भगता परब: लोटन करते भगतिया पहुंचे शिवालय, बाबा भोलेनाथ व बूढ़ा बाबा के जयकारे से गूंज उठा बोकारो का सिंहपुर

Updated at : 12 Apr 2024 9:12 PM (IST)
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भगता परब पर उमड़े श्रद्धालु

भगता परब पर उमड़े श्रद्धालु

बोकारो के कसमार में भगता परब पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. लोटन करते भगतिया शिवालय पहुंचे. बाबा भोलेनाथ व बूढ़ा बाबा के जयकारे से सिंहपुर गूंज उठा.

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कसमार (बोकारो): बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के सिंहपुर स्थित सुप्रसिद्ध प्राचीन शिवालय में चार दिवसीय भगता परब (चड़क पूजा या गांजान) शुक्रवार को संजोत और लोटन सेवा के साथ शुरू हो गया. शाम को लगभग डेढ़ हजार से अधिक भगतिया लोटन सेवा में शामिल हुए. इसके तहत स्थानीय शिव गंगा (सायर बांध) में एक साथ स्नान करने के बाद सभी भगतिया लोटन करते (जमीन पर लोटते) हुए तालाब से शिवालय तक पहुंचे. इस दौरान ‘बाबा भोलेनाथ’ और ‘बूढ़ा बाबा’ के जयकारे से पूरा सिंहपुर गूंज उठा. इससे पहले सायर बांध में भूखल ओझा, सिदाम बाउरी, भुवनेश्वर महतो, भीम सिंह, धीरेन महतो आदि की देखरेख में विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. इस दौरान सभी भगतिया ने जनेऊ धारण किया. उसके बाद सभी ने तालाब के किनारे पिंड (भूतपीढ़ा) बनाया. उसमें गुलांची फूल, अरवा चावल, चना दाल, मिश्री आदि चढ़ा कर पूजा की गयी. उसके बाद लोटन सेवा का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक चला. कई नन्हे-मुन्ने बच्चे भी लोटन सेवा में शामिल हुए, जबकि अनेक ग्रामीणों ने लोटन करते भगतिया के बीच अपने छोटे-छोटे बच्चों को सुलाकर आशीर्वाद लिया. मान्यता है कि ऐसा करने ने बच्चे को स्वस्थ और दीर्घायु जीवन मिलता है.

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
लोटन देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुईं. मौके पर स्थानीय विधायक डॉ लंबोदर महतो की धर्मपत्नी कौशल्या देवी मुख्य रूप से मौजूद थीं. विधायक डॉ महतो ने कहा कि यह पर्व हमारी मूल संस्कृति का एक अभिन्न अंग है. इसने कई खूबियों को अपने आप में समेट रखा है. उन्होंने सभी भगतियों को शुभकामनाएं दी.

सांड़दगाई भी हुई
लोटन के बाद देर शाम को ””सांडदगाई”” की रस्म भी पूरी हुई. लोटन सेवा एवं प्रसाद वितरण के बाद सांड़दगाई की परंपरा निभायी गयी. इसमें वैसे नये भगतिया, जिन्हें उपवास के दूसरे दिन (14 अप्रैल) पीठ पर कील छिदवा कर झूलेंगे, को घी के दीया में बांस के बेंत को गर्म कर पुजारी द्वारा दागा जाता है. इस रस्म के बाद ही नये भगतिया भगता झूलने के योग्य बन पाते हैं.

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गांवों में हुआ पाट भ्रमण
इससे पूर्व दिन में पाट भ्रमण भी हुआ. इसके तहत काष्ठ की एक विशेष प्रतिमा का भ्रमण सिंहपुर, खैराचातर, उदयमारा, बसरिया, डुमरकुदर, भवानीपुर समेत आसपास के गांवों में किया गया. भ्रमण के दौरान घर-घर में उसकी पूजा की गयी. भ्रमण के उपरांत पाट को स्थानीय सायर बांध के तट पर ले जाया गया, जहां पाट पूजा के बाद सभी भगतिया को जनेऊ धारण कराया गया. बता दें कि इस बार पाट भ्रमण को पांच दिवसीय किया गया है.

ये थे मौजूद
मौके पर विधा कमेटी के अध्यक्ष रंजीत कुमार साव, सचिव घनश्याम नायक, कोषाध्यक्ष शंकर महतो, फुलसुसारी मनोज कुमार सिंह, सुफलचंद्र महतो, अधीरचंद्र शर्मा, लालमोहन महतो, सुरेश साव, लखन साव, भरत तिवारी, सुनील शर्मा, मिथिलेश महतो, विष्णु जायसवाल के अलावा स्थानीय पंसस विनोद कुमार महतो, रूपेश साव, अशोक महतो, कमलेश्वर महतो, लालू कालिंदी, मुकेश घांसी, बैजनाथ डोम, श्रीमंत डोम, विनोद डोम, मदन डोम, विश्वनाथ डोम, लखीकांत महतो, राकेश साव, देवाशीष दे, प्रदीप कुमार महतो आदि मौजूद थे.

सिंहपुर इंटर कॉलेज खोलेगा पनशाला
सिंहपुर इंटर कॉलेज तथा उत्कर्ष आइटीआइ ने भगता परब के अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पनशाला खोलने का निर्णय लिया है. कॉलेज के निदेशक सुजीत कुमार एवं उत्कर्ष आइटीआइ के प्रभारी रणदेव कुमार मुर्मू ने बताया कि शनिवार एवं रविवार को यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है. भीषण गर्मी को देखते हुए कॉलेज परिवार द्वारा दोनों दिन पनशाला खोलकर श्रद्धालुओं के बीच शरबत, शीतल पेयजल, चना, गुड़ आदि का वितरण किया जाएगा.

झलकियां
-सायर बांध से प्राचीन शिवालय की दूरी लगभग 500 मीटर है. सभी भगतिया को शेयर बांध में पिंड, पूना व स्नान के बाद लोटन करते हुए शिवालय पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लगा.
-लोटन सेवा के अंत में एक झांकी निकली. इसमें गांव के डोम परिवार के उपासक औघड़ का रूप धारण करके पीछे पीछे चलते हुए शिवालय के गंगा द्वार तक पहुंचे. इस दौरान डोम परिवार के सदस्यों ने ढोल ढाक भी बजाए.
-लोटन सेवा में शामिल हुए भगतिया दिनभर उपवास में रहे. लोटन सेवा के समापन के बाद प्रसाद के तौर पर वहां फलाहार किया. खासकर चना और नया फल (आम) का सेवन किया गया. यह चना और फल ओझा परिवार द्वारा उपलब्ध कराया जाता है.
-भगता परब को लेकर प्राचीन शिवालय को लाइट से सजाया गया है.
-लोटन सेवा एवं अन्य रस्मों को सफल बनाने में पूजा कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य तत्पर रहे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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