भीख मांगना मजबूरी नहीं, इनकी आदत है

Updated:
विज्ञापन

अनुप्रिया और रोहित चौरसिया रांची :रोजाना राजधानी की गलियों से लेकर सड़कों तक और मंदिरों से लेकर बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पर घूम-घूम कर भीख मांगते लोग मिल जायेंगे. भीख मांगना किसी इंसान की बेबस जिंदगी का सबसे दर्दनाक पहलू होता है. हालांकि, कई ऐसे भी भिखारी हैं, जिनके लिए भीख मांगना मजबूरी […]

विज्ञापन

अनुप्रिया और रोहित चौरसिया

आपके शहर में

विज्ञापन
रांची :रोजाना राजधानी की गलियों से लेकर सड़कों तक और मंदिरों से लेकर बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पर घूम-घूम कर भीख मांगते लोग मिल जायेंगे. भीख मांगना किसी इंसान की बेबस जिंदगी का सबसे दर्दनाक पहलू होता है. हालांकि, कई ऐसे भी भिखारी हैं, जिनके लिए भीख मांगना मजबूरी नहीं, बल्कि आदत है. या यूं कहें कि सब कुछ है़ प्रभात खबर की टीम ने राजधानी की उन बस्तियों का जायजा लिया, जहां भिखारी रहते हैं. इस दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये.
वर्ष 2011 की जनगणना और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में 61750 भिखारी हैं. यह गरीबी के हालात दर्शाता है. प्रभात खबर की पड़ताल में कुछ ऐसे भिखारी मिले, जो शारीरिक परेशानी या बीमारी के कारण भीख मांगने के लिए मजबूर हैं. कुष्ठ रोग के कारण कुछ लोगों को काम नहीं मिलता. वहीं, सामाजिक दुराव के कारण भीख मांगना इन लोगों की मजबूरी है.
हालांकि, कई शारीरिक रूप से सक्षम लोग अपनी तंगहाली की दुहाई देकर भीख तो मांगते हैं, लेकिन काम नहीं करना चाहते हैं. मजे की बात यह है कि सरकार की योजनाएं भी इनकी चौखट तक पहुंच रही हैं. ये लोग राशन से लेकर वृद्धा पेंशन समेत सरकार की तमाम जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. उज्ज्वला योजना, लाल कार्ड, पीला कार्ड, आयुष्मान भारत योजना, जन-धन योजना जैसी सुविधाएं इन तक उपलब्ध हैं.
घर में टीवी-फ्रीज सब, फिर भी मांग रहे भीख
इंदिरा नगर में भीख मांगने वालों का मोहल्ला है. साफ-सुथरा दिखनेवाले इस मोहल्ले में करीब 185 घर हैं. यहां बिजली, पानी, सड़क सारी मौलिक सुविधाएं दुरुस्त हैं. कुछ घरों में तो गैस चूल्हा, फ्रीज, टीवी और बाइक तक है. लेकिन यहां के लोग भीख मांगते हैं. हालांकि, इस इलाके में ज्यादातर कुष्ठ रोगी हैं.
लेकिन, जो लोग ठीकठाक है, वे भी भीख मांगने निकल जाते. आर्थिक स्थिति ठीक होने के बावजूद भी इन लोगों ने भीख मांगना नहीं छोड़ा है. कुछ लोग तो 20 वर्षों से भीख ही मांग रहे हैं. निर्मला कुष्ठ कॉलोनी में तो कई लोगों के पास मोबाइल थे. यहां के कुछ लोग भीख मांगना छोड़कर अब अपना व्यवसाय चलाते हैं.
भीख मांग कर 7000 तक कमा लेते हैं, बैंक एकाउंट भी है
जगन्नाथपुर, निवारणपुर, रेलवे स्टेशन के आसपास भीख मांगने वालों से बातचीत करने पर जानकारी मिली कि औसतन दो सौ से पांच सौ तक भीख मांग कर जुटा लेते हैं. इनका साफ कहना था कि हम खाने-पीने के चीज लेने के बजाय पैसे मांगते हैं.
शारीरिक रूप से सक्षम लोग एक जगह बैठने की जगह घूम-घूम कर मांगते हैं. मॉल, बाजार या होटलों के आगे भीख मांगने में अच्छी आय होती है. इसके लिए परिवार को लोग वृद्ध और बच्चों का इस्तेमाल करते हैं. कुछ भीख मांगने वालों का बैंक में एकाउंट भी है. जनधन योजना से पहले ही खाता खुलाया है. बार-बार आग्रह के बाद भी ये पासबुक नहीं दिखाते हैं.
बच्चों को भेज रहे स्कूल, बस्ती में स्नातक भी
भीख मांगने वाली बस्तितयों के कई घर अपने हालात बदलना भी चाहते हैं. जगन्नाथपुर के इंदिरा नगर में बच्चों सरकारी स्कूल जा रहे हैं. यहां स्नातक तक पढ़े हुए लोग भी हैं. यहां रहने वाले मुरली गोस्वामी ने बताया कि यहां के युवक काम करते हैं. कुछ ड्राइवर हैं, तो कुछ मजदूर, कुछ लोग मॉल में काम करते हैं. ऐसे कुछ लोग हैं, जो भीख मांगना नहीं छोड़ रहे हैं, क्योंकि ये उनकी आदत बन गयी है.
हमारी सबसे बड़ी समस्या आवास की है. हमारे पास पैसे नहीं हैं, गरीब हैं. हमारा कोई सर्टिफिकेट नहीं बनता है. हमारे बच्चों को शिक्षा लेने में दिक्कत होती है.
मीना तिर्की
मुझे वृद्धा पेंशन मिलती है. लाल कार्ड से अनाज भी मिलता है, लेकिन महंगाई के जमाने में परिवार के गुजर-बसर के लिए इतना काफी नहीं है. इसीलिए भीख मांगनी पड़ती है. दूसरा कोई चारा नहीं दिखता है.
रोमनी
किसी भी पेशे की शुरुआत करने वाले लोगों को लगता है कि इसी से पैसा कमाया जाता है. जो कम पढ़े-लिखे होते हैं, उनमें आर्थिक असुरक्षा का भावना होती है. पैसा होने के बावजूद भी पेशा नहीं बदलते हैं. उनको लगता है कि जो पैसा है, वह भी खत्म नहीं हो जाये. इस कारण लोग उसी पेशे में लगे रहते हैं. अगर किसी भिखारी के पास छोटा-मोटा व्यवसाय करने के लायक पैसा आ गया हो, तो इसके लिए सरकार या गैर सरकारी संस्था को आगे आना चाहिए. उनकी दशा-दिशा बदलने के लिए उनको मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत करना चाहिए. उनमें सुरक्षा की भावना विकसित करनी चाहिए.
डॉ भूमिका सच्चर खनाडे, मनोवैज्ञानिक
विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola