RIMS MRI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एमआरआई जांच की सुविधा फिलहाल एक ही मशीन के भरोसे चल रही है. मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण एमआरआई जांच के लिए सात से 10 दिन तक की वेटिंग मिल रही है. वहीं, जांच के बाद रिपोर्ट के लिए भी दो से तीन दिन इंतजार करना पड़ रहा है. गंभीर मरीजों को कई बार मजबूरी में निजी रेडियोलॉजी सेंटरों में एमआरआई जांच करानी पड़ रही है.
रिम्स में दूसरी एमआरआई मशीन लगाने की योजना पर जनवरी से काम चल रहा है. मशीन की खरीद का टेंडर फाइनल हो चुका है और संबंधित कंपनी को कार्यादेश भी जारी कर दिया गया है. लेकिन मशीन लगाने के लिए अब तक भवन तैयार नहीं हो सका है. नयी मशीन के लिए रेडियोलॉजी विभाग के वेटिंग हॉल को तोड़कर नया भवन बनाया जाना है. चिह्नित जगह पर अभी भवन निर्माण शुरू नहीं हुआ है. ऐसे में भवन बनने, मशीन आने और उसके इंस्टॉल होने की प्रक्रिया पूरी होने में छह से आठ माह तक लगने की संभावना है. इससे मरीजों को दूसरी एमआरआइ मशीन की सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है.
एक ही MRI मशीन, वह भी मुख्य अस्पताल से 500 मीटर दूर
रिम्स में फिलहाल एक ही एमआरआई मशीन उपलब्ध है. यह मशीन स्टेडियम के पास स्थित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के बेसमेंट में लगी है. मुख्य अस्पताल से इसकी दूरी 500 मीटर से अधिक है. गंभीर मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एंबुलेंस से वहां ले जाना पड़ता है. इससे मरीजों के परिजनों को अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है.
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रोज 25 से 30 मरीजों की हो रही जांच
रिम्स में मौजूदा मशीन से रोज करीब 25 से 30 मरीजों की एमआरआई जांच हो पाती है. बच्चों की जांच के दौरान एनेस्थीसिया देकर उन्हें नींद में लाना पड़ता है. इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है, जिससे बच्चों समेत कुल जांच की संख्या करीब 20 तक रह जाती है. गंभीर मरीजों को भी अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है.
रोज करीब 40 मरीजों को दी जाती है MRI की सलाह
रिम्स के न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, हड्डी, ऑन्कोलॉजी समेत अन्य विभागों से रोज करीब 40 मरीजों को एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है. एक ही मशीन होने के कारण मरीजों को जांच के लिए औसतन सात से 10 दिन की वेटिंग मिल रही है. जांच के बाद रिपोर्ट मिलने में भी तीन से चार दिन का समय लग रहा है.
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गंभीर और सर्जरी वाले मरीजों को प्राथमिकता
गंभीर स्थिति वाले मरीजों और सर्जरी वाले मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर एक दिन में ही एमआरआई जांच की जाती है. हालांकि, सामान्य मरीजों को जांच के लिए लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है.
छह माह में भवन तैयार होने की उम्मीद- पीआरओ
रिम्स के पीआरओ डॉ शिशिर कुमार ने बताया कि नई एमआरआई मशीन के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. भवन निर्माण की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग को दी गई है. उम्मीद है कि छह माह में भवन तैयार हो जाएगा. इसके बाद मशीन मंगा कर इंस्टॉल की जाएगी और जांच शुरू हो जाएगी.
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