M-16 से लेकर 30 लाख के इनाम तक, ब्रजेश गंझू और आक्रमण पर कार्रवाई से TSPC पर बढ़ता गया दबाव

चतरा में लंबे समय से सक्रिय टीएसपीसी संगठन पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हो गई है. सुप्रीमो ब्रजेश गंझू के मारे जाने और शीर्ष कैडरों की गिरफ्तारी से संगठन कमजोर पड़ा है. विदेशी हथियारों की बरामदगी भी चिंता का विषय है.

चतरा. चतरा जिले में लंबे समय तक भाकपा माओवादी और टीएसपीसी के बीच वर्चस्व को लेकर संघर्ष की स्थिति रही है. माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद टीएसपीसी ने कई इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ायी. समय-समय पर घटनाओं के जरिए संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहा. हालांकि, पुलिस और सीआरपीएफ के लगातार संयुक्त अभियानों के बाद संगठन पर दबाव बढ़ता गया.

कई वरीय उग्रवादियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण के बाद टीएसपीसी का नेटवर्क धीरे-धीरे कमजोर हुआ. अब टीएसपीसी सुप्रीमो सरदार उर्फ ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोगता के मारे जाने से संगठन को एक और झटका लगा है. इससे पहले संगठन के सेकेंड इन कमांड माने जाने वाले आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी भी शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी कार्रवाई रही थी.

आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी से लगा था बड़ा झटका

फरवरी 2025 में हंटरगंज थाना क्षेत्र के पतसुगिया पुल के पास कार्रवाई के दौरान आक्रमण गंझू उर्फ रवींद्र गंझू उर्फ नेताजी को गिरफ्तार किया गया था. उसके सिर पर कुल 18 लाख रुपये का इनाम घोषित होने की जानकारी पुलिस ने दी थी. इसमें 15 लाख रुपये राज्य पुलिस और तीन लाख रुपये एनआइए की ओर से थे.

पुलिस के अनुसार, आक्रमण के खिलाफ चतरा, पलामू, लातेहार और हजारीबाग समेत कई जिलों में मामले दर्ज थे. गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से एम-16 ए-1 राइफल, एसएलआर, पिस्टल और अन्य हथियारों के साथ बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किये गये थे. जुलाई 2026 में भी चतरा पुलिस ने टीएसपीसी से जुड़े नरेश गंझू की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी.

कई वरीय कैडर पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार

टीएसपीसी के खिलाफ लगातार कार्रवाई में कई वरीय कैडर पुलिस के हत्थे चढ़े. कोहराम और भीखन समेत कई प्रमुख नाम गिरफ्तार किये गये. वहीं मुकेश गंझू ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. अलग-अलग मुठभेड़ों में भी संगठन के सदस्यों के मारे जाने की जानकारी सामने आती रही है.

लगातार गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से संगठन के सक्रिय कैडरों पर दबाव बढ़ता गया. इसका असर संगठन की गतिविधियों पर भी पड़ा.

लंबे समय से भूमिगत था ब्रजेश गंझू

टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू लंबे समय से भूमिगत रहकर संगठन का संचालन कर रहा था. सार्वजनिक रूप से उसकी गतिविधियां सामने नहीं आती थीं. हालांकि, समय-समय पर संगठन की ओर से अलग-अलग नामों से प्रेस विज्ञप्तियां जारी होने की जानकारी मिलती रही.

सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं. अब ब्रजेश गंझू के मारे जाने और इससे पहले आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद संगठन के पुराने नेतृत्व ढांचे पर दबाव और बढ़ गया है. आगे संगठन में बचे कैडरों की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी.

टीपीसी से टीएसपीसी तक पहुंचा संगठन

टीपीसी यानी तृतीय प्रस्तुति कमेटी के गठन को माओवादी संगठन से अलग हुए धड़े से जोड़ा जाता है. बाद में यही संगठन टीएसपीसी यानी तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी के नाम से जाना गया. चतरा, पलामू, लातेहार और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक इसकी गतिविधियां रही हैं.

संगठन के शुरुआती दौर को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं. बाद के वर्षों में टीएसपीसी स्वयं सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना और उसके खिलाफ अभियान चलाये गये.

अमेरिकी हथियार मिलने से भी चर्चा में रहा संगठन

टीएसपीसी कैडरों के पास से विदेशी हथियार मिलने के मामले भी सामने आये हैं. आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अमेरिकी निर्मित एम-16 ए-1 राइफल बरामद करने की बात कही थी. रिपोर्टों के अनुसार, राइफल पर अमेरिकी सरकार की संपत्ति से संबंधित अंकन भी था.

लगातार कार्रवाई से सिमटता गया प्रभाव

एक समय चतरा के कई जंगल और सीमावर्ती इलाके टीएसपीसी की गतिविधियों से प्रभावित रहे. पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के साथ संगठन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी तेज हुई. गिरफ्तारियों, आत्मसमर्पण और शीर्ष नेतृत्व पर हुई कार्रवाई के बाद संगठन की सक्रियता में कमी आती गयी.

आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद अब सरदार उर्फ ब्रजेश गंझू के मारे जाने को संगठन के पुराने नेतृत्व के लिए एक और महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की नजर संगठन के बचे हुए कैडरों और उसकी आगे की गतिविधियों पर रहेगी.

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लेखक के बारे में

By मो. तसलीम

मो. तसलीम चतरा से 10 साल से प्रभात खबर के साथ जुड़े हैं. क्राइम रिपोर्टिंग, भ्रष्टाचार और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि है. निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता करना इनकी पहचान है. मो. तसलीम ने वर्ष 2025 में मार्खम कॉलेज, हजारीबाग से बीजेएमसी की डिग्री प्राप्त की थी.

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