टेंडर फाइनल हो चुका है और संबंधित कंपनी को कार्यादेश भी जारी कर दिया गया है. लेकिन मशीन लगाने के लिए अब तक भवन तैयार नहीं हो सका है. नयी मशीन के लिए रेडियोलॉजी विभाग के वेटिंग हॉल को तोड़कर नया भवन बनाया जाना है. चिह्नित जगह पर अभी भवन निर्माण शुरू नहीं हुआ है. ऐसे में भवन बनने, मशीन आने और उसके इंस्टॉल होने की प्रक्रिया पूरी होने में छह से आठ माह तक लगने की संभावना है. इससे मरीजों को दूसरी एमआरआइ मशीन की सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है.

एक ही MRI मशीन, वह भी मुख्य अस्पताल से 500 मीटर दूर

रिम्स में फिलहाल एक ही एमआरआई मशीन उपलब्ध है. यह मशीन स्टेडियम के पास स्थित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के बेसमेंट में लगी है. मुख्य अस्पताल से इसकी दूरी 500 मीटर से अधिक है. गंभीर मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एंबुलेंस से वहां ले जाना पड़ता है. इससे मरीजों के परिजनों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है.

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रोज 25 से 30 मरीजों की हो रही जांच

रिम्स में मौजूदा मशीन से रोज करीब 25 से 30 मरीजों की एमआरआई जांच हो पाती है. बच्चों की जांच के दौरान एनेस्थीसिया देकर उन्हें नींद में लाना पड़ता है. इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है, जिससे बच्चों समेत कुल जांच की संख्या करीब 20 तक रह जाती है. गंभीर मरीजों को भी अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है.

रोज करीब 40 मरीजों को दी जाती है MRI की सलाह

रिम्स के न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, हड्डी, ऑन्कोलॉजी समेत अन्य विभागों से रोज करीब 40 मरीजों को एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है. एक ही मशीन होने के कारण मरीजों को जांच के लिए औसतन सात से 10 दिन की वेटिंग मिल रही है. जांच के बाद रिपोर्ट मिलने में भी तीन से चार दिन का समय लग रहा है.

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गंभीर और सर्जरी वाले मरीजों को प्राथमिकता

गंभीर स्थिति वाले मरीजों और सर्जरी वाले मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर एक दिन में ही एमआरआई जांच की जाती है. हालांकि, सामान्य मरीजों को जांच के लिए लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है.

छह माह में भवन तैयार होने की उम्मीद- पीआरओ

रिम्स के पीआरओ डॉ शिशिर कुमार ने बताया कि नई एमआरआई मशीन के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. भवन निर्माण की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग को दी गई है. उम्मीद है कि छह माह में भवन तैयार हो जाएगा. इसके बाद मशीन मंगा कर इंस्टॉल की जाएगी और जांच शुरू हो जाएगी.

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By राजीव पांडेय

राजीव पांडेय प्रभात खबर में बतौर चीफ रिपोर्टर कार्यरत हैं. डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की प्रक्रिया में हैं. फिलहाल वह हेल्थ, प्रशासनिक खबरें, गुड न्यूज और लोकल खबरों पर सक्रिय रूप से काम कर रहे है. इसके अलावा, प्रभात खबर के मल्टी मीडिया की नेशनल और सोशल मीडिया टीम के साथ मिलकर लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स तक प्रभावशाली और भरोसेमंद कंटेंट पहुंचाने का काम कर रहे हैं. राजीव ने प्रिंट मीडिया में अपने करियर की शुरुआत ‘अमर उजाला अखबार’ से की. यहां उन्होंने शिक्षा, रेलवे, धर्म अध्यात्म और जेंडर संवेदनशीलता के साथ सामाजिक मुद्दों को समझा. राजीव हमेशा सीखने में विश्वास रखते है.

राजीव ने रांची विश्वविद्यालय के मारवाड़ी कॉलेज से स्नातक और नैनी के सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर (इलाहाबाद कृषि संस्थान विश्वविद्यालय) के पत्रकारिता विभाग से डिप्लोमा किया है. राजीव पांडेय ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर के रूप में लाइव इंडिया न्यूज चैनल में वर्ष 2006 में पत्रकारिता में कदम रखा. इसके बाद वर्ष 2008 में अमर उजाला के अलीगढ़ यूनिट से जुड़े. वर्ष 2010 में झारखंड के प्रतिष्ठित दैनिक अखबार प्रभात खबर में योगदान दिया.

राजीव को पत्रकारिता में 20 साल का अनुभव है. प्रभात खबर में हेल्थ से जुड़ी कई खबरें ब्रेक की हैं, जिसमें 'स्टेंट के नाम पर लूट', 'हड्डी इंप्लांट' व 'आई के लेंस' और 'सर्जिकल आइटम में मनमाना पैसा वसूलने' की खबर शामिल हैं. प्रभात खबर डिजिटल के लिए 'हेल्थ इज वेल्थ के शो' में झारखंड के 60 से अधिक डाॅक्टरों का 'पॉडकास्ट' किया है. राजीव को वर्ष 2023 में 'लाडली मीडिया नेशनल और साउथ एशिया' अवार्ड से सम्मानित किया गया है. वहीं, चेन्नई की संस्था रीच द्वारा टीबी, डायबिटीज और कैंसर पर फैलोशिप भी मिला है.

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