ED से बचने के लिए IAS छवि रंजन ने पहले ही शुरू की थी तैयारियां, संभावित सवालों के तैयार मिले जवाब
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Apr 2023 3:00 AM
IAS छवि रंजन ने अपने बचाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं. इसी क्रम में उन्होंने जमीन प्रकरण में इडी द्वारा पूछे जानेवाले संभावित जवाब तैयार किया. गुरुवार को हुई छापामारी के दौरान छवि रंजन के मोबाइल में इसका ब्योरा मिला.
रांची : सेना की जमीन खरीद-बिक्री मामले में इडी की पहली छापामारी के बाद तत्कालीन उपायुक्त छवि रंजन डरे-सहमे थे. इसलिए उन्होंने अपने बचाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं. इसी क्रम में उन्होंने जमीन प्रकरण में इडी द्वारा पूछे जानेवाले संभावित जवाब तैयार किया. गुरुवार को हुई छापामारी के दौरान छवि रंजन के मोबाइल में इसका ब्योरा मिला.
Q. वर्तमान केस के बारे में आपकी क्या जानकारी है?
इस मामले से जुड़े दस्तावेज देखने के बाद ही सही-सही जानकारी दी जा सकती है.
Q. इस केस में डीसी की क्या भूमिका है?
इस मामले में उपायुक्त की भूमिका धारा-82/83 के तहत संबंधित सेल डीड को रद्द करने की कार्रवाई तक सीमित है.
Q. तथ्यों व बयान से इस बात की जानकारी मिलती है कि इस पूरे प्रकरण में आपने अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर भारी दबाव डाला था?
उपायुक्त के पास विधि-व्यवस्था सहित अन्य प्रकार के बहुत सारे काम रहते हैं. वर्तमान मामला इस तरह के कार्यों के दौरान बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होता है. यह एक सामान्य प्रक्रिया के तहत पूरी होती है. जहां तक मेरे द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर दबाव देने का मामला है, वह पूरी तरह निराधार है. इस तरह के डीड रद्द करने का अधिकार सब रजिस्ट्रार के पास भी होता है. इसके बावजूद इन लोगों द्वारा खुद को बचाने और उपायुक्त पर पूरी जिम्मेदारी डालने के लिए इस तरह के बयान दिये हैं.
Q इस मामले में किस तरह की प्रक्रिया अपनायी गयी?
इस तरह के मामलों में अपनायी जानेवाली प्रक्रिया का विस्तृत उल्लेख नियम-कानून में है. मेरी जानकारी में इस मामले में पूरी ईमानदारी के साथ सभी प्रक्रिया का पालन किया गया है.
Q. डीसी के रूप में आपके कार्यकाल के दौरान ऐसे कितने मामले सामने आये?
मैंने रांची के उपायुक्त का पद वर्ष 2022 में छोड़ दिया. अब मुझे यह याद नहीं है कि उस वक्त मेरे सामने कितने मामले आये और मैंने क्या फैसला किया. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मैंने डीसी के चुनौतीपूर्ण कार्यों को पूरी ईमानदारी से निभाया.
Q. कोलकाता में प्रदीप बागची के मामले में जांच की मांग को लेकर आपके सामने यह मामला कब आया?
पहले आप मुझे वह आवेदन दिखायें. इसके बाद ही मैं अपने दिमाग पर जोर देकर, याद करने के बाद कुछ कह सकता हूं. मुझे जहां तक याद है कि जब अधिकारी ने कोलकाता में जांच करने का प्रस्ताव पेश किया था, उस वक्त उसने जरूरी खर्चे के लिए 50 हजार रुपये अग्रिम की मांग की थी. करीब तीन महीने बाद मेरे सामने इस मांग को पेश किये जाने के बाद मैंने अग्रिम की राशि को 50 हजार से घटा कर 15 हजार कर दिया. इससे यह साफ है कि मैंने जल्दबाजी में कोई काम नहीं की.
Q. क्या किसी अधिकारी या राजनेता ने दबाव दिया?
नहीं, इस मामले में मुझे किसी अधिकारी ने कुछ नहीं कहा, न ही किसी राजनीतिज्ञ ने दबाव डाला.
छवि रंजन को कर्नाटक चुनाव में आब्जर्वर बनाया गया था. उनके घर हुई इडी की छापेमारी की सूचना मिलने के बाद चुनाव आयोग ने उन्हें चुनाव कार्य से मुक्त कर दिया है.
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