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Jharkhand Cyber Crime : बैंक अधिकारी बनकर कस्टमर को केवाईसी अपडेट का देते थे झांसा, चुटकी में अकाउंट ऐसे खाली कर देते थे साइबर अपराधी, चार गिरफ्तार

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand Cyber Crime :  गिरफ्तार साइबर अपराधियों के बारे में जानकारी देते पुलिस अधिकारी
Jharkhand Cyber Crime : गिरफ्तार साइबर अपराधियों के बारे में जानकारी देते पुलिस अधिकारी
प्रभात खबर

Jharkhand Cyber Crime, Deoghar News, देवघर न्यूज (आशीष कुंदन) : झारखंड के देवघर जिले के एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा के निर्देश पर साइबर थाने की पुलिस ने सारठ थाना क्षेत्र के चरकमारा व पथरड्डा ओपी क्षेत्र के दुधवाजोरी गांव में छापामारी की. इस दौरान आइसीआइसीआइ बैंक ग्राहकों से धोखाधड़ी मामले के आरोपित चरकमारा गांव निवासी पवन कुमार दास समेत चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. इनलोगों के पास से छापामारी टीम ने चार मोबाइल व छह सिमकार्ड बरामद किया.

देवघर से गिरफ्तार साइबर आरोपितों में पवन के अलावा चरकमारा निवासी अभिजीत दास, संतोष दास व दुधवाजोरी गांव निवासी टिकैत महरा शामिल हैं. साइबर थाने में आयोजित पत्रकार वार्ता में साइबर डीएसपी नेहा बाला व मुख्यालय डीएसपी मंगल सिंह जामुदा ने संयुक्त रुप से मामले की जानकारी देते हुए कहा कि गिरफ्तार पवन का आपराधिक इतिहास रहा है.

आइसीआइसीआइ बैंक के कई ग्राहकों के एकाउंट से वर्ष 2020 में हुई लाखों की ठगी कांड में वह आरोपित है. गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध साइबर थाने में प्राथिमिकी दर्ज की गयी है और इन्हें जेल भेज दिया गया. मौके पर साइबर थाने की इंस्पेक्टर संगीता कुमारी, थाना प्रभारी कलीम अंसारी व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे.

साइबर आरोपित अलग-अलग तरीके से झांसे देकर लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा ले रहे थे. पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि विभिन्न बैंकों के अधिकारी बनकर लोगों को कॉल कर वे लोग ठगी करते थे. केवाईसी अपडेट का झांसा देकर बैंक की सारी जानकारी हासिल कर लोगों के खाते में रखे रकम को मिनटों में खाली कर देते थे. फोन-पे, पेटीएम मनी रिक्वेस्ट भेजकर झांसे से ओटीपी लेने के बाद ठगी करते थे. इतना ही नहीं ये लोग गूगल सर्च इंजन पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक एप के साइट पर जाकर उसमें भी अपना मोबाइल नंबर को ग्राहक अधिकारी के नंबर की जगह डाल देते थे.

जब कोई ग्राहक उस नंबर को ग्राहक सेवा अधिकारी का नंबर समझ कर डायल करते था, तब झांसे में आकर सभी जानकारी आधार नंबर आदि साझा कर देता था. इसके बाद उन नंबरों के लिंक खाते को वे लोग मिनटों में साफ कर देते थे. टीम व्यूवर, क्विक सपोर्ट जैसे रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल कराकर गूगल पर मोबाइल का पहला चार डिजिट नंबर सर्च करते हैं और खुद से छह डिजिट जोड़कर रेंडमली साइबर ठगी करते हैं. यूपीआइ वॉलेट से ठगी किये ग्राहकों को पुन: एकाउंट में रिफंड का झांसा देकर पीड़ित के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर में कुछ जोड़कर वर्चुअल फर्जी एकाउंट बनाने के बाद यूपीआइ पिन लॉगिन कराकर भी ठगी कर रहे हैं.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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