बीडीओ व जूनियन इंजीनियर से स्पष्टीकरण
Updated at : 10 Aug 2016 7:24 AM (IST)
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कोडरमा बाजार : जिले के जयनगर प्रखंड में मनरेगा के तहत हुए डोभा निर्माण में लापरवाही के साथ ही बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है. राज्य स्तरीय जांच दल की जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. ग्रामीण विकास विभाग की राज्य स्तरीय जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर जिले […]
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कोडरमा बाजार : जिले के जयनगर प्रखंड में मनरेगा के तहत हुए डोभा निर्माण में लापरवाही के साथ ही बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है. राज्य स्तरीय जांच दल की जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है.
ग्रामीण विकास विभाग की राज्य स्तरीय जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर जिले के डीडीसी सूर्य प्रकाश ने जयनगर के तत्कालीन बीडीओ रूद्र प्रताप के साथ ही जूनियर इंजीनियर उमेश कुमार वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा है. इन दोनों को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. अगर इस समय सीमा के अंदर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो दोनों के विरुद्व प्रपत्र क गठित करने की कार्रवाई शुरू होगी. जानकारी के अनुसार आरोपों में घिरे जयनगर के तत्कालीन बीडीओ रूद्र प्रताप वर्तमान में गोड्डा में पदस्थापित हैं. डीडीसी ने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण पूछा है.
इसमें प्रशासनिक स्वीकृति से संबंधित अभिलेख पर स्वयं बीडीओ के द्वारा हस्ताक्षर नहीं करने, योजनाओं का निरीक्षण व पर्यवेक्षण नहीं करने, जयनगर पूर्वी पंचायत के मुखिया व पंचायत सेवक का डिजिटल हस्ताक्षर होने के बावजूद अपने स्तर से मजदूरों का भुगतान क्यों किया गया यह पूछा गया है.
इसके अलावा बीडीओ पर आरोप है कि उन्होंने डोभा निर्माण की योजनाओं में पर्यवेक्षण व अनुश्रवण नहीं किया. यही नहीं इस कारण मजदूरी भुगतान में देरी हुई और 220.07 लाख की जगह 133.59 लाख का भुगतान विलंब से हुआ. वहीं जेई से भी कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण पूछा गया है.
इसमें कहा गया है कि 17 व 18 जून को ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा गठित जांच दल ने जयनगर प्रखंड के जयनगर पूर्वी पंचायत व योगियाटिल्ला पंचायत में चल रही मनरेगा योजना की जांच की थी. इसके बाद जांच दल ने अपने पत्रांक एन-1633 दिनांक 20-7-2016 से बताया है कि जेई ने मनरेगा योजना के तहत होने वाले डोभा निर्माण में लापरवाही बरती है. यही नहीं, योजना का नियमानुसर लेआउट नहीं किया गया था. क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं का निरीक्षण व पर्यवेक्षण भी नहीं करने की बात सामने आयी.
इससे गुणवत्ता पर प्रति कूल असर पड़ा. टीम ने कहा हैकि कार्यस्थल पर साइड व स्लैप का मेंटेन नहीं होने से लगता है कि अपेक्षित तकनीकी पर्यवेक्षण नहीं हुआ.
यही नहीं, समय पर मापी नहीं की गयी, कार्यों की समसय प्रविष्टि मापी पुस्तिका में प्रविष्ट नहीं हुई. ऐसे में मजदूरों के भुगतान में विलंब हुआ.
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