हजारीबाग में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, कहीं कचरे का ढेर तो कहीं महीनों से उलटा पड़ा डस्टबिन

हजारीबाग शहर के प्रमुख इलाकों में गंदगी और बदइंतजामी से लोग परेशान हैं. नगर निगम की लापरवाही के कारण खुले नाले और कचरे के ढेर से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है.

हजारीबाग : शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावों के बीच कई प्रमुख इलाकों में बदइंतजामी नजर आ रही है. कहीं सड़क किनारे और बीच रास्ते में कचरा पड़ा है, तो कहीं डस्टबिन महीनों से उलटा पड़ा है. सबसे गंभीर स्थिति आनंदा चौक के पास है, जहां नाली की सफाई के लिए हटाया गया स्लैब करीब चार माह बाद भी नहीं लगाया गया है. खुले नाले और सड़क किनारे पसरी गंदगी से लोगों को परेशानी हो रही है और दुर्घटना की आशंका बनी हुई है.

शहर की स्वच्छता केवल योजनाओं और दावों से नहीं, बल्कि नियमित सफाई, निगरानी और खराब व्यवस्था को समय पर दुरुस्त करने से सुनिश्चित हो सकती है. ऐसे में इन स्थानों की स्थिति नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है.

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गोल चौक थोक मंडी के पास सड़क किनारे कचरा

गोल चौक स्थित थोक मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों व्यवसायी और खरीदार पहुंचते हैं. इसके बावजूद सड़क किनारे और बीच रास्ते में कचरा फेंका जा रहा है. कचरे के ढेर के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी होती है. व्यस्त मंडी क्षेत्र होने के बावजूद यहां कचरा उठाव और सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं दिखती.

जैन मंदिर चौक पर महीनों से उलटा पड़ा डस्टबिन

बड़ा बाजार स्थित जैन मंदिर चौक के पास लगाया गया डस्टबिन महीनों से उलटा पड़ा है. इसके कारण स्थानीय लोगों और दुकानदारों को कचरा रखने में परेशानी हो रही है. आसपास के लोग मजबूरी में कचरा इधर-उधर फेंक रहे हैं. लंबे समय से डस्टबिन के नहीं सुधारे जाने से सफाई व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं. सफाई के बाद चार माह से नहीं लगा नाली का स्लैब आनंदा चौक के पास नाली का स्लैब करीब चार माह से खुला पड़ा है.

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बताया गया कि नाली की सफाई के लिए स्लैब हटाया गया था, लेकिन सफाई के बाद उसे दोबारा नहीं लगाया गया. चौक के आसपास आनंदा कॉलेज, नगर भवन और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र, राहगीर और वाहन चालक गुजरते हैं. खुले नाले से किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है. लोगों ने जल्द स्लैब लगाने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है.

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By Sunil prasad

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