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Weather Alert: झारखंड के किसानों के लिए बुरी खबर! दो दिन तक ओलावृष्टि का अलर्ट, बरतनी होंगी ये सावधानियां

Jharkhand Weather Alert|मौसम केंद्र रांची ने कहा है कि 30 अप्रैल और 1 मई को झारखंड के उत्तरी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है. इससे सरसों, फल एवं सब्जियों, दलहनी फसल को नुकसान हो सकता है.

Jharkhand Weather Alert: झारखंड के किसानों के लिए एक बुरी खबर है. राज्य में दो दिन तक ओलावृष्टि होने की चेतावनी मौसम विभाग ने दी है. मौसम विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मौसम केंद्र रांची ने कहा है कि 30 अप्रैल और 1 मई को झारखंड के उत्तरी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि हो सकती है. इससे किसानों की फसल को नुकसान हो सकता है. कहा गया है कि सरसों, फल एवं सब्जियों, दलहनी फसल को नुकसान हो सकता है. मवेशियों को भी नुकसान हो सकता है. इसलिए किसानों से सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है.

सरसों में हो सकती है अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसी बीमारी

मौसम केंद्र रांची के मुताबिक, खेतों में जलभराव के कारण सरसों की फसलें झुक सकती हैं. उसकी जड़ की वृद्धि बाधित हो जायेगी. तना सड़ जायेगा और अल्टरनेरिया ब्लाइट जैसी बीमारियां हो सकती हैं. ओलावृष्टि की वजह से सरसों की फली गिर जायेगी. इसलिए किसानों को अपनी फसल की समय पर कटाई कर लेनी चाहिए. साथ ही उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखना चाहिए. कृषि क्षेत्र पर ओलावृष्टि का प्रभाव आधारित पूर्वानुमान में कहा गया है कि अगर फली पीली भूरी हो गयी हो, तो उसकी कटाई कर लें.

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फल एवं सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को सलाह

फल एवं सब्जियों की खेती करने वाले किसानों से कहा गया है कि ओलावृष्टि की वजह से आम के मंजर झड़ सकते हैं, फलों पर दाग लग सकते हैं. ओले गिरने और भारी वर्षा के कारण सब्जियां सड़ सकती हैं. टमाटर के फल और फूल झड़ सकते हैं. मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खड़ी फसल में रोग के प्रसार को कम करने के लिए गिरे हुए फलों को हटा दें. बाग में वनस्पतियों की वृद्धि हो, इसके लिए खाद और अन्य चीजों का छिड़काव करें.

दलहनी फसलों की ऐसे करें सुरक्षा

मौसम विभाग ने दलहनी फसलों पर भी किसानों को सलाह दी है. कहा है कि वर्षा और ओलावृष्टि की वजह से फली का सही से विकास नहीं होता है. फली विकास अवस्था के दौरान फसलों की उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. दलहन की फसल में फफूंद का असर देखा जा सकता है. इसलिए खेत में जल निकासी की व्यवस्था करें. फफूंद लगने पर फसल की निगरानी करें. तैयार फसल को काटकर सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें.

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ऐसे करें मवेशियों की देख-रेख

पशुपालन करने वाले किसानों को भी सतर्क किया गया है. उन्हें सलाह दी गयी है कि अगर मौसम खराब होता है, तो अपने मवेशियों को खुले में बिल्कुल न छोड़ें. अगर मवेशियों को चराने के लिए बाहर ले जाते हैं, तो मौसम की स्थिति देखकर ही बाहर निकलें. अगर आप अपने मवेशी को पक्का मकान में नहीं रखते हैं, तो उसके लिए बने घर को अच्छी तरह से ढक दें.

Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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