आनंदलोक अस्पताल खाली होने पर सस्पेंस कायम

Updated at : 29 Jun 2017 6:00 AM (IST)
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आनंदलोक अस्पताल खाली होने पर सस्पेंस कायम

अस्पताल के एक भाग पर लखन व सुखी मांडी का कब्जा अब भी बरकरार हर किसी की जुबां पर एक ही चर्चा है कि सांसद चाहेंगे तो लखन मांडी और सुखी मांडी अस्पताल खाली कर देंगे कब्जा करने के आरोपी लखन मांडी ने भी अपने बयान में स्पष्ट किया है कि सांसद के भरोसे पर […]

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अस्पताल के एक भाग पर लखन व सुखी मांडी का कब्जा अब भी बरकरार

हर किसी की जुबां पर एक ही चर्चा है कि सांसद चाहेंगे तो लखन मांडी और सुखी मांडी अस्पताल खाली कर देंगे
कब्जा करने के आरोपी लखन मांडी ने भी अपने बयान में स्पष्ट किया है कि सांसद के भरोसे पर खाली कर देंगे आनंदलोक
चाकुलिया : चाकुलिया में वर्षों से बंद पड़े मातृ सेवा सदन में बहुप्रतीक्षित आनंदलोक अस्पताल का खुलना तय है. अस्पताल को चालू करने के लिए 25 जून से सात दिवसीय पूजन कार्यक्रम शुरू है. यहां की जनता ने उनमुक्त कंठ से अस्पताल खोलने की सहमति दे दी है. आनंदलोक के चेयरमैन देव कुमार सर्राफ ने भी साफ कर दिया है कि अस्पताल को चालू कर यहां सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देंगे. बावजूद अस्पताल का एक भाग लखन मांडी और सुखी मांडी के कब्जे में है और अस्पताल चालू करने के लिए कब्जे से मुक्त होना जरूरी है. इसके लिए सभी स्तर से हर संभव प्रयास जारी है. अस्पताल के खाली होने पर सस्पेंस आज भी बरकरार है.
ऐसे में यहां की जनता की निगाहें सांसद विद्युत वरण महतो पर टिकी हैं. हर किसी की जुबां पर एक ही चर्चा है कि सांसद ही अस्पताल को कब्जे से मुक्त होने का मार्ग खोल सकते हैं. आनंदलोक अस्पताल को चालू कराने के लिए भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी ने एक कदम बढ़ाया. आनंदलोक के चेयरमैन डीके सर्राफ और यहां के ग्रामीणों के साथ पांच जून को बैठक की. बैठक में तय हुआ कि आनंदलोक खुलेगा. लेकिन इसके मार्ग में लखन मांडी और सुखी मांडी द्वारा अस्पताल के भाग पर कब्जा कर रखने की बात अड़चन बनी. प्रशासन ने अस्पताल खाली करने के लिए लखन मरांडी को नोटिस भेजा, तो लखन मांडी ने वकील के माध्यम से प्रशासन को नोटिस भेज कर कोर्ट में मामला विचाराधीन होने का हवाला दिया. इससे प्रशासन बैकफुट पर आ गया. लखन मांडी और सुखी मांडी मामले को मांझी परगना महाल में ले गये. महाल ने कहा कि महाल अस्पताल के विरोध में नहीं है. लेकिन लखन मांडी को सम्मान के साथ अस्पताल खाली कराया जाये. इधर, 21 जून को सांसद विद्युत वरण महतो ने अग्रसेन भवन में बैठक की. सांसद ने लखन मांडी को अस्पताल खाली करने के एवज में उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया. इसके बाद लखन मांडी ने भी बयान जारी कर कहा कि सांसद की पहल पर वे अस्पताल खाली कर देंगे. सांसद ने कहा कि सामाजिक स्तर पर लखन मांडी से अस्पताल को खाली कराया जायेगा. बावजूद, आज तक लखन मांडी और सुखी मांडी ने अस्पताल को खाली नहीं किया है. और अस्पताल के खाली होने पर सस्पेंस बरकार है. लिहाजा अस्पताल को कब्जे से मुक्त कराना सांसद की अग्नि परीक्षा साबित होगी.
चाकुलिया के लिए आनंदलोक बेहद ही जरूरी है. यहां की जनता का यह सपना अवश्य ही साकार होगा. गरीबों के लिए आनंदलोक संजीवनी साबित होगी. शीघ्र ही आनंदलोक की तमाम अड़चनों को दूर कर अस्पताल चालू होने का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा
विद्युत वरण महतो, सांसद.
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