लावालौंग (चतरा). टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का शव सोमवार सुबह करीब छह बजे लावालौंग के लुटू गांव पहुंचा. शव देखते ही परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे. वहां मौजूद कई लोगों की आंखों में भी आंसू आ गए. ब्रजेश गंझू का शव लेने उनके छोटे भाई सुरेश और भगिना वाराणसी के रामपुर गए थे. पुलिस ने सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव उनके भाई को सौंप दिया. इसके बाद शव को लेकर वे लुटू गांव पहुंचे.
ब्रजेश की मौत पुलिस एनकाउंटर में नहीं
ब्रजेश के गांव पहुंचने की खबर मिलते ही आसपास के कई गांवों से लोग भी वहां पहुंच गए. ब्रजेश के बड़े भाई और पूर्व विधायक गणेश गंझू भी शव देखकर भावुक हो गए और रो पड़े. उन्होंने कहा कि वह घटना की जांच की मांग करेंगे. उनका आरोप है कि ब्रजेश की मौत पुलिस एनकाउंटर में नहीं हुई, बल्कि उसे पकड़ने के बाद मारा गया.
अंतिम संस्कार के लिए बनारस ले जाने का दबाव देने का आरोप
गणेश गंझू ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी ब्रजेश का अंतिम संस्कार गांव में करने के बजाय बनारस में ही करने का दबाव बना रहे थे. उन्होंने कहा कि परिवार की बुजुर्ग मां समेत कई लोग ब्रजेश को आखिरी बार देखना चाहते थे. इसलिए शव को गांव लाया गया. शव घर पहुंचने के बाद ब्रजेश की मां, पत्नी, बहन, भाभी और छोटे-छोटे बच्चे रोते-बिलखते रहे. घर के बाहर लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई थी.
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ग्रामीणों के बीच ब्रजेश को लेकर अलग-अलग बातें
शव पहुंचने के बाद आसपास के लोग आपस में ब्रजेश को लेकर चर्चा करते दिखे. कुछ लोगों का कहना था कि भले ही ब्रजेश पर बड़े उग्रवादी होने के आरोप थे, लेकिन लावालौंग में वह सामान्य व्यक्ति की तरह रहता था और स्थानीय लोगों की मदद करता था. परिजनों और ग्रामीणों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मामले में पुलिस का पक्ष और आगे की जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.
