अच्छी पहल : पिपरवार में खुदाई के बाद खदानों को भर कर की जा रही है खेती

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पिपरवार से लौट कर मनोज सिंह
पिपरवार की आनंद वाटिका की सराहना सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में की
केंद्र सरकार के साथ-साथ जन दबाव में कोयला खनन इलाकों की व्यवस्था भी बदल रही है. कोयला खनन वाले क्षेत्रों के पर्यावरण को दुरुस्त करने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं. खुदाई के बाद खाली पड़े खदानों को भर कर वहां खेती करायी जा रही है. पार्क बनाये जा रहे हैं.सीसीएस के पिपरवार इलाके में खनन के बाद भरे गये खदान में बनाये गये कायाकल्प उद्यान वाटिका की प्रशंसा भारत सरकार के महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में की है. इसे बेस्ट इनीसिएटिव की श्रेणी में रखा है.
पर्यावरण अधिकारी संजय कुमार ने बताया की सीसीएल के पिपरवार एरिया में दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं. पिपरवार 1130 हेक्टेयर और अशोका 1189 हेक्टेयर में चल रहा है. पिपरवार प्रोजेक्ट में खनन का काम काफी कम हो गया है. अशोका से युद्ध स्तर पर खनन हो रहा है.
दोनों प्रोजेक्ट में करीब 500 हेक्टेयर में वृक्षारोपण का काम किया गया है. अशोका में 233 हेक्टेयर में 6.48 लाख पौधे लगाये गये हैं, जबकि पिपरवार में 272 हेक्टेयर में 6.78 लाख पौधे लगाये गये हैं. क्षेत्र की हरियाली फिर लाने का प्रयास हो रहा है. इसी का एक नमूना आनंद वाटिका है. यहां कई फलदार वृक्ष लगाये गये हैं. करीब 50 एकड़ में यह वाटिका विकसित की जा रही है. 2015 में इस वाटिका का उद्घाटन तत्कालीन कोयला राज्य मंत्री पीयूष गोयल ने किया था.
दिव्यांग को किया जा रहा है ट्रेंड : सीसीएल ने कमांड एरिया में प्रभावित दिव्यांगों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र भी चला रहा है. यहां पिछले दो साल में 11 बच्चों को प्रशिक्षण देकर चलने-फिरने के साथ-साथ अपना काम करने के लायक तैयार किया है. संचालक बताते हैं कि बच्चों को सीसीएल की गाड़ी से गांवों से लाया जाता है. तीन-चार घंटे के प्रशिक्षण के बाद उनको वापस भेज दिया जाता है. कई बच्चे अब अपना काम करने लायक हो गये हैं.
सीएजी ने खदान में बनी उद्यान वाटिका को बेस्ट इनीसिएटिव बताया
अशोका से 13 मिलियन टन कोयले का उत्पादन
अशोका परियोजना में आउटसोर्स के माध्यम से पूरी क्षमता से उत्पादन हो रहा है. यहां 24 घंटे कोयला निकालने का काम हो रहा है. पिपरवार के महाप्रबंधक मनोज अग्रवाल के अनुसार कोयला निकालने के काम में तकनीक का प्रयोग ज्यादा हो रहा है. एक ओर से कोयला निकाला जा रहा है, दूसरी ओर से खुले खदान भरे जा रहे हैं. यहां करीब 13 मिलियन टन कोयला हर साल निकलता है. आनेवाले करीब 15-20 साल का रिजर्व इस खदान में है. यहां कंटीट्यूस माइनर मशीन का प्रयोग हो रहा है, इससे कोयले की कटिंग होती है. वहीं से ढुलाई होकर साइडिंग में जाती है.
सुविधा संपन्न बनाया जा रहा है पुनर्वास एरिया को : जहां खनन हो रहा है , वहां से लोगों का दूसरे स्थानों पर पुनर्वास किया जाता है. सीसीएल अशोका और पिपरवार परियोजना के प्रभावितों को न्यू मंगरदाहा, चरियाटांड़ और कल्याणपुर में बसा रहा है. वहां विस्थापितों को सड़क, बिजली और पानी की सुविधा दी जा रही है. इसके साथ ही जमीन के हिसाब से नकद राशि भी दी जा रही है. दो एकड़ से अधिक जमीन होने की स्थिति में नौकरी भी दी जाती है.
सीसीएल पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण की दिशा मे ठोस कदम उठा रहा है. 2018-19 में अब तक 45 हेक्टेयर भूमि पर एक लाख 12 हजार पौधा लगाये जा चुके हैं. सीसीएल अगले पांच वर्षो में लगभग 300 हेक्टेयर से भी ज्यादा भूमि पर 80 लाख पौधे लगायेगा.
गोपाल सिंह, सीएमडी, सीसीएल.
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