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लॉकडाउन में चौपट हुआ लोहरदगा कपड़ा करोबारियों का धंधा, तकरीबन 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित

उन्हें उम्मीद थी कि इस साल परिस्थितियां बेहतर होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. त्योहार व लग्न का सीजन शुरू होते ही दुकानों को बंद रखने का आदेश आ गया. त्योहार व लग्न को लेकर मंगाया गया सारा स्टॉक दुकान में ही पड़ा रह गया. जो दुकानदार चोरी छुपे बिक्री करते पकड़े गये, उन पर जुर्माना लगाया गया.

Jharkhand News, Lockdown News Lohardaga लोहरदगा : लोहरदगा जिला में स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह का अनुपालन कड़ाई के साथ कराया जा रहा है. स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के दौरान कपड़ा दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं है. त्योहार व लग्न के सीजन में बिक्री नहीं होने से दुकानदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. दुकानदारों को पिछले साल भी लॉकडाउन की वजह से नुकसान उठाना पड़ा था.

उन्हें उम्मीद थी कि इस साल परिस्थितियां बेहतर होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. त्योहार व लग्न का सीजन शुरू होते ही दुकानों को बंद रखने का आदेश आ गया. त्योहार व लग्न को लेकर मंगाया गया सारा स्टॉक दुकान में ही पड़ा रह गया. जो दुकानदार चोरी छुपे बिक्री करते पकड़े गये, उन पर जुर्माना लगाया गया.

कपड़ा दुकानदारों का कहना है कि सरकार दोहरी नीति अपना रही है. शादी-विवाह से लेकर अंतिम संस्कार में कपड़े की जरूरत होती है. सरकार शादी विवाह की अनुमति दी है, लेकिन कपड़ा दुकान खोलने की अनुमति नहीं है. लोहरदगा जिला कपड़ा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष संदीप पोद्दार ने बताया कि इस बंदी से लग्न, शादी-विवाह के समय में पूरे लोहरदगा के कपड़ा व्यापार में लगभग 30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

सरकार कहती है कि लॉकडाउन में वैसे व्यवसाय को छूट दी गयी है, जहां लोगों को रोजगार मिलता है, ताकि उनकी आजीविका चल सके. कपड़े की तमाम दुकानों में दो से चार कर्मचारी कार्य करते हैं. एक कर्मी के साथ कम से कम चार व्यक्ति का परिवार होता है. आज लोहरदगा में कम से कम छोटी बड़ी कपड़े की लगभग 200 दुकानें होंगी. इस बंदी से हम व्यापारियों के साथ-साथ हजारों कर्मचारियों के परिवार को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

सरकार व्यापारियों की मजबूरी को ध्यान में रखते हुए कपड़ा दुकानों को शीघ्र खोलने की अनुमति दे. कपड़ा दुकानदार पंकज चौधरी का कहना है कि लगन के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की गयी थी, लेकिन बंदी से सारा स्टॉक पड़ा रह गया. तनय गुप्ता का कहना है कि कपड़े की दुकानों को बंद करने से दुकानदार के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी हो गयी है.

कपड़ा व्यवसायी मनीष पोद्दार का कहना है कि ईद व लग्न का सीजन कपड़ा व्यापारियों के लिए बड़ा मौका होता है, लेकिन दुकान बंद होने से मोटी रकम फंस गयी है. सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है. कुंदन अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल भी भारी नुकसान हुआ था. इस साल भी पहले जैसी ही स्थिति है. रितेश कुमार ने बताया कि ग्राहक भी परेशान हैं. शादी की खरीदारी करनी है.

दुकान बंद है. कपड़ा दुकानदार आनंद अग्रवाल का कहना है कि कपड़ा दुकानों के बंद होने से लगातार नुकसान हो रहा है. सरकार को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है. सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शादी बगैर नये कपड़े के कैसे होगी. जब शादी की अनुमति है तो कपड़े की दुकानें भी खुलनी चाहिए. अमर पोद्दार का कहना है कि लगातार दुकान बंद होने से आर्थिक स्थिति चरमरा गयी है. नियम का उल्लंघन कर चोरी छुपे दुकान खोलना सही नहीं है. सरकार को हमारी परेशानी समझनी चाहिए.

Posted By : Sameer Oraon

Prabhat Khabar News Desk
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