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झारखंड में एक साल में 72 नवजातों का परिवार ने किया परित्याग, 41 की हो गयी मौत

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
झारखंड में एक साल में 72 नवजातों का परिवार ने किया परित्याग, 41 की हो गयी मौत.
झारखंड में एक साल में 72 नवजातों का परिवार ने किया परित्याग, 41 की हो गयी मौत.
File Photo

रांची : झारखंड में एक साल में 72 नवजात का परिवार ने परित्याग कर दिया, जिसमें 41 की मौत हो गयी. परित्यक्त नवजात में 25 बालक और 35 बालिकाएं थीं. इनमें से 12 लड़कों और 19 लड़कियों की जान तो बच गयी, लेकिन 13 बालकों एवं 16 बालिकाओं की मौत हो गयी. 12 ऐसे शिशु भी मृत पाये गये या अस्पताल में जिनकी मौत हो गयी, जिनके लिंग का पता नहीं चल पाया.

झारखंड समेत देश के 6 राज्यों में शिशु हत्या व नवजात के असुरक्षित परित्याग को रोकने की दिशा में काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था पा-लो-ना ने रांची में ये आंकड़े जारी किये. इसके मुताबिक, वर्ष 2020 में सबसे ज्यादा 10 बच्चों का रांची में परित्याग किया गया, जिसमें 4 की मौत हो गयी और एक के बारे में अंतिम रिपोर्ट नहीं मिल सकी.

नवजात की मौत के मामले में गढ़वा जिला अव्वल रहा. यहां 9 शिशुओं का परित्याग कर दिया गया, जिसमें सबसे ज्यादा 7 नवजात की मौत हो गयी. इनमें 3 बेटियां और 2 बेटे थे, जबकि 2 मृत शिशु की लिंग के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी.

नवजात शिशुओं की मौत के मामले में बोकारो जिला दूसरे नंबर पर रहा. यहां 5 मृत शिशु मिले. इनमें दो बेटियां और दो बेटे थे. एक की लिंग का पता नहीं चल पाया. एक साल के दौरान बोकारो जिला में कुल 7 बच्चों को उनके परिवार के सदस्यों ने कहीं न कहीं लावारिस छोड़ दिया, जिनमें से 5 की मौत हो गयी.

पलामू में 7, देवघर में 5, चाईबासा, गिरिडीह एवं दुमका में 4-4, गुमला, जमशेदपुर, कोडरमा एवं हजारीबाग में 3-3, धनबाद, गोड्डा, चतरा एवं लोहरदगा में 2-2 और खूंटी, रामगढ़ एवं जामताड़ा में 1-1 नवजात का वर्ष 2020 में परित्याग किया गया.

पलामू जिला में कुल 4 नवजात मृत पाये गये, जिनमें एक बच्ची थी. 3 के लिंग की जानकारी नहीं मिल पायी. देवघर में 5 परित्यक्त शिशु मिले, जिसमें 3 मृत मिले. मृत शिशुओं में एक बालिका और 2 बालक थे. पश्चिम सिंहभूम में 4 नवजात अलग-अलग जगहों पर मिले, जिनमें से 1 की मौत हो गयी. एक बेटी और 2 बेटों को बचा लिया गया.

गिरिडीह एवं दुमका में भी 4-4 शिशु लावारिस हालत में मिले. गिरिडीह में 3 लड़के और 1 लड़की मिली थी, जिसमें 1 लड़की और 1 लड़के की मौत हो गयी. जबकि दुमका में 2 बेटियां, एक बेटा और एक ऐसा बच्चा मिला, जिसके लिंग का पता नहीं चल पाया है. इनमें दो बेटियां जीवित मिलीं, जबकि बाकी दो बच्चों की मौत हो गयी.

गुमला, जमशेदपुर, कोडरमा एवं हजारीबाग में 3-3 बच्चों के फेंके जाने का रिकॉर्ड मिला है. गुमला में 3 बेटियां थीं, सभी की मौत हो गयी. जमशेदपुर 2 बेटियों और एक लड़का को फेंका गया था. लड़के को बचा लिया गया. एक बेटी की जान बच गयी, जबकि दूसरी की मौत हो गयी.

कोडरमा जिला में 2 बेटियों और एक बेटे को फेंका गया था, जिसमें 1 बेटी की मौत हो गयी. हजारीबाग जिला में 3 बच्चे लावारिस हालत में मिले, तीनों की मौत हो गयी. इनमें एक बेटा, एक बेटी और एक अज्ञात शिशु था. गुमला, गोड्डा और हजारीबाग ऐसे जिले हैं, जहां परित्यक्त मिले सभी नवजात की मौत हो गयी.

धनबाद में दो बच्चे परित्यक्त मिले थे, जिनमें एक की मौत हो गयी. एक बेटी को बचा लिया गया. गोड्डा में 2 शिशु मिले, दोनों की मौत हो गयी. इनमें एक बेटी और एक बेटा था. चतरा में 2 बच्चियों की मौत हो गयी, जबकि लोहरदगा में मिले दोनों बच्चों को बचा लिया गया.

खूंटी, रामगढ़ एवं जामताड़ा में 1-1 नवजात मिले. सभी सुरक्षित थे. खूंटी और रामगढ़ में बेटियां जीवित मिलीं, जबकि जामताड़ा में मिला नवजात लड़का था.

Posted By : Mithilesh Jha

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