गोपी कृष्णा कुंवर की रिपोर्ट
लोहरदगा: सेन्हा प्रखंड क्षेत्र के सेरेंगहातु तोड़ार पंचायत अंतर्गत बरही गांव में ग्रामीणों के सहयोग से पहनई खेत में धान रोपनी का कार्य किया गया. ग्रामीण परंपरा के अनुसार प्रत्येक गांव में गांव के पहान को जीविकोपार्जन के लिए खेत दिया जाता है. पहान उसी खेत में खेती कर अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. इसी परंपरा के तहत बरही गांव में भी पहान को खेती के लिए पहनई जमीन दी गई है.
पहान के अधिकार को लेकर ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के ही कुछ लोगों द्वारा उक्त पहनई जमीन पर जबरन जोत-कोड़ कर खेती की जा रही थी. इसकी जानकारी समाज के अगुवा लोगों को मिलने के बाद ग्रामीण एकजुट हुए और गांव के चरवा पहान के पक्ष में पहनई जमीन पर रविवार को धान रोपनी का कार्य किया.
पहान की जमीन पर दबंगई के विरोध में ग्रामीण हुए गोलबंद
इस दौरान ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि परंपरा के अनुसार प्रत्येक तीन वर्षों में गांव के पुराने पहान को बदलकर नए पहान का चयन किया जाता है. गांव में जो भी पहान होंगे, वे अपने कार्यकाल तक इस पहनई जमीन पर खेती कर अपना और अपने परिवार का जीविकोपार्जन करेंगे. ग्रामीणों ने कहा कि पूर्वजों द्वारा इस जमीन को चिन्हित कर गांव के पहान को दिया गया है और इस जमीन पर पहान का ही अधिकार है. यदि कोई व्यक्ति दबंगई से पहान की जमीन छीनने का प्रयास करेगा, तो ग्रामीण एकजुट होकर नियम के अनुसार कार्रवाई करेंगे.
ग्रामीणों ने कहा कि गांव का पहान पूरे गांव की देखभाल करता है और वह खेती पर ही निर्भर रहता है. बरही गांव में पहनई खेत में धान रोपनी के दौरान आदिवासी समाज के लोगों के साथ-साथ अन्य समुदाय के गणमान्य लोगों का भी सहयोग रहा. गांव के महिला-पुरुषों ने मिलकर चरवा उरांव के पक्ष में धान रोपनी का कार्य किया.
