एक डॉक्टर के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र

Updated at : 31 Dec 2015 7:19 AM (IST)
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एक डॉक्टर के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र

लोहरदगा : अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र कैरो में डॉक्टर व कर्मचारी की कमी है. यह केंद्र 10-12 गांव का मुख्य स्वास्थ्य केंद्र है. उप स्वास्थ्य केंद्र कैरो को अपग्रेड कर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र तो बना दिया गया, लेकिन यहां न डॉक्टर की बहाली की गयी है और न अन्य कर्मचारी की संख्या में बढ़ोतरी की गयी […]

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लोहरदगा : अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र कैरो में डॉक्टर व कर्मचारी की कमी है. यह केंद्र 10-12 गांव का मुख्य स्वास्थ्य केंद्र है. उप स्वास्थ्य केंद्र कैरो को अपग्रेड कर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र तो बना दिया गया, लेकिन यहां न डॉक्टर की बहाली की गयी है और न अन्य कर्मचारी की संख्या में बढ़ोतरी की गयी है. जिसके कारण आज भी यह केंद्र स्वास्थ्य उप केंद्र बन कर रह गया है. मात्र दो कमरों में चलनेवाला इस स्वास्थ्य केंद्र में सामान्य प्रसव कराया जाता है.
जांच के नाम पर मलेरिया, शुगर, पेशाब व हेमोग्लोबीन की जांच की जाती है. अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र कैरो में एक डॉक्टर, तीन एएनएम, एक एकाउन्टेंट, एक लैब टेक्निसियन तथा एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी का स्वीकृत पद है. लेकिन यहां मात्र एक डॉक्टर तथा दो एएनएम ही कार्यरत हैं. चतुर्थ वर्गीय एवं लैब टेक्निसियन का पद कागजों में चल रहा है. एक एएनएम की प्रतिनियुक्ति सीएस के मौखिक निर्देशानुसार सलगी में कर दी गयी है. एक अन्य एएनएम को कभी कुडू तो कभी सिंजो केंद्र बगैर पदस्थापित डॉक्टर की सूचना के भेज दिया जाता है.
मरीज की संख्या 200 प्रतिदिन : अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र कैरो में सामान्यत: प्रत्येक दिन लगभग 200 मरीज आते हैं. इन्हें एक डॉक्टर एवं एक नर्स की चिकित्सा सेवा मिल पाता है. कई मरीज कर्मियों की कमी के कारण बगैर चिकित्सा के वापस होने को विवश होते हैं.
अब तक नहीं बना नया भवन : अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र के नाम पर लगभग दो करोड़ की लागत से नये भवन का निर्माण 2010-11 में शुरू किया गया, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है.
तत्कालीन सिविल सर्जन एसएन सेन गुप्ता ने अतिरिक्त स्वास्थ्य केन्द्र का निरीक्षण कर एक महीने के अंदर भवन को पूर्ण करा कर विभाग को हस्तगत करने का निर्देश संवेदक को दिया था. किन्तु भवन आज भी जस की तस पड़ा हुआ है. विभागीय लापरवाही के कारण अर्द्धनिर्मित भवन के कई सामान असामाजिक तत्वों द्वारा ले जाया जा रहा है. भवन के अभाव में भी क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है.
आवास की सुविधा नहीं : वर्तमान समय में डॉक्टरों एवं अन्य कर्मियों को आवास की सुविधा नहीं दी गयी है.
जिसके कारण पदस्थापित एक डॉक्टर एवं एक नर्स रांची से आना-जाना करते हैं. ट्रेन सुविधा के कारण इनके द्वारा मात्र तीन चार घंटे की ड्यूटी दी जाती है. एक नर्स रोजाना लोहरदगा से आना-जाना कर अपनी नौकरी निभा रही है.
स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा : अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति के संबंध में नव निर्वाचित पंचायत समिति सदस्य शरत कुमार विद्यार्थी का कहना है कि पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह व्यवस्थित होने के बाद स्वास्थ्य सेवा में सुधार का प्रयास किया जायेगा. अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का भवन अब तक विभाग को क्यों सौंपा नहीं गया है. इसकी जानकारी लेते हुए. संवेदक एवं विभाग पर भवन को विभाग को सौंपने के लिए दबाव बनाया जायेगा.
मरीज ज्यादा, चिकित्सक कम
अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित डॉ राकेश प्रसाद ने बताया कि यहां मरीजों की संख्या लगभग 200 है, लेकिन कर्मियों के अभाव में सबों को चिकित्सा सेवा देना कठिन कार्य है.
ऐसे भी सप्ताह में दो दिन नर्सों को विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्र मेें भेजना पड़ता है. आवश्यक दवाइयां तो उपलब्ध रहती है, लेकिन कई ऐसी दवाएं नहीं रहती, जिसके कारण मरीजों को बाहर से दवा लेना पड़ता है. यदि यहां किसी का हाथ पैर टूट जाये तो पलास्टर की भी सुविधा नहीं होती. नतीजतन कुडू या लोहरदगा मरीजों को भेजना पड़ता है.
एंबुलेंस खराब
स्वास्थ्य केंद्र को पूर्व विधायक कमल किशोर भगत ने मरीजों की सुविधा के लिए एंबुलेंस दी थी. किन्तु स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के कारण एंबुलेंस ड्राइवर के अभाव में कूडू में रखा गया है.
कुछ दिनों तक एंबुलेंस कैरो थाना परिसर में पड़ा था. यदि ड्राइवर की व्यवस्था विभाग द्वारा की जाती तो क्षेत्र के लोगों को एंबुलेंस की सेवा मिल सकती थी. कागजों में एंबुलेंस सेवा कैरो में बहाल है.
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