प्रतिनिधि, चाईबासा दिहाड़ी मजदूर का पुत्र घनश्याम जामुदा ने मणिपुर में आयोजित (अंडर 19) राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में कांस्य और रजत पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है. प्रतियोगिता 14 से 18 जनवरी तक आयोजित की गयी थी.
माता-पिता दिहाड़ी मजदूर
घनश्याम जामुदा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सुदूरवर्ती गांव कोटसोना गांव का रहने वाला है. पिता बीरसिंह जामुदा और माता गीता जामुदा दिहाड़ी मजदूर हैं. घनश्याम वर्तमान में अपने मामा सुरेश देवगम और प्रधान देवगम के घर में रहते हैं.माता-पिता ने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया कठिन परिस्थितियों में भी इसके माता- पिता ने अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया. घनश्याम ने भी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया. वर्तमान में घनश्याम तुरतुंग तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र सिकुरसाई चाईबासा में नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. प्रशिक्षक महर्षि महेंद्र सिंकु की मेहनत और प्रशिक्षण केंद्र की खेल सुविधाओं ने घनश्याम की प्रतिभा को सही दिशा देने का कार्य किया है. घनश्याम ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि हौसले बुलंद हों, तो गरीबी भी प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती. इससे पहले वह दो जूनियर नेशनल और एक सीनियर नेशनल भी खेल चुका है. वह जीसी कॉमर्स कॉलेज चाईबासा में 12वीं का छात्र है.माता-पिता को सम्मानित कियाप्रशिक्षक महर्षि की अगुवाई में प्रशिक्षण केंद्र के तीरंदाजों ने घनश्याम के घर तांबों जाकर उसके माता पिता को सम्मानित किया. इस मौके पर तीरंदाजी संघ के सिद्धार्थ पाड़ेया, सुमित बालमुचू, बीरसिंह पूरती, सुभाष जोंको एवं तुरतुंग तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र चाईबासा के अध्यक्ष नरेंद्र पाड़ेया, सुशील सिंकु, सुप्रभात कुसुम देवगम, तेजनारायण देवगम, कन्हैया लाल बुड़ीउली, बीरसिंह सुंडी शामिल थे.
खेल के लिए लगन बेहद जरूरी : बीरसिंहपिता बीरसिंह जामुदा ने बताया कि प्रतिभा और लगन किसी भी पृष्ठभूमि में हो सकती है. ऐसे बेटे देश, राज्य और जिला का नाम रोशन करते हैं.
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