Budget 2026, रांची: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किये गये केंद्रीय बजट 2026 पर झारखंड की राजनीति गरमा गयी है. बजट पर सत्तापक्ष और विपक्ष के सुर बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बजट को आजाद भारत का सबसे खराब बजट करार दिया है, तो वहीं बीजेपी और प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे विकास और भविष्य की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम बताया है.
बजट वंचित वर्गों को अनदेखी करने वाला बताया : झारखंड मुक्ति मोर्चा
झारखंड का सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस बजट को आम जनता के खिलाफ बताया है. पार्टी ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर केंद्रीय बजट 2026 पर पोस्ट जारी करते हुए लिखा कि बजट में रोजगार बढ़ाने को लेकर कोई ठोस प्रावधान नहीं है न ही महंगाई से राहत के लिए कोई प्रभावी उपाय किये गये हैं. झामुमो ने आरोप लगाया कि किसानों के लिए कोई खास घोषणा नहीं की गयी है. पार्टी ने आदिवासी बहुल राज्यों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए आगे लिखा कि बजट में आदिवासी बहुल राज्यों, किसानों, युवाओं और गरीबों के लिए कोई ठोस वित्तीय बढ़ोतरी नहीं दिखाई देती है. पार्टी ने कहा कि यह बजट वंचित वर्गों के साथ अन्याय करने वाला है. इसमें उनके हितों की अनदेखी की गयी है.
बीजेपी का पलटवार, कहा- रोजगार सृजन को मजबूती से जोड़ता है बजट
वहीं, बीजेपी ने बजट को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह बजट उत्पादन के साथ-साथ रोजगार सृजन को मजबूती से जोड़ता है. पार्टी के अनुसार, बजट का मकसद अर्थव्यवस्था को गति देना और नये अवसर पैदा करना है.
बाबूलाल मरांडी बोले- मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बजट की सराहना करते हुए कहा कि देश मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में पहली बार NIMHANS-2 की स्थापना होगी. ये प्रतिष्ठित संस्थान रांची और तेजपुर में खोले जाएंगे. इससे झारखंड, असम समेत पूरे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के लोगों को विश्वस्तरीय इलाज, शोध और प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी.
हाई-स्पीड रेल से बदलेगी कनेक्टिविटी
बाबूलाल मरांडी ने एक अन्य ट्वीट में इस बजट को आधुनिक परिवहन ढांचे को मजबूती देने वाला बताया है. उन्होंने कहा कि बजट के तहत देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. इनमें वाराणसी–सिलीगुड़ी, मुंबई–पुणे, चेन्नई–बैंगलोर, हैदराबाद–बैंगलोर, पुणे–हैदराबाद, दिल्ली–वाराणसी और हैदराबाद–चेन्नई शामिल हैं. उनके अनुसार, ये परियोजनाएं न सिर्फ यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएंगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों, क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी को भी मजबूती देंगी.
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