Jharkhand Foundation Day 2020 : स्कूल व शिक्षक हुए दोगुने, पर गुणवत्ता सुधारना चुनौती

Updated at : 16 Nov 2020 3:17 AM (IST)
विज्ञापन
Jharkhand Foundation Day 2020 : स्कूल व शिक्षक हुए दोगुने, पर गुणवत्ता सुधारना चुनौती

झारखंड स्कूल व शिक्षक हुए दोगुने लेकिन पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पाया है.

विज्ञापन

रांची : झारखंड अलग राज्य की स्थापना हुए आज 20 साल हो गये. इस दौरान यहां स्कूलों और शिक्षकों की संख्या दोगुनी हो गयी. इसके बावजूद यहां पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पाया है. भारत सरकार द्वारा जारी पिछले नेशनल अचीवमेंट सर्वें के अनुसार, राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों की जैसे-जैसे कक्षा बढ़ती है,

वे पढ़ाई में भी कमजोर होते चले जाते हैं. साथ ही विद्यार्थियों का ड्राॅपआउट रेट भी बढ़ने लगता है. यानी राज्य में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जानी चाहिए. वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य के कुल बजट का सबसे अधिक 15.64 फीसदी हिस्सा शिक्षा के लिए आवंटित किया गया है.

राज्य गठन के बाद से ही शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए लगातार बजट में बढ़ोतरी की जाती रही है. इसका असर यह हुआ कि राज्य में पिछले 20 वर्ष में स्कूलों की संख्या 20 हजार (सभी कोटि) से बढ़कर 35447 हो गयी. वहीं, दस हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को मध्य विद्यालयों में अपग्रेड किया गया. हाइस्कूल भी 785 से बढ़कर लगभग 1830 हो गये. वर्ष 2000 में झारखंड मेें मात्र 59 प्लस टू विद्यालय थे, आज राज्य में कुल 864 प्लस टू विद्यालय हैं.

विद्यार्थियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई. वर्ष 2000 में स्कूलों में पढ़नेवाले विद्यार्थियों की संख्या 27 लाख थी, जो आज बढ़ कर 42 लाख हो गयी. पिछले 20 वर्ष में राज्य में लगभग एक लाख शिक्षकों (पारा शिक्षक समेत) की नियुक्ति हुई.

राज्य गठन के समय झारखंड में प्राथमिक से लेकर प्लस टू उच्च विद्यालय तक में लगभग 45 हजार हजार शिक्षक कार्यरत थे. आज झारखंड में शिक्षकों की संख्या लगभग 1.18 लाख है. स्कूल व शिक्षक हुए दोगुने, पर इन सबके बावजूद कक्षाएं बढ़ने के साथ विषयों पर छात्रों की पकड़ कमजोर होती जाती है.

गणित और विज्ञान में कमजोर होता है बच्चों का प्रदर्शन : नेशनल अचीवमेंट सर्वें के अनुसार, कक्षा बढ़ने के साथ ही गणित और विज्ञान में बच्चों का प्रदर्शन कमजोर होता चला जाता है. कक्षा तीन में गणित की परीक्षा में 30 फीसदी से कम अंक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों की संख्या मात्र 8.39 फीसदी थी.

कक्षा पांच यह संख्या बढ़ कर 15 फीसदी और कक्षा आठ में 21.66 फीसदी हो गयी. इसी प्रकार कक्षा बढ़ने के साथ 75 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों की संख्या भी कम होती चली जाती है.

विद्यार्थियों का ड्रापआउट रेट भी बढ़ने लगता :

नेशनल अचीवमेंट सर्वें की रिपोर्ट कहती है कि झारखंड में कक्षा बढ़ने के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूल छोड़ने लगते हैं. झारखंड में कक्षा आठ से 10वीं तक पहुंचते-पहुंचते लगभग एक लाख बच्चे कम हो जाते हैं. झारखंड में कक्षा आठ की बोर्ड परीक्षा में प्रति वर्ष लगभग पांच लाख बच्चे शामिल होते हैं, पर मैट्रिक में लगभग चार लाख बच्चे शामिल होते हैं.

उच्च शिक्षा में जारी है विद्यार्थियों का पलायन, 20 वर्ष में छह हजार करोड़ खर्च :

झारखंड में 20 वर्ष में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगभग छह हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो गये. यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के साथ-साथ कौशल विकास को शामिल किया गया.

लेकिन, राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति दुरुस्त नहीं हो सकी है. 20 वर्ष में राज्य में सरकारी व निजी को मिला कर लगभग 85 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान हैं. जिसमें सात सरकारी विवि, 15 प्राइवेट विवि, एक डिम्ड विवि सहित आइआइएम, आइआइटी, लॉ यूनिवर्सिटी, 16 इंजीनियरिंग कॉलेज, 41 पॉलिटेक्निक कॉलेज, एनआइटी, निफ्ट, एक्सएलआरआइ, एक्सआइएसएस जैसे भी प्रतिष्ठित संस्थान हैं.

इसके बावजूद हजारों की संख्या में विद्यार्थी राज्य से बाहर के संस्थानों में पढ़ने जा रहे हैं. लाखों रुपये झारखंड से बाहर जा रहे हैं. इसका मुख्य कारण है, यहां के संस्थानों में गुणवत्ता और प्लेसमेंट की कमी.

विवि में जरूरत के मुताबिक नहीं हो रही शिक्षकों की नियुक्तियां :

राज्य के विवि में प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके अनुपात में शिक्षकों की संख्या घटती जा रही है. यूजीसी नियमानुसार 40 छात्र पर एक शिक्षक होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में 73 छात्र पर एक शिक्षक हैं.

वर्ष 2008 में 751 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हुई, इसके बाद रेगुलर नियुक्ति नहीं हो पायी. वर्तमान में 22 से अधिक विवि शिक्षकों के पद रिक्त हैं. झारखंड लोक सेवा अायोग के गठन के 19 वर्ष हो गये, लेकिन अब तक मात्र छह सिविल सेवा परीक्षा की ही आयोजन हो सका. वर्तमान में भी 22 सौ नियुक्तियां फंसी हुई हैं. नियोजन नीति स्पष्ट नहीं रहने के कारण झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में भी नियुक्तियां फंसी हुई हैं.

सही मॉनिटरिंग नहीं होने से स्थिति लचर

सरकार उच्च शिक्षा पर खर्च तो कर रही है, लेकिन सही मॉनिटरिंग नहीं होने से स्थिति लचर हो गयी है. कॉलेजों के अाधारभूत संरचना पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन राज्य के दर्जन भर से अधिक कॉलेज को नैक से सी ग्रेड मिला है. राज्य के किसी विवि को नैक से ए ग्रेड नहीं मिला है. ए ग्रेड नहीं मिलने से नियमानुसार यहां दूरस्थ शिक्षा का केंद्र नहीं खुल पा रहा है.

जो बेहतर हुआ

झारखंड अलग राज्य गठन के बाद से लगभग एक लाख शिक्षकों की हुई नियुक्ति

20 वर्ष में सरकारी व निजी मिलाकर उच्च शिक्षा में 85 से ज्यादा शिक्षण संस्थान खुले

स्कूलों में पढ़नेवाले विद्यार्थियों की संख्या 27 लाख से बढ़ कर 42 लाख हो गयी

जिसमें सुधार जरूरी

आठवीं से मैट्रिक तक पहुंचते-पहुंचते स्कूलों में कम हो जाते हैं एक लाख बच्चे

राज्य में उच्च शिक्षा में 73 विद्यार्थी पर एक शिक्षक, जबकि 40 पर एक होना चाहिए

बच्चों की जैसे-जैसे कक्षा बढ़ती है, वे पढ़ाई में कमजोर होते चले जाते हैं : सर्वे रिपोर्ट

ये हुआ 20 साल में

1. स्कूलों की संख्या 20 हजार से बढ़कर 35447 हो गयी

2. दस हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया गया

3. हाइस्कूल 785 से बढ़कर लगभग 1830 हो गये

4. मात्र 59 प्लस टू विद्यालय थे, आज राज्य में 864 प्लस टू विद्यालय हैं

5. वर्ष 2000 में लगभग 45 हजार शिक्षक थे, आज इनकी संख्या लगभग 1.18 लाख है

posted by : sameer oraon

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola