तीन साल पहले पंजाब में बेची गयी आदिवासी महिला वन स्टॉप सेंटर की मदद से पहुंची गोड्डा

Updated at : 26 Apr 2024 12:11 AM (IST)
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तीन साल पहले पंजाब में बेची गयी आदिवासी महिला वन स्टॉप सेंटर की मदद से पहुंची गोड्डा

काम का लालच देकर महिला को पंजाब ले गये थे दलाल

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गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी के एक सुदुर गांव काल्हाजोर की महिला वाहा फूलमनी मूर्मू आखिरकार गुरुवार को हरियाणा से गोड्डा पहुंच गयी. गोड्डा में वन स्टॉप सेंटर की मदद से महिला को सकुशल सुंदरपहाड़ी लाया गया. महिला को तकरीबन तीन साल पहले काम का लालच देकर दलाल द्वारा पंजाब के हरियाणा में बेच दिया गया था. तकरीबन दो साल तक पंजाब में शोषित होने के बाद वहां से किसी प्रकार भागकर महिला हरियाणा पहुंच गयी. हरियाणा पुलिस ने महिला को बदहाल अवस्था में देखकर नारी निकेतन में भर्ती कराया. पहले तो आदिवासी महिला का नारी निकेतन में तकरीबन 6 माह तक इलाज किया गया. उस दौरान महिला कुछ भी बता पाने में असमर्थ थी. महिला मानसिक व शारीरिक रूप से काफी प्रताड़ित की गयी थी. वह काफी भयभीत भी थी. इलाज के क्रम में महिला ने घर आदि की जानकारी वहां के कर्मियों को दी. इसके बाद वहां के प्रशासन द्वारा गोड्डा जिला प्रशासन से संपर्क साधकर पूरे मामले की जानकारी ली गयी. वन स्टॉप सेंटर द्वारा सुंदरपहाड़ी के काल्हाजोर पहुंचकर महिला की पहचान परिजनों से करायी गयी. तब वहां से महिला को करनाल प्रशासन की मदद से गोड्डा लाया गया. इस दौरान वन स्टॉप सेंटर गोड्डा की केंद्र की प्रशासक रंजीता देवी, परामर्शदाता विकास चंद्र, सुंदरपहाड़ी थाना के सब इंस्पेक्टर सायबा मुर्मू एवं पुलिस टीम, पंचायत सचिव विष्णुकांत पंजियारा, सेविका सलोमी मुर्मू, ग्राम प्रधान एवं महिला होमगार्ड कल्पना रानी एवं अन्य ग्रामीण के समक्ष सुपुर्द किया गया. ………………………………… सुंदरपहाड़ी, बोआरीजोर व राजाभिट्ठा में ह्यूमन ट्रैफिकिंग गिरोह सक्रिय जिले के सुंदरपहाड़ी, बोआरीजोर, राजाभिट्ठा आदिवासी-पहाड़िया बहुल इलाके में ह्यूमन ट्रैफिकिंग गिरोह सक्रिय है. गांव में दलाल व एजेंट काम करते हैं. यहां की भोली-भाली आदिवासी लड़कियों व महिलाओं को काम के लालच में ले जाते हैं. पहले तो वहां उसका दैहिक शोषण होता है, फिर बाद में किसी के यहां काम के लिए बेच दिया जाता है. वहां दैहिक व मानसिक शोषण होता है. तीन-चार साल पहले राजाभिट्ठा की ही एक पहाड़िया लड़की को एजेंट द्वारा जीभ तक काट लिया गया था. सदर अस्पताल गोड्डा में इलाज के दौरान जान चली गयी थी. गरीबी व फटेहाली के चंगुल से बचने व शहर की चकाचौंध से प्रभावित होकर आदिवासी पहाड़िया परिवार के बच्चे यहां से चले तो जरूर जाते हैं, लेकिन बाद में उनकी जिंदगी नरकीय हो जाती है. पिछले कुछ साल में गोड्डा पुलिस द्वारा इस मामले को चुनौती के तौर पर लिया गया है. हरियाणा के ही एजेंट को पकड़कर गोड्डा जेल भेजा गया था. हरियाणा पुलिस द्वारा पहले एजेंट को पकड़ा गया था, जिसमें गोड्डा पुलिस ने भी रिमांड पर लिया था. यहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकने के लिए आहतू थाना बनाया गया है. ज्यादातर गांव की बालाएं जागरूकता के अभाव में एजेंट अथवा दलाल के चक्कर में पड़ जाती है, जिससे बचने की आवश्यकता है.

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