कभी बेचती थी शराब, अब चला रही फुटवेयर इंडस्ट्री

Updated at : 01 May 2018 4:18 AM (IST)
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कभी बेचती थी शराब, अब चला रही फुटवेयर इंडस्ट्री

कॉमन फेसिलिटी सेंटर की होगी स्थापना दुमका : जो आदिवासी महिलाएं पहले घरों में देसी हड़िया-पाउच बना कर हाट-बाजारों में उसे परोसने-बेचने का काम करती थी, वे आज अपने गांव को फुटवेयर इंडस्ट्री के रूप में स्थापित कराने में जी-जान से जुटी हैं. हालांकि यह अभियान अभी मुकाम तक नहीं पहुंचा है. लेकिन जिस तरीके […]

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कॉमन फेसिलिटी सेंटर की होगी स्थापना

दुमका : जो आदिवासी महिलाएं पहले घरों में देसी हड़िया-पाउच बना कर हाट-बाजारों में उसे परोसने-बेचने का काम करती थी, वे आज अपने गांव को फुटवेयर इंडस्ट्री के रूप में स्थापित कराने में जी-जान से जुटी हैं. हालांकि यह अभियान अभी मुकाम तक नहीं पहुंचा है. लेकिन जिस तरीके का बदलाव गांव में नजर आ रहा है, वह अप्रत्याशित है.
दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड स्थित मुड़ायाम पंचायत के बाजीजोर गांव में यह बदलाव देखने को मिल रहा है. यहां दो दर्जन से अधिक महिलाएं चप्पल बनाने के काम में जुटी हैं. पूरी पंचायत की 1000 महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्रशिक्षण के बाद वे जूते बनाने का काम बड़े पैमाने पर कर पायेंगी. देश में मुड़ायाम ऐसी पहली पंचायत होगी, जो फुटवियर पंचायत के नाम से जानी जायेगी.
बाली फुटवेयर है नाम : बालीजोर गांव से पूरी मुड़ायाम पंचायत में बदलाव की बयार लाने की तैयार जिस चप्पल उद्योग से हुई, उसके ब्रांड का नाम गांव से ही जोड़ कर रखा गया, नाम दिया गया-बाली फुटवेयर.
कभी बनाती-बेचती थी…
गौर करने की बात है कि शुरुआती चरण में ही जिले के आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं के लिए चप्पल बनाने का आॅर्डर भी प्राप्त हो गया है. पहले बड़े आॅर्डर के रूप में करीब चार हजार चप्पल बनाने का आदेश पाकर महिलाओं में जबरदस्त उत्साह है. बालीजोर की महिलाओं की अगुवा बनी सारा हांसदा को भी प्रशासन ने रोल मॉडल बनाया कि किस तरह एक महिला चाह ले, तो बदलाव का माध्यम बन सकती है. स्माइलिंग सारा के तहत प्रशासन हड़िया-पाउच बेचनेवाली महिलाओं को अन्य रोजगार जैसे अगरबत्ती निर्माण, तसर कीटपालन, बैम्बू क्राफ्ट आदि से भी जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है.
आजीविका मिशन और इंसाफ दे रही ट्रेनिंग : बाली फुटवेयर से जुड़ी महिलाओं को शराब के धंधे से बाहर निकालने, उन्हें प्रेरित करने, दक्ष बनाने और आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आजीविका मिशन ट्रेनिंग दे रही है. ट्रेनिंग पार्टनर के रूप में इसाफ नामक संस्था अहम भूमिका निभा रही है. इसाफ के एसोसिएट डायरेक्टर अजीत सेन के मुताबिक, 4000 हवाई चप्पल का पहला बड़ा आॅर्डर मिला है, जिससे महिलाओं में उत्साह है. चप्पलें तैयार हो चुकी हैं, अब आपूर्ति की दिशा में महिलाएं कदम बढ़ा रही हैं. अन्य जिलों से भी चप्पल के आॅर्डर मिलने की संभावना है. जूते का कारोबार शुरू कराने के लिए सरकार ने यहां कॉमन फेसिलिटी सेंटर उपलब्ध कराने की घोषणा की है.
डीसी मुकेश कुमार ने लिया है इस गांव को गोद
बालीजोर गांव को दुमका के डीसी मुकेश कुमार ने गोद लिया है. गांव को विकसित करने, महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उन्होंने स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, शौचालय, स्वच्छता आदि को लेकर भी चंद महीनों में बहुत काम कराया है. यही वजह है कि 25 जनवरी को मुख्यमंत्री रघुवर दास भी इस गांव में गये थे. उन्होंने बालीजोर गांव में बनी चप्पल भी खरीदी थी. मुख्यमंत्री ने डीसी मुकेश कुमार की पहल को सराहा और दूसरे पदाधिकारियों को भी इसका अनुकरण करने को कहा. बहरहाल जिले के 10 अन्य गांव भी इसी तर्ज पर गोद लिए गये हैं.
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