उपायुक्तों की कार्यशैली पर सीएम रघुवर दास तल्ख, कहा- डीसी आइएएस हैं, कॉमन सेंस ताे होना ही चाहिए

Updated at : 01 Sep 2018 4:22 AM (IST)
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उपायुक्तों की कार्यशैली पर सीएम रघुवर दास तल्ख, कहा- डीसी आइएएस हैं, कॉमन सेंस ताे होना ही चाहिए

रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उपायुक्तों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जतायी है. सीेएम जनसंवाद के तहत सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा : जिलों में छोटे-छोटे काम भी लटकाये जा रहे हैं, जबकि उपायुक्तों को करोड़ों रुपये अनटाइड फंड में दिये गये हैं. सीधी बात के दौरान कई शिकायतें ऐसी आयी थीं, […]

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रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उपायुक्तों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जतायी है. सीेएम जनसंवाद के तहत सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा : जिलों में छोटे-छोटे काम भी लटकाये जा रहे हैं, जबकि उपायुक्तों को करोड़ों रुपये अनटाइड फंड में दिये गये हैं. सीधी बात के दौरान कई शिकायतें ऐसी आयी थीं, जिसके लिए काफी कम राशि की जरूरत है. ऐसे काम जिला स्तर पर हो सकते हैं, लेकिन उसे नहीं कराया जा रहा है. छोटे-छोटे काम कराने के लिए सरकार से निर्देश मांगा जाता है. सूचना भवन में शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने 18 शिकायतें सुनी और निबटारे का आदेश दिया.

मुख्यमंत्री ने कहा : उपायुक्त आइएएस हैं. उनको कॉमन सेंस तो होना ही चाहिए. उनको पता होना चाहिए कि छोटे-मोटे कामों के लिए केवल बीस सूत्री के प्रभारी मंत्री के अप्रूवल की जरूरत होती है. अधिकारियों को प्रजेंस आॅफ माइंड का भी इस्तेमाल करना चाहिए. छोटे काम भी नहीं होने से लोगों में आक्रोश पैदा होता है. काम नहीं होने से सरकार की बदनामी हो रही है. उन्होंने उपायुक्तों को सख्त हिदायत दी कि छोटे काम लिए विभाग को पत्र नहीं लिखें, बल्कि सरकार ने उन्हें जो अनटाइड फंड उपलब्ध कराया है, उससे काम करायें. फंड बैंक में रखने के लिए नहीं दिया गया है.
कितनों को सजा हुई : मुख्यमंत्री ने बच्चियों और युवतियों के साथ घटनेवाली घटनाओं में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतने का निर्देश दिया. उन्होंने सभी जिलों के एसपी को ऐसी घटनाओं और इसमें की गई कार्रवाई की अद्यतन रिपोर्ट जल्द देने का निर्देश दिया है. कहा कि ऐसे मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जायें. गृह सचिव एसके जी रहाटे को निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री कहा कि इस संबंध में सभी जिलों के एसपी को पत्र जारी करें. सभी एसपी से पूछा जाये कि बच्चियों और युवतियों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में कितनों को सजा हुई है.
डीसी आइएएस हैं..
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कितने केस दर्ज हैं और उन पर अब तक क्या कार्रवाई की गयी है. उन्हाेंने कहा कि अब ऐसे मामलों में किसी प्रकार का ढुलमुल रवैया नहीं चलेगा.
छात्रा ने आपबीती सुनाई : सीधी बात में हजारीबाग के कॉलेज की एक 19 वर्षीय छात्रा ने अपने साथ घटी घटना की जानकारी मुख्यमंत्री को देकर कार्रवाई की मांग की. उसने बताया कि उसके ममेरे भाई अली अब्दुलाह, सदागत हुसैन, आफताब आलम व सदाब हुसैन ने दो दिसंबर 2016 को उसका अपहरण कर लिया और धनबाद ले गये. अली अब्दुल्लाह ने जबरन निकाह की धमकी दी और 110 दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया. अभियुक्तों ने उस पर एसिड से हमला करने का भी प्रयास किया. 10 दिन बाद किसी तरह वह भाग कर घर आयी. एफआईआर दर्ज कराया, लेकिन डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने पर मुख्य अभियुक्त अली अब्दुल्लाह पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. अभियुक्तों द्वारा आये दिन उसके परिवार को केस उठाने की धमकी दी जा रही है. पीड़िता ने कहा कि उसने पुलिस को कई साक्ष्य उपलब्ध कराये हैं.
उसने आरोप लगाया कि पुलिस व कुछ अन्य तकनीकी एक्सपर्ट मिलकर जांच रिपोर्ट को प्रभावित किया है. उसने इस मामले की वरीय पदाधिकारियों की निगरानी में जांच कराने का आग्रह किया. जिला के पदाधिकारियों ने मुख्ममंत्री को बताया कि अभियुक्त अली अब्दुलाह व शादाब हुसैन के विरुद्ध आरोप सही पाये गये है. अली जमानत पर मुक्त है. गाड़ी चलाने वाले शादाब को जेल भेजा जा चुका है.
पुलिस केस बंद करना चाहती है
पीड़िता ने बताया कि इस जघन्य अपराध को पुलिस दबाव में आकर सिर्फ अपहरण का केस बना कर बंद करना चाहती है. मुख्य अभियुक्त अली का बेल 31 जनवरी 2018 को ही रद्द कर दिया गया, लेकिन अब तक उसी गिरफ्तारी नहीं हुई है. इस कांड में संलिप्त सदागत हुसैन और आफताब आलम पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. पीड़िता की व्यथा सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने पुलिस पदाधिकारियों को इसे हल्के में नहीं लेने का आदेश दिया. कहा कि यह बच्ची का केस है. इसे अविलंब फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जायें और न्याय दिलायें.
हजारीबाग डीएफओ को हटाने का आदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि काम में किसी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जायेगी. आइएएस हो या आइएफएस, कोई भ्रष्टाचारी है, तो वह नहीं बचेगा. योजनाओं के लिए जो भी पैसा दिया जा रहा है उसमें यदि अनियमितता होती है, तो संवेदक के साथ साथ दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी. कार्यक्रम में हजारीबाग से आये संजय तिवारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि 2013 में हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन ने तत्कालीन अमीन की मिलीभगत से नक्शों में हेरफेर किया और काफी अवैध संपति अर्जित की. 172 एकड़ वन भूमि पैसे लेकर एक स्टील कंपनी को हस्तांतरित कर दिया. पूर्व बर्खास्त अमीन निरीक्षक सुधीर सिन्हा द्वारा लगभग 1600 एकड़ वन भूमि बेचे जाने की चेंज को लेकर टालमटोल की गयी. सुधीर सिन्हा पर 5.57 करोड़ रुपये वसूली के लिए मनी सूट के लिए वन प्रमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन ने सहयोग नहीं किया. उन्होंने अपने कार्यकाल में मनरेगा की कई योजनाओं के अंतर्गत कुल 22.41 लाख रुपये का गबन किया. कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से वन भूमि को भूमि मफियाओं के हाथ बेचा गया. इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव को आवेदन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
अवैध खनन का आरोप लगा कर केस किया
संजय ने मुख्यमंत्री को बताया कि जब उन्होंने इस मामले को उठाया, तो विभाग ने उन्हें फंसाने के लिए अवैध खनन का आरोप लगा कर केस कर दिया. पीसीसीसएफ भी डीएफओ को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राजीव रंजन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई संचालित है. इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट लहजे मेंं कहा कि जांच क्या अनंत काल तक चलता रहेगा. भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं किया जायेगा. उन्होंने आदेश दिया कि हर जिले में ऐसे कारनामों की जांच करायी जाये. सरकार जो पैसा दे रही है, उसकी थर्ड पार्टी जांच करायी जाये. 1600 एकड़ जमीन को वापस लिया जाये.
इस मामले में केवल अमीन ही दोषी नहीं है, बल्कि बड़े अफसर भी दोषी हैं. इसलिए उन पर भी कार्रवाई हो. डीएफओ राजीव रंजन का तुरंत तबादला किया जाये. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र में 2.50 लाख शिकायतें आयी हैं, जिसमें 90 प्रतिशत का निपटारा कर दिया गया है. हर सप्ताह समीक्षा में किसी एक विभाग की शिकायत का निपटारा कर दिया जाता है.
बैंक में रखने के लिए नहीं दी गयी है अनटाइड फंड
छाेटे काम नहीं हाेने से सरकार हो रही बदनाम
हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल पदाधिकारी काे हटायें
सरकार जो पैसा दे रही है, उसकी थर्ड पार्टी जांच करायें
सूचना भवन में मंगलवार को सीएम जनसंवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री.
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