Chaibasa News : अंग्रेजों ने बोडो हो व पांडुवा हो को दी थी फांसी

सेरेंगसिया में वीर शहीद बोडो हो और पांडुवा हो के समाधि स्थल पर दी गयी श्रद्धांजलि

चाईबासा.

पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड स्थित सेरेंगसिया में वीर शहीद बोड़ो हो और पांडुवा हो के शहादत दिवस पर शुक्रवार को झारखंड पुनरुत्थान अभियान ने शहीद स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित कर शहीदों का नमन किया. झारखंड आंदोलनकारी सह झारखंड पुनरुत्थान अभियान के केंद्रीय सलाहकार सदस्य जगदीश चंद्र सिंकु ने कहा कि 2 जनवरी 1838 को अंग्रेजों ने बोडो हो और पांडुवा हो को उतरी कोल्हान के ग्रामीणों को एकत्रित कर सबके सामने फांसी पर लटका दिया था, ताकि इस क्षेत्र के “हो ” विद्रोही डर जायें. अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करना छोड़ दें. कोलकाता, रामगढ़, रांची, चाईबासा के गितिलपी, सेरेंगसिया-जगन्नाथपुर भाया जैंतगढ़ होते हुए सुंदरगढ़ के रास्ते तत्कालीन मद्रास के लिए जाने का एकमात्र सीधा रास्ता था. अंग्रेजों ने इस रास्ते को जैक्सन रोड नाम रखा था.

अभियान का स्थापना दिवस पर वार्षिक सम्मेलन 22 को

अभियान के केंद्रीय महासचिव अमृत माझी ने कहा कि झारखंड पुनरुत्थान अभियान का गठन सेरेंगसिया के इसी शहीद समाधि स्थल के पास 22 जनवरी 2023 को एक गैर राजनीतिक सामाजिक संगठन के रूप में हुई थी. चाईबासा में आगामी 22 जनवरी, 2026 को अभियान का स्थापना दिवस पर वार्षिक सम्मेलन होगा. संगठन ने लगातार कोल्हान सहित झारखंड के ऐतिहासिक स्थानों को चिह्नित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी है.

शहीदों के सम्मान में जल, जंगल व जमीन की लड़ाई जारी रहेगी

झारखंड के वीर शहीदों को आदर्श मानकर ही झारखंड पुनरुथान अभियान लगातार जल, जंगल, जमीन की बचाव के लिए संघर्षरत है. मौके पर अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष सन्नी सिंकु, झारखंड आंदोलनकारी सह अभियान के केंद्रीय सलाहकार सदस्य कोलंबस हसदा, सुमंत ज्योति सिंकु, अभियान के जिला उपाध्यक्ष विकास केराई, जिला सचिव शैली शैलेंद्र सिंकु, अभियान के स्टूडेंट्स विंग केंद्रीय अध्यक्ष अरिल सिंकु,अभियान के जगन्नाथपुर प्रखंड अध्यक्ष विश्वनाथ बोबोंगा, मनोज गगराई,अभियान के जिला सदस्य देवराज हेंब्रम, खूंटकट्टी रैयत रक्षा समिति के अध्यक्ष बलभद्र सवैंया, सचिव केदारनाथ कालुंडिया, दामु दोरायबुरु,जयसिंह तिरिया, मनोज कुमार तिरिया, डूडू बिरुवा, गणेश हांसदा, कृष्णा टोपनो, मनोज अंगरिया, जेमा बिरुवा, हेमवती बिरुवा, मनीषा बागे, तुलसी बिरुवा, बिस्टुम हेस्सा, सिद्धयू हो, गुलिया बोयपाई, बामिया बोयपाई, नीतू बोयपाई, पाली बोयपाई आदि शामिल थे.

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Author: AKASH

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