Jharkhand HC: झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, वेतन सुरक्षा से नहीं मिलेगा वरीयता का अधिकार

Jharkhand HC: झारखंड हाईकोर्ट ने वरीयता संबंधी दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वरीयता की गिनती सेवा में वास्तविक प्रवेश की तिथि से होगी. वेतन सुरक्षा से वरीयता का अधिकार नहीं मिलेगा. मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने की.

Jharkhand HC | रांची, राणा प्रताप: झारखंड हाइकोर्ट ने वरीयता के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी को दी गयी वेतन सुरक्षा या पूर्व सेवा अवधि की गणना सिर्फ पेंशन संबंधी लाभों के लिए होती है. यह किसी अलग सेवा/कैडर में वरीयता का दावा करने का अधिकार नहीं देती. विशेषकर जब कर्मचारी ने स्वेच्छा से सेवा बदली हो. यह सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ में हुई.

कोर्ट ने खारिज की अपील

बता दें कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वरीयता की गिनती सेवा में वास्तविक प्रवेश की तिथि से ही होगी. यह किसी रिक्ति की तिथि से या पिछली सेवा से जोड़ कर नहीं दी जा सकती, जब तक सेवा नियमों में ऐसा स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं हो. कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील याचिका को खारिज कर दिया.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

खंडपीठ ने क्या कहा

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ वेतन संरक्षण या चयन/विशेष ग्रेड देने के लिए पिछली सेवा की गणना से यह नहीं माना जा सकता कि कर्मचारी पुरानी सेवा का ही हिस्सा बना रहा. वेतन सुरक्षा या पेंशन लाभ के लिए सेवा अवधि गिनना वरीयता से संबंधित नहीं है. क्योंकि इससे अन्य कर्मचारियों की सेवा में हस्तक्षेप नहीं होता, जबकि वरीयता में परिवर्तन अन्य कर्मियों पर प्रभाव डालता है.

प्रार्थियों की दलील पर की टिप्पणी

यह टिप्पणी खंडपीठ ने उन प्रार्थियों की दलील पर दी, जिन्होंने कहा कि यदि उन्हें वेतन सुरक्षा मिली है, तो उनकी पूर्व सेवा अवधि को वरीयता निर्धारण में भी गिना जाना चाहिए. खंडपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए प्रार्थियों की याचिका को खारिज कर दिया. इससे उन्हें बड़ा झटका लगा है.

इसे भी पढ़ें Shravani Mela 2025: देवघर प्रशासन का बड़ा फैसला, श्रावणी मेले में बढ़ेगी वीआईपी, वीवीआईपी की परेशानी

क्या है मामला

यह मामला बिनोद कुमार महतो व अन्य बनाम राज्य झारखंड व अन्य से जुड़ा था. इसमें प्रार्थियों ने 2010 में प्रशासनिक सेवा में योगदान दिया था. साल 2012 में पुलिस सेवा में स्वेच्छा से स्थानांतरित हुए थे. उन्होंने अपनी वरीयता 2010 से गिनने की मांग की थी, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया.

इसे भी पढ़ें

Rath Yatra 2025: घुरती रथयात्रा आज, मुख्य मंदिर लौटेंगे महाप्रभु जगन्नाथ, उमड़ेगा भक्तों का सैलाब

Weather Alert: आज 6 जुलाई को झारखंड के 13 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की आशंका

Muharram: मुहर्रम पर रांची की ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव, इन रास्तों पर वाहनों की आवाजाही पर रोक

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rupali das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >