बेड़ो. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंडवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि करम पर्व जनजातीय संस्कृति और प्रकृति से गहरे संबंध का प्रतीक है. करम वृक्ष की डाली की स्थापना, पूजा और सामूहिक नृत्य-गीत की परंपरा झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान है.
राज्यपाल रविवार को बेड़ो प्रखंड के कटरमाली जरिया गांव में 10 पड़हा कटरमाली के तत्वावधान में आयोजित करम पूर्व संध्या समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि करम पर्व की लोककथाएं अच्छे कर्म, परिश्रम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देती हैं. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन के दौर में प्रकृति संरक्षण का इसका संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है.
युवाओं से भाषा और परंपराओं के संरक्षण की अपील
राज्यपाल ने युवाओं से अपनी भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, लोककला और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
इससे पूर्व 10 पड़हा अध्यक्ष सुबोध लकड़ा ने राज्यपाल को आदिवासी पगड़ी और सरना गमछा पहनाकर स्वागत किया. कार्यक्रम की शुरुआत गांव के पाहन भुरंगा उरांव ने डाड़ा काटा पूजा करायी. विभिन्न गांवों से पहुंचे 16 खोड़हा दलों ने मांदर की थाप पर करम गीत और नृत्य प्रस्तुत किया.
करम पर्व को प्रकृति से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता 10 पड़हा राजा रोहित उरांव ने की. पूर्व सांसद सह केंद्रीय मजदूर मोर्चा अध्यक्ष सूरज मंडल ने करम पर्व को प्रकृति से जुड़ा पर्व बताया. विश्व आदिवासी सुंदरी पूजा लकड़ा ने समारोह में शामिल होने पर खुशी जतायी. 10 पड़हा अध्यक्ष सुबोध लकड़ा ने जल, जंगल, जमीन और प्रकृति से जुड़ाव को करम पर्व की विशेषता बताया.
कार्यक्रम का संचालन डॉ बज्रेश शर्मा ने किया. मौके पर एसडीएम कुमार रजक, बीडीओ राहुल उरांव, सीओ राजकुंवर सिंह, डीएसपी दीपक कुमार समेत पुलिस पदाधिकारी और जवान मौजूद थे.
