अवैध उत्खनन ने पूरे कतरास-बाघमारा कोयलांचल को खोखला कर डेंजर जोन में लाकर खड़ा कर दिया है. भू-धंसान की लगातार हो रही घटना इसी अवैध खनन का परिणाम है. एक तरफ जनजीवन लगातार असुरक्षित होता जा रहा है, दूसरी तरफ अब इसमें सियासत की इंट्री हो गयी है.
नेताओं-मंत्रियों का आगमन शुरुआती दौर में उम्मीद जगानेवाला था, पर समय के साथ सारे वादों-दावों के झुनझुना बनने के साथ इसका भी रंग उतरने लगा. इससे प्रभावित आबादी चौतरफा पिस रही है.
लगातार हो रहे हादसों से संभल नहीं पा रहा कोयलांचल
दरअसल, 31 मार्च को टंडाबारी में साल की पहली भू-धंसान की घटना हुई, जिसमें मलबे में डूबकर तीन लोगों की जान चली गयी. इसके बाद वहीं 23 अप्रैल की आधी रात को फिर हुई भू-धंसान के घटना में 20-25 घर 20 फीट गहरी खाई में समा गयी. इस भयंकर हादसे के बाद टंडाबाड़ी बस्ती को बीसीसीएल प्रबंधन ने खाली करा दिया.
इन हादसों से इलाका ठीक से उबरा भी नहीं था कि इधर, अगस्त में लगातार हादसा होने लगे. चार अगस्त को कतरास स्थित सेलेक्टेड गोविंदपुर में भी भू-धंसान हो गया. इसमें आधा दर्जन घर जमींदोज हो गये. इसके कुछ ही दिन बाद सात अगस्त को छाताबाद की घटना ने पूरे कतरास कोयलांचल को हिला दिया. छाताबाद मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और अधिकांश लोग रोज कमाने-खाने वाले हैं.
पलायन, असुरक्षा और रोजगार के सन्नाटे के बीच नेता बजा रहे झुनझुना
बस्ती से करीब 100 परिवार पलायन कर गये. भू-धंसान के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है. इसके कारण आउटसोर्सिंग का काम ठप है. बीसीसीएल को प्रतिदिन लाखों का नुकसान हो रहा है. इधर, घटना में बड़े नेताओं की इंट्री हो गयी है.
धनबाद सांसद ढुलू महतो, मेयर संजीव सिंह, पूर्व विधायक जलेश्वर महतो, पूर्व बियाडा अध्यक्ष विजय झा, झारखंड सरकार के मुख्य सचेतक मथुरा प्रसाद महतो, मंत्री डॉ इरफान अंसारी, मंत्री हफीजुल हसन, कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया. सभी ने मुआवजा व न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया. दूसरी ओर कंपनी ने नो वर्क, नो पे का नोटिस चिपका दिया है. इससे 300 मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है.
अभी कई कदम चलने हैं
रेस्क्यू टीम से वार्ता करने के बाद प्रबंधन ने घटनास्थल के पास हैवी मशीन लगाकर रास्ता बनाने का काम शुरू कर दिया है. मशीनों से फुटबॉल मैदान के पास बने मुहानों तक जाने वाले रास्ते को साफ किया गया. घटनास्थल के पास गोविंदपुर क्षेत्र का विभागीय पैच भी संचालित है. रास्ता तैयार होने के बाद रेस्क्यू टीम अंदर जाकर जमींदोज हुए सामानों को बाहर निकालेगी और अंदर की स्थिति का जायजा लेगी.
वहीं, तकनीकी टीम पता लगायेगी कि अवैध खनन कितनी दूर तक हुआ है और कहां-कहां पिलर काटे गये हैं. साथ ही भूमिगत क्षेत्र में खतरे की स्थिति का आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर क्षेत्रीय प्रबंधन को सौंपेगी. इसके बाद प्रबंधन ग्रामीणों को वस्तुस्थिति से अवगत करायेगा.
मुस्तैदी में कमी नहीं : प्रबंधन
प्रबंधन का कहना है कि घटनास्थल का इलाका बेहद खतरनाक है. सेटेलाइट वीडियो में भी जमीन के नीचे पिलर काटे जाने और सतह के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की स्थिति सामने आयी है. रास्ता बनाने के दौरान अवैध मुहानों के पास काली माता की तस्वीर, बीड़ी-सिगरेट और शराब की बोतलें समेत कई सामान भी मिले.
इधर, क्षेत्रीय प्रबंधन जमीन और आसपास के मकानों का सर्वे भी लगातार करा रहा है. मौके पर प्रबंधीय अधिकारी एजीएम डीके सिंह, क्षेत्रीय सुरक्षा पदाधिकारी नारायण प्रसाद, मैनेजर अमित कुमार, पार्षद मो. शहाबुद्दीन समेत दर्जनों लोग मुस्तैद हैं.
पीड़ितों के लिए चल रहे राहत शिविर : एजीएम
एजीएम डीके सिंह ने बताया कि घटनास्थल के पास रास्ता बनाया गया है. एक टीम जमींदोज हुए सामानों की रिकवरी करेगी, जबकि दूसरी टीम इलाके की सुरक्षा का अध्ययन करेगी. सर्वे कार्य भी जारी है. कंपनी की ओर से पीड़ित परिवारों के लिए राहत शिविर भी चलाया जा रहा है.
गोंविंदपुर में बस्ती खाली करने का चिपका नोटिस
इधर, न्यू आकाश किनारी कोलियरी अंतर्गत आकाश किनारी कांटा स्थित जरलाही बस्ती को खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया है. बीसीसीएल गोंविंदपुर एरिया प्रबंधन ने बस्ती को डेंजर जोन घोषित करते हुए बस्ती में नोटिस चिपका कर लोगों से इलाका खाली करने को कहा है. प्रबंधन ने साफ लिखा है कि बस्ती में रहना खतरनाक है. यहां कभी भी भू-धंसान की घटना हो सकती है. इस नोटिस से ग्रामीणों में खलबली मच गयी है.
