रांची :संसदीय व्यवस्था सिखाने आये विशेषज्ञ, सीखनेवाले आधे विधायक पहुंचे ही नहीं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Feb 2020 6:10 AM
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प्रबाेधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम. 43 विधायक पहुंचे, बाकी विधायकों ने नहीं दिखायी दिलचस्पी रांची : विधानसभा द्वारा मंगलवार को आयोजित प्रबाेधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधे विधायक नहीं पहुंचे थे़ प्रशिक्षण कार्यक्रम में 43 महज विधायक पहुंचे थे़ बाकी विधायकों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में रुचि नहीं दिखायी स्पीकर रवींद्र नाथ महतो की पहल पर आयोजित […]
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प्रबाेधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम. 43 विधायक पहुंचे, बाकी विधायकों ने नहीं दिखायी दिलचस्पी
रांची : विधानसभा द्वारा मंगलवार को आयोजित प्रबाेधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधे विधायक नहीं पहुंचे थे़ प्रशिक्षण कार्यक्रम में 43 महज विधायक पहुंचे थे़ बाकी विधायकों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में रुचि नहीं दिखायी
स्पीकर रवींद्र नाथ महतो की पहल पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम विधायकों को लिए आयोजित था़ कार्यक्रम भव्य था, लाखों खर्च हुए़ विधायकों को संसदीय व्यवस्था की बारीकियों की जानकारी देने के लिए दिल्ली से विशेषज्ञ आये थे़ अलग-अलग विषयों पर सत्र आयोजित था़ इसमें सवाल-जवाब के लिए भी सत्र तय किया गया था
लोकसभा के पूर्व महासचिव जीसी मल्होत्रा ने संसदीय विशेषाधिकार को लेकर विधायकों को प्रावधान बताये़ श्री मल्होत्रा ने सदन और सदन के बाहर जनप्रतिनिधियों को मिलने वाले विशेषाधिकार के अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी़ जनता से चुन कर आये जिन विधायकों को विशेषाधिकार मिला है, वही सुनने नहीं पहुंचे
इसके साथ ही राज्यसभा के अपर सचिव रहे एनके सिंह ने प्रभावी विधायिका को लेकर अपनी बातें रखी़ं विधायी और वित्तीय कार्य, समिति व्यवस्था की जानकारी विधायक इस सत्र में हासिल कर सकते थे़ लेजिस्लेटिव रिसर्च के संचालक चक्षु राय ने संसदीय व्यवस्था को सुचारू संचालन पर प्रकाश डाला़ विधायी कार्यों की जानकारी दी़
इधर सत्र के दौरान प्रश्नकाल में मंत्री बादल पत्रलेख, विधायक प्रदीप यादव, अनंत ओझा, इरफान अंसारी, दीपक बिरुआ, भानु प्रताप शाही, बंधु तिर्की सहित कई विधायकों ने प्रश्न जरूर पूछे़ कई अहम सवाल सत्र के दौरान आये़ हालांकि नये विधायक प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहुंचे थे़ खास कर मंत्रियों और नयी महिला विधायकों की उपस्थिति थी़
नये विधायकों ने दिखायी रुचि, कुछ विधायकों ने विशेषज्ञाें से पूछे सवाल
ये विधायक पहुंचे थे
नलिन सोरेन, बंधु तिर्की, प्रदीप यादव, विनोद सिंह, भानु प्रताप शाही, अनंत ओझा, राज सिन्हा, डॉ शशिभूषण मेहता, समरी लाल, केदार हाजरा, उमाशंकर अकेला, नारायण दास, राज सिन्हा, रामदास सोरेन, नवीन जायसवाल, इंद्रजीत महतो, दीपक बिरुआ, अंबा प्रसाद, पूर्णिमा सिंह, ममता देवी, सहित अन्य.
मंत्री जो पहुंचे थे
रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, हाजी हुसैन अंसारी, सत्यानंद भोक्ता, बादल पत्रलेख.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बोले
दूसरे को आइना दिखाने से पहले खुद अपना चेहरा देखें पर भरोसा करता हूं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि विधायिका का सर्वोच्च स्थान है़ यहां चुने हुए शीर्ष राजनीतिक और जनप्रतिनिधि बैठते है़ं राज्य को बेहतर दिशा में ले जाने की चर्चा होती है़ जन सरोकार को लेकर विधायक मंथन करते है़ं इसकी गरिमा बनाये रखने की जरूरत है़
सत्ता पक्ष, तभी हैं, जब विधायकों की संख्या बल से सरकार बनती है़ किसी को आइना दिखाने से पहले मैं खुद अपना चेहरा देखने पर भरोसा करता हू़ं श्री सोरेन मंगलवार को सचिवालय सभागार में विधायकों के प्रबोधन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर उदघाटन कर्ता बोल रहे थे़ कार्यक्रम में संसदीय मामलों के विशेषज्ञों ने विधायकों को विधायी प्रक्रिया, संसदीय विशेषाधिकार आदि की जानकारी दी़
स्पीकर रवींद्र नाथ महतो बोले
संसदीय कार्य में विधायकों की दिलचस्पी कम होना चुनौती
स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विधायिका का महत्वपूर्ण स्थान है़ कार्यपालिका के विधायिका के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के कारण न केवल सरकार विधायिका पर निर्भर है, बल्कि सरकार को जन सरोकार के करीब भी रखता है़
न्यायपालिका संविधान के माध्यम से विधायिका एवं कार्यपालिका दोनो को संयमित रखती है़ विधायिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि संसदीय कार्यों में माननीय विधायकों की अभिरूचि कम होती जा रही है़ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा एवं वाद–विवाद संभव नहीं हो पा रहा है़ महत्वपूर्ण विधेयक बिना चर्चा के पास कर दिये जाते है़ं पक्ष और विपक्ष के बीच गुण–दोष के आधार पर बहस होनी चाहिए़
संविधान विशेषज्ञों ने कहा
कानून मानने के लिए केंद्र कर सकता है राज्यों को बाध्य
संविधान विशेषज्ञ सह लोकसभा के पूर्व महासचिव जीसी मल्होत्रा ने कहा कि संसद के दोनों सदनों सेे पारित होने के बाद केंद्र सरकार इस कानून को राज्यों में लागू करने व मानने के लिए बाध्य कर सकती है. अगर राज्य सरकार संबंधित कानून के संतुष्ट नहीं है, तो वह विधानसभा से इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सकती है.
श्री मल्होत्रा ने यह बातें मंगलवार को झारखंड विधानसभा के नवनिर्वाचित विधायकों के लिए आयोजित प्रबोधन सह प्रशिक्षण शिविर में विधायक इरफान अंसारी के सवाल के जवाब में कही. प्रभावी विधायिका पर आयोजित तकनीकी सत्र के दौरान विधायकों ने संविधान विशेषज्ञों से कई सवाल पूछे. राज्यसभा के पूर्व अपर सचिव एनके सिंह ने विधायिका के मुख्य कार्यों पर प्रकाश डाला.
उप सभापति हरिवंश का संबोधन आज : विधायकों के प्रबोधन सह प्रशिक्षण समापन सत्र में 12 फरवरी को राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश का संबोधन होगा. वे विधायिका व विधायक के समक्ष चुनौतियों विषय पर बोलेंगे.
आज सैलूट दे रहे, कल गर्दनिया पासपोर्ट देंगे
पूर्व स्पीकर व विधायक सीपी सिंह ने कहा कि सत्ता परमानेंट नहीं है़ आज अधिकारी सैलूट दे रहे हैं, कल सत्ता में नहीं रहेंगे, तो गर्दनिया पासपोर्ट देंगे़ यह स्थिति एक दिन मेें नहीं आयी है़ श्री सिंह ने कहा कि सत्ता आती-जाती है, लेकिन विधायिका कमजाेर नहीं होना चाहिए़ यह कैसे मजबूत हो, इस पर विचार होना चाहिए़
हाउस में अनुशासन होना चाहिए : आलमगीर
संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि हाउस में अनुशासन होना चाहिए़ हाउस को बाधित करना गलत है़ जनता के सवाल सदन के अंदर आने चाहिए़ शोर-गुल कर मीडिया और अखबार में आने से काम नहीं चलनेवाला है़ जन आकांक्षा के अनुरूप बहस होनी चाहिए़ जनता की अपेक्षा पर खरा उतरने की जरूरत है़
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