Ranchi University News. रांची विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सत्र 2026-27 से सामान्य डिग्री की जगह स्पेशलाइजेशन के आधार पर डिग्री दी जायेगी. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसके तहत पहले चरण में स्वास्थ्य और इससे जुड़े सेवा क्षेत्रों के 21 डिग्री प्रोग्राम के नाम और उनकी अवधि में बदलाव किया है.
चुनी हुई स्पेशलाइजेशन के आधार पर डिग्री
यूजीसी के सचिव प्रो श्यामा रथ ने इस संबंध में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजकर जानकारी दी है. नये बदलाव के तहत मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी और मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी में विद्यार्थियों को उनकी चुनी हुई स्पेशलाइजेशन के आधार पर डिग्री दी जायेगी. इन कोर्स की अवधि भी पांच वर्ष कर दी गयी है. इसी तरह स्नातक स्तर पर बैचलर ऑफ ऑप्टोमैट्री की डिग्री दी जायेगी. इसकी अवधि पांच वर्ष होगी. स्नातकोत्तर स्तर पर मास्टर ऑफ ऑप्टोमैट्री की डिग्री होगी, जिसकी अवधि दो वर्ष निर्धारित की गयी है.
ये भी पढ़ें: पूर्व मंत्री विमला प्रधान पंचतत्व में विलीन: भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी ध्वज ओढ़ाकर दी गई अंतिम विदाई
कई कोर्स के नाम और अवधि बदले
बीएमएलएस में अब बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस की डिग्री दी जायेगी. इसकी अवधि चार वर्ष होगी. वहीं बीइएमटी में बैचलर ऑफ इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट (पैरा मेडिक्स) की डिग्री होगी और इसकी अवधि चार वर्ष होगी. बीएमपीएसडब्ल्यू में अब बैचलर ऑफ मेडिकल एंड साइकियाट्रिक सोशल वर्क की डिग्री दी जायेगी. इसकी अवधि भी चार वर्ष होगी. यूजीसी ने साढ़े चार वर्ष की अवधि वाले कुछ कोर्स की अवधि बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी है.
स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के 33 नये कोर्स को भी मंजूरी
यूजीसी ने स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 33 नये कोर्स को भी मंजूरी दी है. इन बदलावों का उद्देश्य अलग-अलग विषयों में विद्यार्थियों को विशेषज्ञता के अनुरूप डिग्री उपलब्ध कराना है. यूजीसी के सचिव की ओर से भेजे गये पत्र के अनुसार सत्र 2026-27 से नये प्रावधानों के तहत डिग्री प्रदान करने की प्रक्रिया लागू होगी.
