झारखंड राज्य सूचना आयोग में CIC का पद खाली, लंबित मामले 22 हजार से अधिक, हाईकोर्ट में भी चल रहा है केस

Updated at : 20 Feb 2023 9:50 AM (IST)
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झारखंड राज्य सूचना आयोग में CIC का पद खाली, लंबित मामले 22 हजार से अधिक, हाईकोर्ट में भी चल रहा है केस

आरटीआइ एक्टिविस्ट और अधिवक्ता सुनील कुमार महतो का कहना है कि द्वितीय अपील के उनके द्वारा दायर दर्जनों मामले राज्य सूचना आयोग में लंबित हैं. सूचना अधिकार अधिनियम-2005 पूरी तरह फेल हो चुका है

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राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त (सीआइसी) नहीं हैं और न ही कोई सूचना आयुक्त ही कार्यरत हैं. सीआइसी के एक और पांच सूचना आयुक्तों के पद खाली रहने से मई 2020 से आयोग में दर्ज अपील व शिकायतों से संबंधित मामलों की सुनवाई ठप है. ऐसे में आम लोगों का सबसे बड़ा हथियार कहा जानेवाला राइट टू इंफार्मेशन एक्ट-2005 झारखंड में एक तरह से विफल हो चुका है. लोगों को न्याय और उनका हक दिलाने के लिए बनाया गया झारखंड राज्य सूचना आयोग स्वयं दम तोड़ता नजर आ रहा है.

सामान्य सूचनाएं भी नहीं मिल रही :

आरटीआइ एक्टिविस्ट और अधिवक्ता सुनील कुमार महतो का कहना है कि द्वितीय अपील के उनके द्वारा दायर दर्जनों मामले राज्य सूचना आयोग में लंबित हैं. सूचना अधिकार अधिनियम-2005 पूरी तरह फेल हो चुका है. सामान्य सूचनाएं भी लोगों को जन सूचना पदाधिकारियों से नहीं मिल पा रही है.

लगातार अपील व शिकायत दर्ज करा रहे हैं आवेदक

आठ मई 2020 को प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से ही सारा काम-काज ठप है. हालांकि आवेदकों द्वारा अपील तथा शिकायतें लगातार दर्ज करायी जा रही हैं. इससे लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. बताया जाता है कि लंबित मामलों की संख्या लगभग 22,000 से अधिक हो गयी है.

केसों की सुनवाई के लिए तारीख देकर खानापूर्ति की जाती है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. जन सूचना पदाधिकारी व प्रथम अपीलीय पदाधिकारी से सूचना नहीं मिलने अथवा अधूरी सूचना मिलने पर लोग न्याय के लिए राज्य सूचना आयोग के पास पहुंचते हैं. आयुक्तों का पद रिक्त रहने से आयोग पहले से ही बेबस और लाचार हो गया है. वह आवेदकों के मामले में न्याय नहीं कर पा रहा है.

सरकार दो बार मांग चुकी है आवेदन

सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कब हो पायेगी, यह कहना काफी मुश्किल है. सूचना आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती है, लेकिन नियमावली के अनुसार नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका अहम होती है. उनके बिना नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से अब तक आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए दो बार प्रयास किया गया है. पहली बार शुरू की गयी नियुक्ति प्रक्रिया बीच में ही रद्द कर दी गयी.

झारखंड हाइकोर्ट में चल रहा है मामला

हाइकोर्ट में भी मामला चल रहा है. प्रार्थी राजकुमार की ओर से सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर पीआइएल दायर की गयी है, जो फिलहाल लंबित है. वहीं एक अन्य मामले (सोनू कुमार रंजन व अन्य की ओर से दायर रिट याचिका) में जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने 16 जनवरी को सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा था कि मुख्य सूचना आयुक्त हैं या नहीं. सूचना आयोग अभी फंक्शनल नहीं है, तो सरकार बताये कि आयुक्तों की कब तक नियुक्ति होगी?

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