हजारीबाग : आइसेक्ट विश्वविद्यालय हजारीबाग के भूगोल विभाग की ओर से शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया. विषय था- ‘भारतीय ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से विकास की पुनर्कल्पना : 2047 तक विकसित भारत के लिए समग्र दृष्टिकोण’.
द्वीप प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया गया
उदघाटन झारखंड प्रौद्योगिकी विवि रांची के कुलपति प्रो धर्मेंद्र कुमार सिंह, आइसेक्ट विवि के कुलपति डॉ गौरव शुक्ला, कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद, समकुलपति डॉ एसआर रथ, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के प्रो डॉ मंजीत सिंह, विभावि के भूगोल विभाग के प्रो डॉ सरोज सिंह, एक्सॉन बॉट के सीइओ डॉ अंकुर शुक्ला, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड रांची के प्रो डॉ शशि सिंह और संयोजक डॉ रंजीत कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
भारतीय ज्ञान परंपरा वर्तमान और भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार है
संयोजक डॉ रंजीत कुमार ने स्वागत भाषण दिया. प्रो धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए स्थानीय ज्ञान, परंपरागत अनुभव और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण में समन्वय जरूरी है. कुलपति डॉ गौरव शुक्ला ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा वर्तमान और भविष्य के विकास का महत्वपूर्ण आधार है.
कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक जीवन से जुड़े व्यापक अनुभव हैं. समकुलपति डॉ एसआर रथ ने इसे आधुनिक विज्ञान-प्रौद्योगिकी से जोड़ने पर जोर दिया. डॉ मंजीत सिंह, डॉ सरोज सिंह, डॉ अंकुर शुक्ला, डॉ शशि सिंह और डॉ अरविंद तिवारी ने भी विचार रखे. संचालन प्रो डॉ बिनोद कुमार ने किया.
ये भी पढ़ें: रामगढ़ में तनिष्क ज्वेलरी शॉप में सावन महोत्सव का आयोजन, गीत-संगीत और नृत्य से सजा कार्यक्रम
