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नक्सलियों से अंतिम लड़ाई लड़ रही है गढ़वा जिला पुलिस, बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में सिमट कर रह गये हैं

गढ़वा जिले में पुलिस, नक्सलियों के साथ अंतिम व निर्णायक लड़ाई लड़ रही है़. कभी जिले के करीब 800 गावों में अपना असर रखनेवाले व हथियारबंद दस्ता के साथ सक्रिय नक्सली अब सिर्फ बड़गड़ प्रखंड के बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र तक सीमित हो गये है़ं

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
नक्सलियों से अंतिम लड़ाई लड़ रही है गढ़वा जिला पुलिस
नक्सलियों से अंतिम लड़ाई लड़ रही है गढ़वा जिला पुलिस
file, सांकेतिक तस्वीर

गढ़वा : गढ़वा जिले में पुलिस, नक्सलियों के साथ अंतिम व निर्णायक लड़ाई लड़ रही है़. कभी जिले के करीब 800 गावों में अपना असर रखनेवाले व हथियारबंद दस्ता के साथ सक्रिय नक्सली अब सिर्फ बड़गड़ प्रखंड के बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र तक सीमित हो गये है़ं उल्लेखनीय है कि नक्सलवाद के मुद्दे पर गृह मंत्रालय भारत सरकार के साथ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हुई बैठक में जो जानकारी दी गयी है, उसमें गढ़वा जिले के बूढ़ा पहाड़ में नक्सल अभियान अभी जारी रखने की बात कही गयी है़

भौगोलिक दृष्टि से दुरूह इलाके की वजह से बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र पुलिस के लिये चुनौती बना हुआ है़ इसका एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में है़ इसके अलावे झारखंड राज्य के लातेहार जिले व गढ़वा जिले में भी इसकी सीमा मिलती है. दरअसल बूढ़ा नामक गांव जिसके नाम पर बूढ़ा पहाड़ है, वह गांव गढ़वा जिले की सीमा के अंदर है़ लेकिन आने-जाने के लिए नक्सली गढ़वा के बजाय लातेहार जिले के क्षेत्र का इस्तेमाल करते है़ं उसी तरफ से नक्सली पुलिस की नजरें बचाकर दूसरे क्षेत्रों में घटनाओं को अंजाम देने के लिए आते-जाते रहे है़ं

घने जंगल व दुरूह क्षेत्र की वजह से इस पहाड़ की चोटी तक पहुंचना हमेशा से पुलिस के लिये चुनौती भरा रहा है़ पुलिस चोटी तक भले नहीं पहुंच सकी हो, लेकिन इसके काफी करीब तक जरूर पहुंच चुकी है़ हाल के कुछ वर्षो में भंडरिया व बड़गड़ क्षेत्र के घने व दुरूह क्षेत्रों में तेजी से सड़कों का निर्माण किया गया है़ इसका लाभ यह हुआ कि बूढ़ा पहाड़ तक जानेवाले रास्ते में सीआरपीएफ व आइआरबी के 10 कैंप व पिकेट स्थापित कर दिये गये़

क्या हो रही है समस्याएं

नक्सलियों के विरुद्ध लड़ाई में पुलिस के समक्ष मुख्य रूप से सड़क, बिजली व मोबाइल नेटवर्क की समस्या आड़े आ रही है़ शुरू में यहां मोबाइल टावर लगाने का नक्सलियों ने विरोध किया था़ साथ ही कुछ क्षेत्रों में सड़क न होने से भी मोबाइल टावर नहीं लगाया जा सका है़ इसी तरह ज्यादातर गांवों में बिजली भी नहीं पहुंच सकी है़ पुलिस को पिकेट व कैंप में रोशनी के लिए रातभर जेनरेटर चलाना पड़ता है़

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