Jharkhand News: प्रोन्नति पर लगी रोक हटाने को सीएम हेमंत सोरेन की मंजूरी, एक साल बाद हुआ प्रमोशन का रास्ता साफ

Updated at : 27 Nov 2021 7:21 AM (IST)
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Jharkhand News: प्रोन्नति पर लगी रोक हटाने को सीएम हेमंत सोरेन की मंजूरी, एक साल बाद हुआ प्रमोशन का रास्ता साफ

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में सभी विभागों की प्रोन्नति पर लगी रोक हटाने पर सहमति दे दी है. एक साल बाद अब सभी विभागों के कर्प्रमियों के मोशन का रास्ता साफ हुआ है. रोक के कारण कई अधिकारी व कर्मी बिना प्रोन्नति के सेवानिवृत्त हो गये.

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रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्मिक विभाग के मंत्री के तौर पर राज्य में सभी विभागों की प्रोन्नति पर लगी रोक हटाने पर सहमति दे दी है. नियमानुसार अब मुख्यमंत्री के रूप में भी उनके द्वारा फाइल पर स्वीकृति देने की प्रक्रिया चल रही है. मुख्य सचिव के माध्यम से फाइल मुख्यमंत्री के पास भेजी जा रही है.

प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग एक वर्ष से रोकी गयी प्रोन्नति का रास्ता साफ हो जायेगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य में 24 दिसंबर 2020 से सभी तरह की सेवाओं में प्रोन्नति पर रोक लगा दी गयी थी. जिससे राज्य सरकार के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति बिना प्रोन्नति के ही हो गयी है.

प्रोन्नति के आधार पर भरे जाने हैं 57,182 पद : कार्मिक विभाग के मुताबिक राज्य सरकार के 34 विभागों में से 31 में स्वीकृत पदों की कुल संख्या 3,01,198 है. जिनमें से 57,182 पद प्रोन्नति के आधार पर भरे जाने हैं, जबकि 2,44,016 पद सीधी नियुक्ति से भरे जाने हैं.

रिक्तियों को भरने के लिए झारखंड सरकार की सभी नौकरियों में एसटी-एससी के प्रतिनिधित्व व प्रशासकीय क्षमता का मूल्यांकन कराया गया है. सेवाओं और पदों के अधीन प्रोन्नति, प्रशासनिक दक्षता और क्रीमी लेयर में एसटी-एसटी के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता पर रिपोर्ट तैयार की गयी है.

  • रोक के कारण कई अधिकारी व कर्मी बिना प्रोन्नति के सेवानिवृत्त हो गये

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 24 दिसंबर 2020 से प्रोन्नति पर लग गयी थी रोक

अभी भी कम है एसटी-एससी का प्रतिनिधित्व: रिपोर्ट में राज्य सरकार की सेवाओं में एसटी-एससी का प्रतिनिधित्व अपेक्षित स्तर से काफी नीचे बताया गया है. प्रोन्नति में आरक्षण की वर्तमान नीति को जारी रखने की अनुशंसा की गयी है.

कहा गया है कि वर्तमान प्रावधान में किसी भी प्रकार की ढील देना या किसी भी खंड को हटाना न्यायोचित या वांछनीय नहीं होगा और बड़े पैमाने पर सामुदायिक हितों के विरुद्ध होगा. बताया गया है कि सरकार में हर स्तर पर प्रोन्नतिवाले पदों पर एसटी-एससी के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता है.

राज्यभर में स्वीकृत प्रोन्नतिवाले पदों के विरुद्ध प्रोन्नति के आधार पर पद धारण करनेवाले कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या से संबंधित एसटी-एससी कर्मचारियों का प्रतिशत क्रमश: 4.45 तथा 10.04 प्रतिशत है. यह राज्य में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (क्रमश: 12.08 प्रतिशत (एससी) और 26.20 प्रतिशत (एसटी) के जनसांख्यिकीय अनुपात से बहुत कम है.

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Posted by: Pritish Sahay

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