मानसिक रोग का इलाज कराने आ रहे 30 प्रतिशत लोग नशे के आदी

Updated at : 19 Apr 2024 12:51 AM (IST)
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कांके स्थित केंद्रीय मन: चिकित्सा संस्थान (सीआइपी) और रिनपास में मानसिक रोग का इलाज कराने आ रहे 25-30 प्रतिशत लोग किसी न किसी नशे के आदी हैं.

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संजीव सिंह(रांची): कांके स्थित केंद्रीय मन: चिकित्सा संस्थान (सीआइपी) और रिनपास में मानसिक रोग का इलाज कराने आ रहे 25-30 प्रतिशत लोग किसी न किसी नशे के आदी हैं. अस्पतालों में चिकित्सकों को इससे मानसिक रोग की शुरुआत का पता लगाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, अस्पतालों में संबंधित रोगी व परिवार के लोगों से प्राप्त हिस्ट्री के आधार पर ही रोग के संबंध में निष्कर्ष निकाल कर इलाज करना पड़ रहा है. नशापान से छुटकारा पाने के लिए सीआइपी के 70 बेड और रिनपास के 50 बेड के ड्रग एडिक्शन वार्ड की सभी सीटें फुल हैं. जिनमें अधिकतर शराब, स्मैक, तंबाकू तथा गांजा के आदि हो चुके रोगी हैं. सीआइपी के चिकित्सक डॉ संजय कुमार मुंडा के अनुसार, सीआइपी में नशापान से छुटकारा पाने के लिए पुरुष के साथ-साथ महिलाएं भी आ रही हैं. डॉ मुंडा ने बताया कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी नशा करने की आदत बढ़ी है. राजधानी में ही महिलाओं के बीच ब्राउन शुगर से लेकर हेरोइन, शराब, ई-सिगरेट, गुल तथा गुड़ाकु का सेवन करनेवालों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है. सीआइपी में दो लड़कियां ऐसी हैं, जो ब्राउन शुगर की लत लगने के बाद इलाज करा रही हैं. यहां वैसी भी महिलाएं अपना इलाज करा रही हैं या फिर इलाज करा कर लौट गयी हैं, जिन्हें शराब और ई-सिगरेट की लत लग गयी थी. झारखंड सहित बंगाल की कई महिलाएं हैं, जो गुल व गुड़ाकू के सेवन करने की आदि हो गयी हैं और अब इलाज करा रह छुटकारा पानी चाहती हैं.

इलाज कराने से झिझकती हैं महिलाएं :

दूसरी तरफ, रिनपास के पूर्व निदेशक डॉ अमूल रंजन का कहना है कि नशापान का इलाज कराने के लिए पुरुष तो काफी संख्या में आ रहे हैं, लेकिन इसके अनुपात में नशा करनेवाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है. हालांकि, महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से अपना इलाज कराने में अब भी झिझकती हैं. अस्पताल में वे सामाजिक या पारिवारिक कारणों से इलाज कराने कम संख्या में पहुंच रही हैं. सीआइपी व रिनपास में टेलीफोन के माध्यम से कई युवा पुरुष व महिला नशापान से छुटकारा पाने के लिए सुझाव मांग रहे हैं. डॉ रंजन ने कहा कि नशापान से छुटकारा के लिए संबंधित व्यक्ति की स्वयं की इच्छाशक्ति मजबूत करनी होगी. पारिवारिक, दोस्तों के बीच का माहौल ठीक करना होगा. दवा के साथ योग जरूरी होगा. लोगों के बीच जागरूकता फैलानी होगी.

केस स्टडी – ब्राउन शुगर की लत से छुटकारा पाना चाहती है युवती :

रांची की रहनेवाली एक 23 वर्षीय लड़की ब्राउन शुगर की आदि हो गयी हैं. उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली. मां ने उसे किसी तरह पाल-पोस कर बड़ा किया. जीवन काफी संघर्ष भरा रहा. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह तनाव में रहने लगी. ऐसे में मानसिक शांति के लिए पहले गुटखा का सेवन करने लगी. धीरे-धीरे जब उसे ब्राउन शुगर मिलने लगा, तो उसे काफी अच्छा लगने लगा. अंतत: ब्राउन शुगर का डोज बढ़ने लगा और वह इसकी चपेट में इस कदर आ गयी कि उसका जीना मुहाल हो गया. अब वह इलाज करा रही है. किसी भी तरह के नशा से दूर रहना चाहती है. इलाज से अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रही है.

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