घाटशिला: पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला क्षेत्र में इन दिनों पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आ रही है. पूरे इलाके में नल से मटमैले, लाल और कीचड़युक्त पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे हजारों की आबादी बूंद-बूंद शुद्ध पानी के लिए तरस रही है. पीने लायक पानी न होने और गंदे पानी से नहाने के कारण लोगों में खुजली और त्वचा रोग की शिकायतें बढ़ने लगी हैं. इसके बावजूद कोई अन्य विकल्प न होने के कारण लोग मजबूरी में इसी दूषित पानी का इस्तेमाल करने को विवश हैं.
शिक्षक डॉ कमर अली ने दिखाया नजारा
जलापूर्ति की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नवाबकोठी निवासी शिक्षक डॉ कमर अली ने जब रविवार सुबह अपने स्नानघर (बाथरूम) का नल खोला, तो पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी और कीचड़ गिरने लगा. उन्होंने बाल्टी और बोतलों में भरकर आपूर्ति किए जा रहे मटमैले पानी को दिखाते हुए रोष जताया. स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ नवाबकोठी ही नहीं, बल्कि पूरे घाटशिला शहरी और आसपास के इलाकों में यही स्थिति बनी हुई है.
स्वर्णरेखा का पानी बिना ठीक से फिल्टर किए पहुंचाया जा रहा घर-घर
घाटशिला में पेयजल की आपूर्ति स्वर्णरेखा नदी से की जाती है. मानसून के कारण फिलहाल नदी पूरी तरह उफान पर है और उसका जल बेहद मटमैला है. जल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा इस पानी को बिना सही तरीके से साफ (फिल्टर) किए ही सीधे पाइपलाइनों के जरिए घरों में सप्लाई किया जा रहा है. जिन परिवारों के पास समर्सिबल या चापाकल का विकल्प नहीं है और वे पूरी तरह सप्लाई के पानी पर निर्भर हैं, उनके सामने जल संकट खड़ा हो गया है.
पुराना और जर्जर हो चुका है फिल्टर प्लांट
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जलापूर्ति केंद्र का वाटर फिल्टर प्लांट बेहद पुराना और खराब हो चुका है, जिस कारण नदी के गंदे पानी की सही से सफाई नहीं हो पा रही है. यदि फिल्टर बदल दिया जाए या उसकी मरम्मत कराई जाए, तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है. हालांकि, गंभीर स्वास्थ्य संकट की आहट के बावजूद जल स्वच्छता विभाग, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं.
