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झारखंड : हे ईश्वर अब तो बरस, गुमला के किसान भगवान से हर दिन कर रहे प्रार्थना, गांव में हो रही पूजा-पाठ

Updated at : 01 Aug 2023 7:22 AM (IST)
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झारखंड : हे ईश्वर अब तो बरस, गुमला के किसान भगवान से हर दिन कर रहे प्रार्थना, गांव में हो रही पूजा-पाठ

गुमला के विभिन्न क्षेत्रों में अच्छी बारिश नहीं होने से खेतों में दरार पड़ने लगी है. वहीं, बिचड‍़ा भी सूखने लगा है. इसको देखते हुए किसान पूजा-पाठ समेत अच्छी बारिश की प्रार्थना कर रहे हैं. स्थिति तो ऐसी आ गयी है कि कुएं और तालाब से खेत तक पानी पहुंचाकर धान की रोपनी कर रहे हैं.

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गुमला, जगरनाथ/जॉली : गुमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खेती के लायक बारिश नहीं होने से किसान चिंता में हैं. सबसे बुरा हाल पहाड़ व जंगलों में बसे गांवों का है. जहां खेत में बिचड़ा तो लग गया है, लेकिन बारिश नहीं होने से बिचड़ा सूखने लगा है. यहां तक कि बिचड़ा लगाये खेत में दरार पड़ने लगी है. अभी भी खेत बेजान व सूखे नजर आ रहे हैं. सबसे बुरा हाल घाघरा प्रखंड के पहाड़ी इलाकों का है.

90 फीसदी किसान बारिस की आस में हैं

घाघरा प्रखंड के तुसगांव के किसान मनमोहन दास, बरतू खड़िया, बजरंग कुमार व संदीप सिंह ने कहा कि कुछ बारिश हुई थी तो खेत की जुताई कर बिचड़ा लगा दिया. बिचड़ा तैयार हुआ तो अब बारिश नहीं हो रही है. जिस कारण तुसगांव सहित आसपास के एक दर्जन गांवों में अबतक धान रोपनी नहीं हुई है. कुछ खेत जहां पानी जमा है. वहां कुछ किसानों ने धान रोपनी की. परंतु, अभी भी 90 प्रतिशत किसान बारिश की आस में है. मानसून की बेरूखी से गरीब किसान काफी परेशान हैं. अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई है. गरीब किसान धान रोपाई नहीं कर पा रहे हैं. सभी किसान अपने अपने खेत तैयार कर लिए हैं. किसान शहर जाकर बीज खरीद कर लाये हैं. सही समय पर अगर बारिश नहीं होती है, तो किसान को काफी नुकसान होगा. जिस किसान के खेत के सामने कुआं व तालाब है. वे किसी तरह पटवन कर रोपाई कर रहे हैं. लेकिन जिनके पास कोई सुविधा नहीं है. उनका तो भगवान ही मालिक है.

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कामडारा : पांच फीसदी भी रोपाई नहीं हुई

कामडारा प्रखंड मुख्यालय समेत आसपास के इलाकों में कृषि योग्य बारिश नहीं होने से किसान परेशान हैं. पानी की कमी के कारण खेतों में लगे बिचड़े सूखने लगे हैं. पांच फीसदी भी रोपाई नहीं हुई है. दुलार नाग व रूपनारायण सिंह ने कहा कि जुलाई महीना समाप्ति की ओर है. इस समय भारी बारिश होनी चाहिए थी. ऐसे में कृषि कार्य जोखिम भरा है. रविशंकर सिंह व ग्रेगोरी तोपनो ने कहा कि डीजल का महंगा होना और प्रति घंटा 700 रुपये की दर से ट्रैक्टर से जुताई का खर्च उठाना होगा. बारिश का नहीं होना चिंता की बात है.

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