गुमला में नक्सलियों के डर से कई युवक कर गये थे पलायन, अब अपने गांव वापस लौट रहे हैं

Updated at : 22 Jul 2021 12:42 PM (IST)
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गुमला में नक्सलियों के डर से कई युवक कर गये थे पलायन, अब अपने गांव वापस लौट रहे हैं

नक्सलियों के डर से गांव के कई युवक दूसरे राज्य पलायन कर गये थे. परंतु हाल के दिनों में नक्सलियों की आवाजाही कम हुई तो पलायन किये युवक अब अपने गांव वापस लौटने लगे हैं. नक्सली के डर से कुछ युवकों ने तो अपनी शादी तक टाल दी थी.

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  • गांव में बिजली पोल व तार लगा, परंतु गांव में बिजली नहीं जली है

  • पीएम आवास नहीं मिला, घर में प्लास्टिक बांध कर रहते हैं ग्रामीण

  • 15 साल पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र बना, बिना उपयोग के खंडहर हो गया

  • एक साल पहले पक्की सड़क बनी थी. परंतु सड़क अब उखड़ने लगी है

गुमला : नक्सलियों के डर से गांव के कई युवक दूसरे राज्य पलायन कर गये थे. परंतु हाल के दिनों में नक्सलियों की आवाजाही कम हुई तो पलायन किये युवक अब अपने गांव वापस लौटने लगे हैं. नक्सली के डर से कुछ युवकों ने तो अपनी शादी तक टाल दी थी. परंतु नक्सली दहशत कम हुआ तो एक युवक मुंबई से अपने गांव लौट आया है और शादी करने जा रहा है. हम बात कर रहे हैं, चैनपुर प्रखंड की बारडीह पंचायत स्थित तबेला गांव की. यह गांव गुमला शहर से करीब 85 किमी दूर है.

एक समय था. इस गांव के स्कूल के बरामदे में नक्सली बैठे रहते थे. रात को भी स्कूल के बरामदे में ही सोते थे. परंतु लगातार पुलिस की दबिश के बाद तबेला गांव में नक्सलियों का आना-जाना बंद हो गया है. 10 साल पहले इस गांव के एक नाबालिग लड़के को नक्सली उठा कर ले गये थे. परंतु उक्त लड़का दस्ते से भाग कर अपने गांव आया और दूसरे राज्य पलायन कर गया था. अब वह लड़का बालिग हो गया है और दूसरे राज्य में ही मजदूरी करता है. ग्रामीण कहते हैं.

तबेला से पंचायत का दर्जा छीन लिया गया

तबेला, लोटाकोना, बरखोर गांव है. कुल 70 घर है. आबादी करीब 500 है. पहले तबेला पंचायत हुआ करता था. परंतु नक्सल इलाका होने व गांव तक जाने के लिए सड़क नहीं होने के कारण तबेला से पंचायत का दर्जा छीनते हुए मौजा बना दिया गया. जबकि बगल गांव बारडीह को पंचायत का दर्जा मिल गया.

यही वजह है. तबेला गांव का विकास रूक गया. गांव में बिजली पोल व तार लगा है. परंतु बिजली नहीं जली है. आज भी लोग ढिबरी युग में जी रहे हैं. किसी को पीएम आवास नहीं मिला है. ग्रामीण बरसात से बचने के लिए कच्ची मिट्टी के घर में प्लास्टिक बांध कर रहते हैं. 15 साल पहले गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र बना था. परंतु बिना उपयोग के खंडहर हो गया. अस्पताल भवन बनाने में 25 लाख खर्च हुआ था. यह पैसा बर्बाद हो गया. गांव तक जाने के लिए एक साल पहले एक किमी पक्की सड़क बनी थी. परंतु सड़क अब उखड़ने लगी है. जबकि गांव के अंदर कहीं पक्की सड़क नहीं है.

Posted By : Sameer Oraon

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