करोड़ो के प्रेरणापुंज हैं डॅा कलाम

Updated at : 15 Oct 2017 10:09 AM (IST)
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करोड़ो के प्रेरणापुंज हैं डॅा कलाम

डॉ माया कुमार कराेड़ाें भारतीयाें के दिलाें में बसनेवाले पूर्व राष्ट्रपति डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम के संघर्षमय जीवन, अनमाेल कृतित्व, प्रेरणा और सद्‌गुणाें से भरे विचार और अनेक उपलब्धियाें से अलंकृत बेदाग छवि का निर्विवाद व्यक्तित्व हम सबाें के लिए अनुकरणीय है. उनका जीवन सभी दृष्टिकाेण से अनुपम है. वे असाधारण शख्सियत वाले एेसे साधारण […]

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डॉ माया कुमार
कराेड़ाें भारतीयाें के दिलाें में बसनेवाले पूर्व राष्ट्रपति डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम के संघर्षमय जीवन, अनमाेल कृतित्व, प्रेरणा और सद्‌गुणाें से भरे विचार और अनेक उपलब्धियाें से अलंकृत बेदाग छवि का निर्विवाद व्यक्तित्व हम सबाें के लिए अनुकरणीय है.
उनका जीवन सभी दृष्टिकाेण से अनुपम है. वे असाधारण शख्सियत वाले एेसे साधारण व्यक्ति थे, जिन्हाेंने प्रत्येक पद पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. डाॅ अब्दुल का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम था. पहला नाम अबुल उनके परदादा का नाम था. पाकिर उनके दादा का तथा जैनुलब्दीन उनके पिता का नाम था. उनके नाम में उनकी तीनाें पीढ़ियां के नाम थे. शायद इसलिए उनकाे सबका आशीर्वाद प्राप्त था. इनके पिता अल्प शिक्षित और एक साधारण नाविक थे. माता एक गृहिणी और धार्मिक महिला थीं. वे दाेनाें बहुत ही संस्काराें एवं मानवीय मूल्याें के हितैषी थे.
उनकी बाल्यावस्था संघर्षाें से तपी थी. परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयाेग करने हेतु बचपन में उन्हाेंने अखबार बेचने का काम भी किया. कलाम की स्कूली शिक्षा रामेश्वरम में हुई. बचपन में वे औसत, मगर मेहनती छात्र थे. गणित में उनकी विशेष रुचि थी
उनके माता-पिता के आदर्शाें एवं संस्काराें का प्रभाव उनके जीवन में ताउम्र रहा. उनके माता-पिता एक धार्मिक इंसान थे, जिनका मानना था कि आध्यात्मिक ज्ञान ही हमारी शक्ति है और यही हमें ऊंचाइयाें पर ले जाता है. यही कारण है कि कलाम काे भी दैवी शक्ति पर अटूट भराेसा था. बचपन से ही उन्हें सर्व-धर्म सम‍भाव की प्रेरणा घर और रामेश्वरम्‌ के आध्यात्मिक वातावरण से मिली. उनका बचपन यद्यपि गरीबी में बीता, किंतु उन्हें एक अच्छा परिवेश और संस्कारपूर्ण वातावरण मिला, जिसकी छाप उनके जीवन में परिलक्षित हाेती है.
रामेश्वरम के अति साधारण परिवार का एक बालक जाे अखबार बेचकर परिवार की मदद करता था, उसका एक दिन राष्ट्र के सर्वाेच्च पद ‘राष्ट्रपति’ का ताज पहनना किसी चमत्कार से कम नहीं था. डाॅ कलाम 25 जुलाई 2002 काे भारत के ग्यारहवें ‘राष्ट्रपति’ बने. ‘राष्ट्रपति’ काल में वे जिस तरह भारत के बच्चाें एवं युवाओं काे प्रेरित करते रहे, वह बेमिसाल है.
उच्च संवैधानिक मूल्याें एवं आदर्शाें से डाॅ कलाम ने ‘राष्ट्रपति’ पद की गरिमा काे और अधिक बढ़ाया. नि: संदेह वे आजतक के सबसे लाेकप्रिय और गतिशील राष्ट्रपति रहे.
उनके जन्मदिवस 15 अक्तूबर पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि उनके अधूरे सपनाें काे पूरा करके ही दी जा सकती है. धन्य है भारत-भूमि, धन्य हैं कलाम के माता-पिता, जिन्हाेंने इस सपूत काे जन्म दिया. उन्हें काेटिश: प्रणाम और कलाम, तुझे सलाम!
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