रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Indian Justice Code: झारखंड स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ल ने देश में लागू नए आपराधिक कानूनों को लेकर व्यापक जनजागरूकता और क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) की आवश्यकता पर जोर दिया है. उन्होंने इस संबंध में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ई-मेल भेजकर आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है. उनका कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) जैसे नए कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव होगा, जब उनसे जुड़े सभी पक्षों को पर्याप्त प्रशिक्षण और जानकारी उपलब्ध कराई जाए.
तकनीकी पहलुओं पर प्रशिक्षण की है जरूरत
राजेश कुमार शुक्ल ने अपने पत्र में कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इसके बावजूद अभी भी कई तकनीकी और प्रक्रियागत पहलुओं को लेकर अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों तथा अन्य संबंधित पक्षों में अधिक प्रशिक्षण और जागरूकता की आवश्यकता बनी हुई है. उन्होंने कहा कि कानून में हुए बदलावों को केवल लागू कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही ढंग से समझना और व्यवहार में उतारना भी उतना ही आवश्यक है. यदि संबंधित पक्षों को पर्याप्त जानकारी नहीं होगी तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
शैक्षणिक संस्थानों से भी की विशेष अपील
बार काउंसिल के उपाध्यक्ष ने विधि महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है. उन्होंने सुझाव दिया कि नए कानूनों पर नियमित रूप से सेमिनार, कार्यशालाएं और संगोष्ठियों का आयोजन किया जाए, ताकि विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को इन कानूनों की बेहतर जानकारी मिल सके. उनका मानना है कि शैक्षणिक संस्थान इस विषय में जागरूकता फैलाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकते हैं और भविष्य के विधि विशेषज्ञों को नए कानूनी ढांचे के अनुरूप तैयार कर सकते हैं.
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नए कानूनों में हुए बदलावों की जानकारी जरूरी
राजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं. कुछ पुराने प्रावधानों को हटाया गया है, कई नई व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं और अनेक प्रक्रियाओं में बदलाव किया गया है. इसलिए यह आवश्यक है कि लोगों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि पुराने कानूनों की तुलना में नए कानूनों में क्या बदला है, क्या हटाया गया है और कौन-सी नई व्यवस्थाएं लागू हुई हैं. उन्होंने कहा कि व्यापक जनजागरूकता और नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से ही नए कानूनों की मंशा के अनुरूप न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाया जा सकता है. इसके लिए सरकार, न्यायिक संस्थानों, बार काउंसिल और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता है.
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