ePaper

राष्ट्रीय बालिका दिवस : छोटी उम्र में ही झारखंड की ये बेटियां अपने हुनर का मनवा रही लोहा

Updated at : 24 Jan 2022 12:55 PM (IST)
विज्ञापन
राष्ट्रीय बालिका दिवस : छोटी उम्र में ही झारखंड की ये बेटियां अपने हुनर का मनवा रही लोहा

हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य बेटियों को अवसर देना है. झारखंड की कई ऐसी बेटियां हैं जिन्होंने अपने हुनर के दम पर अपना लोहा मानवाया. तो आइये जानते हैं राज्य हुनरमंद बालिकाओं के बारे में

विज्ञापन

रांची : उपनषिद काल की विदुषी गार्गी की विद्वता हो या लक्ष्मीबाई का साहस, बेटियों ने हर समय गौरव दिया है. आज हमारी बेटियां आदम्य साहस, बुद्धि, कौशल और कर्मठता से परचम लहरा रही हैं. इन्हीं बेटियों के लिए हर वर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य है बिटिया को बेहतर अवसर देना और आज भी जो असामानता की भावना फैली है, उसे दूर करने के लिए समाज को जागरूक करना.

यहां देखिए झारखंड में कैसे अव्वल हैं बेटियां

रांची. झारखंड की बेटियां केवल टॉपर ही नहीं हैं, बल्कि एडमिशन में भी बाजी मार रही हैं. ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (एआइएसएचइ) के अनुसार झारखंड के 10 विश्वविद्यालय में सर्टिफिकेट कोर्स हो या पीएचडी की पढ़ाई, सबसे अधिक नामांकन बेटियों ने लिया है.

मेहनत के दम पर ओलिंपिक की राह पर चलीं दीप्ति

जोन्हा की दीप्ति अब ओलिंपिक-2024 की तैयारी में जुट गयी हैं. उनका चयन ओलिंपिक की तैयारी के लिए हो चुका है. तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर 40 गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं. वह कहती हैं : कोच रोहित सर ने तीरंदाजी के लिए काफी प्रेरित किया. उनके प्रयास से इस मुकाम तक पहुंच पायी हूं. साथ ही माता-पिता का भी काफी सहयोग किया.

दीप्ति ने एसएस प्लस टू हाइस्कूल सिल्ली से इंटर की पढ़ाई की. अभी सिल्ली कॉलेज सिल्ली से ग्रेजुएशन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. ग्रामीण क्षेत्रों में 10वीं तक पढ़ाई के बाद अधिकतर लड़कियों की शादी कर दी जाती है, जिस कारण वह अपने लक्ष्य की ओर नहीं बढ़ पाती. इसका एक मुख्य कारण आर्थिक भी है. यदि घरवाले बेटियों के सपने को समझेंगे और सरकार आर्थिक मदद देगी, तो हर क्षेत्र में लड़कियां आगे बढ़ सकती हैं.

घर से दूर रहकर स्टेट टॉपर बनीं अनीशा कुमारी

सीबीएसइ 12वीं बोर्ड की काॅमर्स परीक्षा (वर्ष 2021) में अनीशा कुमारी स्टेट टॉपर बनीं. उन्होंने माता-पिता से दूर रहकर पढ़ाई पूरी की. वर्तमान में दिल्ली विवि से पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं. अनीशा कहती हैं : प्राथमिक शिक्षा जमुई (बिहार) में हुई. फिर 12वीं की पढ़ाई के लिए रांची आयी और यहां ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में एडमिशन लेकर हॉस्टल में रहने लगी.

कॉमर्स में 99 प्रतिशत अंक लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. हॉस्टल में रहना आसान नहीं होता है. घर से दूर रहकर कभी मन छोटा भी हो जाता था. फिर भी पढ़ाई पर फोकस की. कोरोना काल में पढ़ाई पर बहुत ज्यादा असर पड़ा. खासकर नेटवर्क के कारण ऑनलाइन क्लास मेें ज्यादा दिक्कत हुई. अनीशा कहती हैं : मेरा मानना है कि लड़कियां पढ़ाई में आज बहुत आगे निकल चुकी हैं.

सातवीं की छात्रा रिषिमा ने लिख दी अनुभव की किताब

बिशप वेस्टकॉट गर्ल्स स्कूल नामकुम की सातवीं कक्षा की छात्रा रिषिमा ने कोरोना काल में स्कूल बंद होने के अपने अनुभव को किताब में लिखा. किताब है : माई एक्सपीरियंस विथ लाइव़ इसमें कोरोना काल में अकेले रहने, ऑफलाइन से ऑनलाइन पढ़ाई पर आना, परिवार के कई लोगों का दूर जाना, जैसे अनुभव शेयर किये हैं.

रिषिमा ने बताया कि कोरोना काल में काफी अकेलापन महसूस हुआ. दोस्तों से मिलना छूट गया़ सिर्फ घर में रहना पड़ता. इसी के बाद अपने अनुभव को लिखना शुरू किया. करीब पांच महीने में 162 पन्नों की किताब लिख दी. वह कहती हैं : मुझे पढ़ने और बैडमिंटन खेलने का बहुत शौक है. कोरोना काल में महसूस किया कि मेरे जैसे लाखों बच्चे घर पर कैसे अकेले हैं, उनके लिए यह किताब लिखी. किताब की पहली कॉपी राज्यपाल रमेश बैस को भेंट की.

सालेहिन परवीन ने बनाया सोशल डिस्टैंसिंग कैंप

झारखंड के 101 विद्यार्थियों का चयन इंस्पायर अवार्ड 2021-22 के लिए हुआ है. सभी अपना इनोवेटिव आइडिया राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में देंगे. इसमें एसएस प्लस टू स्कूल डोरंडा की 10वीं कक्षा की छात्रा सालेहिन परवीन भी हैं. उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग कैप तैयार किया है. इस कैप में खास अल्ट्रासोनिक सेंसर की मदद से बजर सेट किया गया है.

इससे जरूरी छह गज की दूरी का पालन किया जा सकेगा. वही तय दूरी से कम होने पर व्यक्ति को बजर की मदद से सिग्नल मिलेगा. वह कहती हैं : कोरोना काल में लोग सावधानी नहीं बरत रहे हैं. इसलिए मैंने ऐसी चीज बनायी, जो लोगों को हमेशा याद दिलाती रहेगी. परवीन ने कहा कि यह उनका पहला प्रोजेक्ट था लेकिन अब आगे इस तरह का प्रोजेक्ट जरूर बनाऊंगी. इस तरह के कंपीटिशन में जरूर शामिल होंगी.

रांची विवि में प्रत्येक वर्ष बढ़ रही टॉपर बेटियों की संख्या

रांची विवि में बेटियों का कमाल बोलता है़ हर वर्ष टॉपर सूची में छात्राओं की धमक दिखती है़ 35वें दीक्षा समारोह (वर्ष 2022) में भी 80 टॉपर्स में 49 छात्राएं ही हैं. पिछले दो वर्षों में भी टॉपरों की सूची में बेटियां ही आगे रही हैं. पीजी की टॉपर सूची में बेटियों का दबदबा रहता है. 33वें दीक्षा समारोह में 56 टॉपर थे, जिसमें सबसे अधिक 47 बेटियां थीं. वहीं 34वें दीक्षा समारोह में कुल 67 टॉपर थे, जिसमें 50 छात्राएं थीं.

एडमिशन में मिलती है छूट

रांची सहित अन्य विवि में छात्राओं को नामांकन तक में छूट दी जाती है. मार्क्स में पांच फीसदी तक राहत मिली हुई है. साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर में बेटियों से ट्यूशन फीस नहीं लगती है. डीएसडब्ल्यू डॉ राजकुमार शर्मा ने बताया कि हायर एजुकेशन में बेटियों की संख्या अधिक होती है, इसलिए टॉपरों की सूची में भी इनकी संख्या अधिक रहती है.

पिछले वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा में लड़कियों की रही थी धमक

वर्ष 2021 में जैक की इंटर बोर्ड परीक्षा में तीनों संकाय में छात्राओं का रिजल्ट बेहतर रहा था. साइंस, आर्ट्स, कॉमर्स में रांची की बेटियां टॉपर बनी थीं. कॉमर्स में उर्सुलाइन इंटर कॉलेज की तीन छात्राएं जिला के टॉप फाइव में शामिल रहीं. आर्ट्स के टॉप-5 में भी छात्राओं ने जगह बनायी थी़ वहीं सीबीएसइ 12वीं बोर्ड परीक्षा में कॉमर्स संकाय में छात्रा सिटी टॉपर बनी थी. 12वीं साइंस के सिटी टॉप-5 में तीन छात्राओं ने जगह बनायी थी़ वहीं कॉमर्स और आर्ट्स में सात-सात छात्राएं शामिल थीं.

Posted by : Sameer Oraon

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola