पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा अब बने सूर्यावतार देवदूत, अब करेंगे आध्यात्मिक अध्ययन, जानें पूरी कहानी

Updated at : 31 May 2021 2:03 PM (IST)
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पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा अब बने सूर्यावतार देवदूत, अब करेंगे आध्यात्मिक अध्ययन, जानें पूरी कहानी

भगवान सर्वत्र है. उन्हीं की कृपा से पुनर्जीवित हो पाये हैं. सूर्य सिंह बेसरा अब सृष्टि, प्रकृति और प्रवृत्ति के बीच आध्यात्मिक अध्ययन करेंगे. भगवान की खोज में निकले थे, अब वे विश्वास प्राप्त कर चुके हैं कि भगवान प्रकृति में है. हर प्राणियों में है. बेसरा का मानना है कि भले ही अलग-अलग मजहब की अलग-अलग रास्ते हो, लेकिन यकीन कीजिए कि सबकी मंजिल एक है.

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Jharkhand News, Jamshedpur News जमशेदपुर : पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि रविवार (30 मई) से वह आध्यात्मिक जीवन का आरंभ कर रहे हैं. अब उनका नया नाम सूर्यावतार देवदूत होगा. श्री बेसरा का कहना है कि वे 13 अप्रैल से कोरोना संक्रमित हो गये थे. 22 दिनों में कोरोना से जंग जीत कर नयी जिंदगी हासिल की. उनका कहना है कि वह वर्षों से भगवान की खोज में थे, जिसकी प्राप्ति उन्हें हो गयी.

भगवान सर्वत्र है. उन्हीं की कृपा से पुनर्जीवित हो पाये हैं. सूर्य सिंह बेसरा अब सृष्टि, प्रकृति और प्रवृत्ति के बीच आध्यात्मिक अध्ययन करेंगे. भगवान की खोज में निकले थे, अब वे विश्वास प्राप्त कर चुके हैं कि भगवान प्रकृति में है. हर प्राणियों में है. बेसरा का मानना है कि भले ही अलग-अलग मजहब की अलग-अलग रास्ते हो, लेकिन यकीन कीजिए कि सबकी मंजिल एक है.

यानी सबका मालिक एक है. श्री बेसरा अब बाकी की जिंदगी को आध्यात्म के रास्ते से तय करेंगे. सूर्य सिंह बेसरा अब सूर्यावतार देवदूत बन गये हैं. वे संकल्पित हैं कि वह भगवान का मैसेंजर बनकर मानव को मानवता का पाठ पढ़ायेंगे. साथ ही साथ प्रकृति वादी बनकर बन जंगलों को बचायेंगे, इसके अलावा वे प्राणियों की रक्षा करेंगे, प्रदूषण रहित पर्यावरण को संतुलित करने में अपनी भूमिका निभायेंगे.

झारखंड आंदोलनकारी सह पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा का कहना है कि वे अपनी उम्र के 65 वर्ष पूरा कर चुके हैं. आधी जिंदगी झारखंड अलग राज्य के निर्माण में संघर्षमय जिंदगी बितायी है. उनके नेतृत्व में आजसू के संघर्ष के परिणाम स्वरुप ही झारखंड राज हासिल हुआ. सूर्य सिंह बेसरा ने भालूपत्रा हाई स्कूल से 1976 में मैट्रिक पास करने के बाद पैतृक गांव छामडाघुटू में एक प्राथमिक स्कूल की स्थापना की.

1983 में जब घाटशिला कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की तब मुसाबनी में सिदो कान्हू जनजातीय महाविद्यालय की स्थापना की. जब 1986 में रांची विश्वविद्यालय से संथाली में स्नातकोत्तर पास की तब ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन आजसू की स्थापना की. सिर्फ यही नहीं उन्होंने 1990 में घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए हैं.

17 माह के अंदर झारखंड अलग राज्य के मुद्दे पर जब बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव ने ललकारा कि मेरी लाश पर झारखंड राज्य बनेगा तब श्री बेसरा ने उसकी प्रतिक्रिया और प्रतिवाद स्वरूप बिहार विधानसभा से त्यागपत्र 12 अगस्त 1991 को दिया था. 1991 में उन्होंने झारखंड पीपुल्स पार्टी जेपीपी की स्थापना की.

Posted By : Sameer Oraon

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