किस्को के परहेपाठ पंचायत के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

किस्को के परहेपाठ पंचायत के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

किस्को़ प्रखंड मुख्यालय के सबसे नजदीकी पंचायत परहेपाठ के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बेबाक तरीके से अपनी समस्याओं को उजागर किया. ग्रामीणों का कहना है कि कई सरकारें बदली और विकास के बड़े-बड़े वादे किये गये, परंतु अब तक वास्तविक विकास नहीं हुआ. प्रखंड मुख्यालय के सबसे नजदीकी पंचायत होने के बावजूद परहेपाठ में ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत सही साबित हो रही है. पंचायत भवन के पास स्थित गोसाई टोली गांव भी विकास से दूर है. यहां ना तो पीने का साफ पानी उपलब्ध है, ना ही अच्छी सड़क और पक्की नाली की व्यवस्था है. प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों के वादों के बावजूद ग्रामीण आज भी विकास से वंचित हैं. परहेपाठ पंचायत के गोसाई टोली में लगभग 1000 परिवार और लगभग 1000 वोटर रहते हैं. इसके अलावा पंचायत क्षेत्र में लगभग 2000 लोग निवास करते हैं. दो जलमीनार होने के बावजूद उनमें से एक महीनों से खराब पड़ी है, जिससे लोग दूसरे टोले से पानी लाने को विवश हैं. सड़कें टूटी, नाली भी नहीं : ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़कें टूटी हुई हैं, पीसीसी सड़क कई जगहों पर क्षतिग्रस्त है और नाली की व्यवस्था नहीं होने के कारण जलजमाव की समस्या बनी रहती है, जिससे मच्छर और रोगजनित जीवाणु फैलते हैं. ग्रामीण प्रतिमा देवी का कहना है कि गांव में नाली की समस्या वर्षो से है. यहां जलजमाव और दुर्गंध से लोग परेशान रहते हैं, मच्छर व जीवाणु से लोग बीमार होते रहते हैं. नारायण महली का कहना है कि गाँं में नाली नही होने से बरसात में तालाब जैसा स्थिति बना रहता है. जगह-जगह कीचड़ और दुर्गंध से लोग परेशान रहते हैं. राजकुमार महली का कहना है कि गांव में सड़के टूटी हुई है, दो जलमीनार लगाये गये हैं, जो आबादी के अनुसार प्यास बुझा नहीं पाती है. जलमीनार खराब होने से लोग परेशान हैं. लोग दूसरे टोले के जलमीनार से जाकर पानी लाते हैं. मुनवा महली का कहना है कि गांव में शौचालय की स्थिति काफी खराब है,लोग खुले में शौच करने को विवश है़ं जिससे खेत खलियानों में गंदगी अंबार लगा रहता है. पेयजल, सड़क, नाली गांव की मुख्य समस्या है. जल नल के तहत गांव में वॉटर ट्रीटमेंट से पहुंचने वाला पानी लगभग तीन वर्षों से बंद पड़ा है. ग्रामीण अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आहत : ग्रामीण अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आहत हैं. उनका कहना है कि पंचायती राज के प्रतिनिधि केवल दिखावे के लिए कार्य कर रहे हैं और बड़े-बड़े उद्घाटन और समारोह कर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं. आवास योजना, मंईयां योजना और राशन वितरण के लाभ भी लोगों तक नहीं पहुंच रहे हैं. ग्रामीण सवाल कर रहे हैं कि आखिर विकास कहां और कैसे हो रहा है. अब लोगों की मांग है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी मूलभूत अधिकारों को सुनिश्चित करें और परहेपाठ पंचायत में वास्तविक विकास कार्य शुरू करें.

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By Shailesh ambashtha

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