मजबूती से रखी जायेगी सरना आदिवासी धर्म कोड की मांग

Updated at : 06 Dec 2020 9:19 AM (IST)
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मजबूती से रखी जायेगी सरना आदिवासी धर्म कोड की मांग

सरना धर्म कोड की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आदिवासी मामलों के मंत्री, विभिन्न आयोग व रजिस्ट्रार जेनरल को स्मार पत्र भेजा जायेगा

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रांची : राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान से जुड़े विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों की सभा देशावली सरना स्थल, हरमू में हुई. इसमें सरना आदिवासी धर्म कोड की मांग को देश और केेंद्र सरकार के समक्ष रखने की कार्ययोजना व रणनीति तय की गयी.

इस बैठक की अध्यक्षता धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने की. सभा में इस बात पर सहमति बनी कि सरना धर्म कोड की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आदिवासी मामलों के मंत्री, विभिन्न आयोग व रजिस्ट्रार जेनरल को स्मार पत्र भेजा जायेगा. साथ ही एक प्रतिनिधिमंडल समयानुसार उनसे मिलेगा.

राज्य के सभी सांसदों से कहा जायेगा कि वे सरना आदिवासी धर्म कोड के मसले पर केंद्र सरकार के समक्ष और संसद में सकारात्मक दृष्टि रखते हुए अपना पक्ष रखें. पश्चिम बंगाल व ओड़िशा में सरना धर्म कोड को लेकर पिछले दिनों हुए कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होंगे, जिनमें हजारों लोगों ने पद यात्रा की व मानव शृंखला में शामिल हुए थे.

कुल 251 सदस्यों वाला राष्ट्रीय स्तर का कार्यकारी दल बनाया गया, जिसमें झारखंड सहित अन्य राज्यों से सदस्यों मनोननीत किया गया. इसका समय-समय पर विस्तार भी किया जायेगा. सरना धर्मावलंबियों का मामला, उन्हें तय करने दें : सदस्यों ने कहा कि जब विधानसभा से सरना आदिवासी धर्म कोड पारित हुआ, तो अन्य धार्मिक समूह व संगठन सरना धर्म पर कई तरह की फिजूल बातें कर सरना धर्म कोड के रास्ते में रोड़ा अटकाना चाहते हैं.

यह मामला सरना धर्मावलंबियों का है और उन्हें खुद अपना रास्ता तय करने देना चाहिए. बैठक में डॉ करमा उरांव, नारायण उरांव, शिवा कच्छप, सोमा मुंडा, बिरसा कंडीर, बगराय ओड़या, कमले उरांव, रवि तिग्गा, बलकु उरांव, संजय कुजूर, चंपा कुजूर, प्रदीप तिर्की, बिहारी लकड़ा, प्रो प्रेमनाथ मुंडा, रमेश उरांव, सुशीला उरांव, अनूप किंडो, ब्रजकिशोर बेदिया, विजय धान व अनिल भगत ने भी विचार व्यक्त किये.

विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने की सभा, कहा

केंद्रीय सरना समिति अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा छह दिसंबर के रेल-रोड चक्का जाम की पूर्व संध्या पर अलबर्ट एक्का चौक पर मशाल जुलूस निकाला गया. केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी लंबे समय से अपनी पहचान, हक और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वे हर हाल में 2021 की जनगणना में सरना कोड चाहते हैं.

केंद्र सरकार को इसे 30 नवंबर तक लागू करने या आदिवासी समाज के साथ वार्ता करने का अल्टीमेटम दिया गया था, पर केंद्र सरकार इस पर मौन रही. इसलिए आदिवासी समाज ने छह दिसंबर को रेल-रोड चक्का जाम करने का निर्णय लिया है. अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सत्यनारायण लकड़ा ने कहा कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत रेल-रोड चक्का जाम किया जायेगा और इस संबंध में डीआरएम हटिया डिवीजन को लिखित सूचना दे दी गयी है.

यह देशव्यापी रेल-रोड चक्का जाम शांतिपूर्ण होगा. इस अवसर पर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के उपाध्यक्ष बाना मुंडा, केंद्रीय सरना समिति के उपाध्यक्ष प्रशांत टोप्पो, केंद्रीय सरना समिति के महासचिव संजय तिर्की, विनय उंराव, किशन लोहरा, ज्योत्सना भगत, सूरज तिग्गा, सुखवरो उरांव, अमर तिर्की, सीमा बांडो एवं अन्य उपस्थित थे.

posted by : sameer oraon

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